पीएम मोदी, अमित शाह और नितिन नवीन की महाबैठक: दिल्ली से लेकर यूपी-बिहार तक सियासी गलियारों में तैर रहीं ये 13 बड़ी अटकलें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बीजेपी के शीर्ष नेताओं के साथ हुई एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। दिल्ली, लखनऊ और पटना के राजनीतिक गलियारों में बड़े सांगठनिक और प्रशासनिक बदलावों को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।

देश की राजधानी दिल्ली में इन दिनों राजनीतिक सरगर्मियां अपने चरम पर हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश दौरे से वापस लौटते ही बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व में बैठकों का दौर शुरू हो गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने गृहमंत्री अमित शाह, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष के साथ एक बेहद महत्वपूर्ण और लंबी बैठक की है। इस महाबैठक के बाद से ही राजनीतिक पंडितों और मीडिया गलियारों में चर्चाओं का बाजार बेहद गर्म हो गया है।

दिलचस्प बात यह है कि इस बैठक से कुछ ही घंटे पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी दिल्ली का दौरा कर गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। इसके साथ ही, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन भी हाल ही में लखनऊ के सांगठनिक दौरे से लौटे हैं। इन तमाम कड़ियों को एक साथ जोड़कर देखा जाए तो दिल्ली से लेकर लखनऊ और पटना तक की राजनीति में भारी फेरबदल के संकेत मिल रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में इस समय कुल 13 तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं, जो आने वाले दिनों में देश और राज्यों की सियासत की दिशा तय कर सकती हैं।

उत्तर प्रदेश की सियासत को लेकर उठते पांच बड़े सवाल

उत्तर प्रदेश हमेशा से भारतीय राजनीति का केंद्र बिंदु रहा है। आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए बीजेपी वहां अपनी पकड़ को और मजबूत करना चाहती है। इस बैठक के बाद उत्तर प्रदेश को लेकर पांच मुख्य अटकलें लगाई जा रही हैं:

1. विधानसभा चुनावों के लिए चुनावी रणनीति और समीक्षा

बीजेपी उत्तर प्रदेश में लगातार तीसरी बार सरकार बनाकर जीत की हैट्रिक लगाने की तैयारी में है। दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव पिछले 10 साल के सत्ता के वनवास को खत्म करने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं। हाल ही में अयोध्या के राम मंदिर में हुई कथित चोरी का मुद्दा और 2024 के लोकसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी के 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) फॉर्मूले की सफलता ने विपक्ष के हौसले बुलंद कर दिए हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बैठक में गृहमंत्री अमित शाह, नितिन नवीन और बीएल संतोष के साथ यूपी की चुनावी तैयारियों और रणनीति की बारीकी से समीक्षा की है।

2. यूपी संगठन में बड़े बदलावों की सुगबुगाहट

लखनऊ के राजनीतिक हलकों में यह चर्चा बेहद तेज है कि चुनावों को ध्यान में रखते हुए बीजेपी के प्रदेश संगठन में निचले स्तर पर बड़े बदलाव किए जा सकते हैं। हाल ही में प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने अपनी नई टीम की घोषणा की थी, जिसमें कुछ नए चेहरों को जगह दी गई थी। अब कयास लगाए जा रहे हैं कि अखिलेश यादव के पीडीए फॉर्मूले को बेअसर करने के लिए पंकज चौधरी खुद जिला स्तर पर जाकर फीडबैक लेंगे। इस जमीनी स्तर की समीक्षा के बाद कई जिलों के जिलाध्यक्षों को बदला जा सकता है ताकि संगठन में नई ऊर्जा का संचार किया जा सके।

3. केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल और यूपी की हिस्सेदारी

तीसरी बड़ी चर्चा प्रधानमंत्री मोदी के मंत्रिमंडल में होने वाले संभावित फेरबदल को लेकर है। माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश के चुनावी समीकरणों को साधने के लिए राज्य के कुछ नए सांसदों को केंद्रीय कैबिनेट में जगह दी जा सकती है। इसके साथ ही, केंद्र में यूपी से प्रतिनिधित्व करने वाले मौजूदा मंत्रियों के विभागों में भी बड़ा फेरबदल देखने को मिल सकता है, जिससे जनता के बीच एक सकारात्मक संदेश जाए।

4. दिल्ली से केंद्रीय नेताओं की टीम को यूपी भेजने की योजना

चौथी अटकल यह है कि चुनाव प्रचार को अधिक धारदार बनाने के लिए केंद्रीय नेतृत्व दिल्ली से कुछ कद्दावर नेताओं की एक विशेष टीम उत्तर प्रदेश भेज सकता है। यह टीम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ मिलकर चुनावी रैलियों, प्रचार अभियानों और रणनीति के क्रियान्वयन में सहयोग करेगी। इससे राज्य स्तर के कार्यकर्ताओं को यह स्पष्ट संदेश जाएगा कि पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व पूरी तरह से उनके साथ खड़ा है।

5. विपक्षी दलों में सेंधमारी और दलबदल की राजनीति

उत्तर प्रदेश की राजनीति में दलबदल की अटकलें भी तेज हैं। एक तरफ अखिलेश यादव दावा कर रहे हैं कि वह जब चाहें बीजेपी के सांसद साक्षी महाराज को अपने पाले में ला सकते हैं। वहीं, पूर्व सांसद और बाहुबली नेता बृजभूषण शरण सिंह के बयानों में भी पिछले कुछ समय से पार्टी लाइन से अलग सुर दिखाई दे रहे हैं। इसके विपरीत, बीजेपी के सहयोगी दल सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के प्रमुख ओपी राजभर का दावा है कि विधानसभा चुनावों से ठीक पहले पश्चिम बंगाल की तर्ज पर समाजवादी पार्टी के कई सांसद टूटकर बीजेपी में शामिल हो सकते हैं। माना जा रहा है कि शीर्ष नेताओं की इस बैठक में इन राजनीतिक समीकरणों पर भी गंभीर चर्चा हुई है।

बिहार की राजनीति में मची हलचल के पीछे के चार समीकरण

बिहार में भी इस बैठक के बाद से राजनीतिक तापमान बढ़ गया है। वहां के सत्ता और विपक्ष के गलियारों में चार तरह की चर्चाएं चल रही हैं:

1. बिहार में 'ऑपरेशन लोटस' और आरजेडी में बगावत के आसार

बिहार को लेकर सबसे बड़ी अटकल यह है कि क्या वहां भी विपक्षी दलों में कोई बड़ी टूट होने वाली है। हाल ही में लोकसभा में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता अभय कुशवाहा ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात की है। खास बात यह है कि पिछले कुछ ही दिनों के भीतर यह उनकी दूसरी मुलाकात थी। इस मुलाकात के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या अभय कुशवाहा के नेतृत्व में आरजेडी के सांसद बगावत करने की तैयारी में हैं? आरजेडी के पास कुल 4 लोकसभा सांसद हैं, जिनमें तेजस्वी यादव की बड़ी बहन मीसा भारती भी शामिल हैं। चर्चा है कि यदि आरजेडी या तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद टूटकर आते हैं, तो क्या उन्हें आगामी केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार में शामिल किया जाएगा। इस मुद्दे पर भी शीर्ष नेताओं के बीच बातचीत होने का अनुमान है।

2. कानून-व्यवस्था और नेतृत्व की छवि पर सवाल

बिहार में पिछले कुछ समय में हुई आपराधिक घटनाओं के कारण मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की छवि को लेकर सवाल उठने लगे हैं। दूसरी तरफ, जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के बहाने लगातार सम्राट चौधरी पर व्यक्तिगत हमले कर रहे हैं। प्रशांत किशोर ने सम्राट चौधरी के असली नाम और उनकी शैक्षणिक योग्यता पर सवाल उठाते हुए उन्हें पद से हटाने की मांग की है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व इस डैमेज कंट्रोल के लिए राज्य के नेतृत्व में कोई बदलाव करने पर विचार कर रहा है।

3. बिहार बीजेपी संगठन में बड़े सांगठनिक बदलाव की उम्मीद

बिहार में बीजेपी पहली बार मुख्य सत्ताधारी दल की भूमिका में सरकार चला रही है। ऐसे में राज्य के सामाजिक और जातीय समीकरणों पर अपनी पकड़ को मजबूत बनाए रखने के लिए संगठन स्तर पर बड़े बदलावों की अटकलें लगाई जा रही हैं। कयास हैं कि पार्टी पिछड़े और अति पिछड़े वर्गों को साधने के लिए संगठन में नए चेहरों को जिम्मेदारी सौंप सकती है।

4. केंद्रीय मंत्रिमंडल में बिहार का नया प्रतिनिधित्व

बिहार को लेकर चौथी बड़ी चर्चा भी केंद्रीय कैबिनेट विस्तार से जुड़ी है। माना जा रहा है कि अगर प्रधानमंत्री मोदी अपनी कैबिनेट में बदलाव करते हैं, तो बिहार से कुछ नए चेहरों को मंत्री बनने का मौका मिल सकता है, जबकि कुछ मौजूदा मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है या उनके विभागों में बदलाव किया जा सकता है।

केंद्रीय स्तर और राष्ट्रीय संगठन में बड़े बदलावों की तैयारी

इस महाबैठक के बाद न केवल राज्यों में बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी बीजेपी और केंद्र सरकार में बड़े बदलावों की सुगबुगाहट तेज हो गई है। इसे लेकर चार मुख्य अटकलें हैं:

1. राष्ट्रीय संगठन में बड़े पैमाने पर बदलाव

कहा जा रहा है कि इसी सप्ताह बीजेपी की राष्ट्रीय सांगठनिक टीम में एक बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। नई टीम के गठन में राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की छाप स्पष्ट रूप से दिखाई देगी। चर्चा है कि इस नई टीम में पुराने और अनुभवी नेताओं के अनुभव का सम्मान करते हुए युवा चेहरों को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी ताकि पार्टी को भविष्य के लिए तैयार किया जा सके।

2. सरकार और संगठन के बीच चेहरों की अदला-बदली

दूसरी बड़ी अटकल यह है कि प्रधानमंत्री मोदी अपनी कैबिनेट के कुछ मंत्रियों को सरकार से हटाकर संगठन की जिम्मेदारी सौंप सकते हैं। वहीं, दूसरी ओर संगठन में लंबे समय से काम कर रहे कुछ कुशल रणनीतिकारों को सरकार में शामिल कर उन्हें मंत्री पद दिया जा सकता है। सरकार और संगठन के बीच का यह समन्वय आगामी विधानसभा चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन को बेहतर करने के उद्देश्य से किया जा सकता है।

3. महिला आरक्षण और परिसीमन से पहले महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना

संसद में महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक को दोबारा अमलीजामा पहनाने से पहले बीजेपी खुद को एक महिला-हितैषी पार्टी के रूप में और मजबूती से पेश करना चाहती है। कयास लगाए जा रहे हैं कि संगठन और सरकार दोनों में महिलाओं, विशेषकर युवा महिला नेताओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए कोई बड़ा और ऐतिहासिक निर्णय लिया जा सकता है।

4. पंजाब विधानसभा चुनावों के लिए विशेष रणनीति

चौथी महत्वपूर्ण अटकल पंजाब विधानसभा चुनावों को लेकर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 जुलाई को पंजाब के दौरे पर जाने वाले हैं। बीजेपी इस बार पंजाब में बेहद आक्रामक और मजबूत तरीके से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री ने अमित शाह, नितिन नवीन और बीएल संतोष के साथ पंजाब के इस दौरे और वहां की चुनावी रणनीति पर विशेष विचार-विमर्श किया है।

भविष्य के गर्भ में क्या है?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास पर हुई इस महत्वपूर्ण बैठक के बाद राजनीतिक हलकों में कयासों का दौर जारी है। इनमें से कौन सी अटकलें सच साबित होंगी और कौन सी केवल अफवाह बनकर रह जाएंगी, इसका पता तो आने वाले कुछ दिनों में ही चल पाएगा। लेकिन एक बात पूरी तरह से स्पष्ट है कि बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व इस समय बेहद सक्रिय है और आने वाले दिनों में देश की राजनीति में कुछ बहुत बड़े और दूरगामी फैसले देखने को मिल सकते हैं।

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