शिमला के जुब्बड़हट्टी एयरपोर्ट का नहीं होगा विस्तार: टेबल-टॉप रनवे बनी बाधा, अमृतसर के लिए उड़ान और सस्ते किराये से पर्यटन को लगेंगे पंख

शिमला हवाई अड्डे की भौगोलिक सीमाओं के कारण इसके विस्तार की योजना को व्यावहारिक नहीं माना गया है। सांसद सुरेश कश्यप की अध्यक्षता में हुई बैठक में दिल्ली-शिमला हवाई किराये को घटाकर लगभग 7,500 रुपये करने, अमृतसर के लिए नई उड़ानें शुरू करने और बेहतर सड़क संपर्क पर रणनीति बनाई गई।

शिमला एयरपोर्ट के विस्तार पर लगी रोक, भौगोलिक परिस्थितियां बनीं रुकावट

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला आने वाले पर्यटकों और स्थानीय निवासियों के लिए हवाई सेवाओं को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। शिमला के जुब्बड़हट्टी स्थित हवाई अड्डे का बड़े पैमाने पर विस्तार करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। शिमला संसदीय क्षेत्र के सांसद सुरेश कश्यप की अध्यक्षता में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में यह बात स्पष्ट की गई है। लगभग दो वर्षों के लंबे अंतराल के बाद आयोजित हुई इस एयरपोर्ट एडवाइजरी कमेटी की बैठक में हवाई अड्डे से जुड़े तमाम लंबित मामलों, यात्री सुविधाओं, कनेक्टिविटी, और भविष्य की रणनीतियों पर गहन मंथन किया गया।

इस बैठक में एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया, जिला प्रशासन, वन विभाग, राजस्व विभाग, पर्यटन विभाग और स्वास्थ्य विभाग के तमाम वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक के दौरान इस बात पर आम सहमति बनी कि जुब्बड़हट्टी हवाई अड्डे की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि इसका बड़े स्तर पर विस्तार करना संभव नहीं है। हालांकि, यात्रियों की सहूलियत को बढ़ाने और पर्यटन व्यवसाय को गति देने के लिए अन्य कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं।

टेबल-टॉप रनवे और भौगोलिक चुनौतियां

सांसद सुरेश कश्यप ने बैठक के बाद मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि जुब्बड़हट्टी एयरपोर्ट की सबसे बड़ी तकनीकी सीमा इसका रनवे है। यह एक टेबल-टॉप एयरपोर्ट है। टेबल-टॉप एयरपोर्ट उसे कहा जाता है जो किसी पहाड़ी या पठार के शीर्ष पर स्थित होता है और जिसके दोनों छोर पर गहरी खाई होती है। ऐसे हवाई अड्डों पर रनवे की लंबाई सीमित होती है और वहां बड़े आकार के विमानों का उतरना अत्यंत जोखिम भरा होता है।

सांसद ने स्पष्ट रूप से कहा कि रनवे छोटा होने के कारण यहां बड़े वाणिज्यिक विमानों का संचालन और हवाई अड्डे का व्यापक विस्तार तकनीकी और व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि भविष्य में हिमाचल प्रदेश में बड़े विमानों का नियमित संचालन करना है और देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की बढ़ती संख्या को संभालना है, तो राज्य में एक नए वैकल्पिक हवाई अड्डे की संभावनाओं पर गंभीरता से विचार करना होगा। वर्तमान बुनियादी ढांचे में बड़े बदलाव की गुंजाइश बेहद सीमित है।

अमृतसर के लिए उड़ान की उम्मीद, मनाली की राह कठिन

हवाई अड्डे के विस्तार की सीमाओं के बावजूद प्रशासन शिमला से हवाई संपर्क को और बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रहा है। सांसद ने बताया कि वर्तमान में शिमला से बेहद सीमित उड़ानें ही संचालित की जा रही हैं, लेकिन अब अमृतसर जैसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और व्यापारिक शहर के लिए नई उड़ान सेवाएं शुरू करने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। शिमला और अमृतसर के बीच हवाई सेवा शुरू होने से न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि दोनों राज्यों के व्यापारियों को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा।

हालांकि, कुल्लू-मनाली के लिए हवाई सेवा की उम्मीद कर रहे लोगों को फिलहाल निराशा हाथ लग सकती है। बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि जुब्बड़हट्टी से कुल्लू-मनाली के लिए नियमित हवाई सेवा शुरू होने की संभावना अभी न के बराबर है। इसका मुख्य कारण भी हवाई अड्डे की तकनीकी सीमाएं और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां ही हैं, जिसके चलते इस मार्ग पर उड़ानों का परिचालन सुरक्षित नहीं माना जा रहा है।

पीपीपी मॉडल की अफवाहें खारिज, किराये में मिली भारी राहत

पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया और स्थानीय गलियारों में यह चर्चा गर्म थी कि शिमला एयरपोर्ट के संचालन को सार्वजनिक निजी भागीदारी यानी पीपीपी मॉडल पर सौंपने की तैयारी की जा रही है। सांसद सुरेश कश्यप ने इन सभी अटकलों और अफवाहों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार के पास हवाई अड्डे को पीपीपी मॉडल पर देने का ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। सरकार का पूरा ध्यान वर्तमान सरकारी व्यवस्था के तहत ही हवाई अड्डे की सुविधाओं को उत्कृष्ट बनाना है।

इसके साथ ही हवाई यात्रियों के लिए एक और बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। शिमला-दिल्ली हवाई मार्ग पर सफर करने वाले यात्रियों को पहले भारी भरकम किराया चुकाना पड़ता था। सांसद ने बताया कि पहले केवल 13 सीटों पर ही सरकारी सब्सिडी का लाभ मिलता था, जिसके कारण शेष यात्रियों को एक तरफ के टिकट के लिए 20 से 22 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ते थे। अब इस व्यवस्था में बड़ा सुधार किया गया है। नई व्यवस्था के अंतर्गत शिमला से दिल्ली की उड़ान का किराया अब करीब 7,500 रुपये तय कर दिया गया है। किराए में की गई इस बड़ी कटौती से आम यात्रियों को भारी राहत मिलेगी और शिमला आने वाले पर्यटकों की संख्या में भी भारी इजाफा होने की उम्मीद है।

उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ समय के दौरान विभिन्न तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से शिमला से हवाई उड़ानें बुरी तरह प्रभावित रही थीं। सांसद सुरेश कश्यप ने आरोप लगाया कि पूर्व में इस दिशा में राज्य सरकार की ओर से जैसा सहयोग मिलना चाहिए था, वैसा अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पा रहा था। हालांकि, तमाम बाधाओं को पार करते हुए बीते 10 मई से उड़ानों का संचालन फिर से सुचारू रूप से शुरू कर दिया गया है और अब इन्हें पूरी तरह नियमित बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।

पर्यटकों के लिए बनेगा वन-स्टॉप सेंटर और मिलेगी सांस्कृतिक झलक

शिमला पहुंचने वाले सैलानियों के स्वागत और उनकी सुविधा के लिए एयरपोर्ट पर विशेष प्रबंध किए जा रहे हैं। हवाई अड्डे पर अब एक समर्पित वन-स्टॉप टूरिस्ट हेल्प सेंटर स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। इस हेल्प सेंटर के माध्यम से पर्यटकों को हवाई अड्डे पर उतरते ही हिमाचल प्रदेश के विभिन्न होटलों, होम-स्टे, वन विभाग के विश्राम गृहों, स्थानीय टैक्सी सेवाओं, त्वरित चिकित्सा सुविधाओं और अन्य आवश्यक पर्यटन सेवाओं की सटीक जानकारी एक ही छत के नीचे मिल जाएगी। पर्यटन विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि वे इस सूचना केंद्र को अत्याधुनिक और प्रभावी बनाएं ताकि पर्यटकों को अपनी आगे की यात्रा की योजना बनाने में किसी भी तरह की असुविधा न हो।

सुरेश कश्यप ने कहा कि हवाई अड्डा केवल यात्रियों के आने-जाने का एक जरिया मात्र नहीं है, बल्कि यह राज्य की पहली छवि भी पेश करता है। इसलिए, शिमला हवाई अड्डे पर हिमाचल की समृद्ध संस्कृति और स्थानीय लोक कलाओं को प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाएगा। हवाई अड्डे के परिसर में सैलानियों को हिमाचली टोपी, शॉल, प्रसिद्ध चंबा रूमाल, स्थानीय हस्तशिल्प, हैंडलूम उत्पाद और राज्य की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी अन्य दुर्लभ सामग्रियां प्रदर्शित की जाएंगी। इसके अतिरिक्त, राज्य के विभिन्न अनछुए पर्यटन स्थलों को बढ़ावा देने वाले रंग-बिरंगे ब्रोशर भी यहां उपलब्ध कराए जाएंगे।

सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं

यात्रियों की सुरक्षा और आकस्मिक स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को लेकर भी बैठक में कड़े दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। यह सुनिश्चित किया गया है कि हवाई अड्डे पर उड़ानों के आगमन और प्रस्थान के समय अनिवार्य रूप से योग्य डॉक्टरों की टीम तैनात रहेगी। इसके अलावा, किसी भी प्रकार की चिकित्सीय आपातकालीन स्थिति से तुरंत निपटने के लिए हवाई अड्डा परिसर में हर समय 108 एंबुलेंस की सेवा भी उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि मरीज को बिना समय गंवाए नजदीकी बड़े अस्पताल पहुंचाया जा सके।

ट्रैफिक जाम से निजात के लिए बनेगी वैकल्पिक सड़क

जुब्बड़हट्टी हवाई अड्डे की ओर जाने वाले मुख्य मार्ग पर अक्सर लगने वाले लंबे ट्रैफिक जाम की समस्या पर भी चिंता व्यक्त की गई। पर्यटकों और स्थानीय लोगों को इस जाम से बचाने के लिए एक वैकल्पिक बाईपास या नई सड़क बनाने की योजना पर विस्तार से चर्चा हुई। सांसद ने जानकारी दी कि इस वैकल्पिक सड़क परियोजना को अमलीजामा पहनाने के लिए आगामी 20 जुलाई को एक उच्च स्तरीय संयुक्त टीम मौके का निरीक्षण करेगी।

इस संयुक्त निरीक्षण दल में एसडीएम कंडाघाट सहित जिला प्रशासन, वन विभाग और राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। यह टीम प्रस्तावित मार्ग का बारीकी से मुआयना करेगी और इसके बाद आवश्यक वन एवं राजस्व स्वीकृतियों जैसी औपचारिकताओं को पूरा कर इस सड़क निर्माण परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा। इस नई सड़क के बन जाने से हवाई अड्डे तक पहुंचने का समय काफी कम हो जाएगा और यात्रियों को कंडाघाट और शिमला के मुख्य मार्गों पर होने वाले ट्रैफिक जाम से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाएगी।

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