पटना में जल्द शुरू होगा पशुओं का अत्याधुनिक ब्लड बैंक, इंसानों की तरह ही होगा खून का मिलान

पटना के बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय में पशुओं के लिए एक विशेष ब्लड बैंक की स्थापना की जा रही है, ताकि गंभीर बीमारियों और दुर्घटनाओं के समय उन्हें सही ब्लड ग्रुप का खून समय पर मिल सके।

पशु चिकित्सा के क्षेत्र में एक नई पहल

क्या आप जानते हैं कि जिस तरह इंसानों को आपातकालीन स्थिति में खून की आवश्यकता पड़ती है, उसी प्रकार पशुओं को भी कई बार रक्त चढ़ाने की जरूरत होती है। हकीकत यह है कि पशुओं के भी इंसानों की तरह अलग-अलग ब्लड ग्रुप होते हैं। किसी गंभीर दुर्घटना, बड़े ऑपरेशन या जटिल बीमारियों के दौरान समय पर सही ब्लड ग्रुप का खून न मिल पाने के कारण कई बार पशुओं की जान तक चली जाती है। इसी गंभीर समस्या का समाधान निकालने के लिए अब बिहार की राजधानी पटना में पशुओं के लिए एक अत्याधुनिक ब्लड बैंक बनाने की योजना पर काम किया जा रहा है।

बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय में तैयार होगा सुविधा केंद्र

यह महत्वपूर्ण सुविधा बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले बिहार वेटरनरी कॉलेज के क्लीनिकल कॉम्प्लेक्स में स्थापित की जाएगी। इस विषय पर जानकारी देते हुए बिहार वेटरनरी कॉलेज के डीन डॉ. पल्लव शेखर ने बताया कि पूरे देश में ऐसे बहुत कम विश्वविद्यालय हैं, जहां पशुओं के लिए ब्लड बैंक की सुविधा मौजूद है। बहुत जल्द इस सूची में बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय का नाम भी शामिल हो जाएगा। फिलहाल इस दिशा में तेजी से काम चल रहा है ताकि पशुपालकों और पशुओं को यह आवश्यक सेवा मिल सके।

पशुओं को खून की आवश्यकता क्यों होती है

डॉ. पल्लव शेखर ने विस्तार से समझाया कि आखिर पशुओं को खून चढ़ाने की जरूरत कब पड़ती है। उन्होंने बताया कि जब ब्लड टेस्ट रिपोर्ट में हीमोग्लोबिन का स्तर 5 या उससे नीचे चला जाता है, या फिर पीसीवी का स्तर 12 से कम हो जाता है, तो पशु को तुरंत रक्त चढ़ाने की आवश्यकता होती है। पशुओं में खून की कमी के पीछे कई प्रमुख कारण हो सकते हैं:

  • शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं को नष्ट करने वाली कुछ विशिष्ट बीमारियां।
  • पशुओं के भोजन में आयरन और कॉपर जैसे आवश्यक खनिज तत्वों की कमी।
  • पशुओं के पेट के अंदर पलने वाले परजीवी यानी कीड़े, जो रक्त चूसकर शरीर को कमजोर बनाते हैं।
  • आंतों के रास्ते खून का रिसाव होना।
  • शरीर के बाहर रहने वाले परजीवी, जो लगातार खून चूसते हैं।

इन सभी कारणों की वजह से पशु एनीमिया जैसी बीमारी का शिकार हो जाते हैं और उन्हें खून की जरूरत पड़ती है।

देश का सबसे बड़ा क्लीनिकल कॉम्प्लेक्स और भविष्य की योजनाएं

बिहार वेटरनरी कॉलेज में चल रहे निर्माण कार्य के बारे में बात करते हुए डीन ने बताया कि यहां न केवल बिहार बल्कि देश के सबसे बड़े पशु क्लीनिकल कॉम्प्लेक्स का निर्माण कार्य किया जा रहा है। आने वाले कुछ महीनों के भीतर बिहार सरकार द्वारा यह कॉम्प्लेक्स संस्थान को सौंप दिया जाएगा। इसी आधुनिक परिसर में पशुओं के लिए ब्लड बैंक को क्रियान्वित किया जाएगा।

वर्तमान में देश में जहां भी पशुओं के लिए ब्लड बैंक की सुविधा है, वहां भी वे बहुत ही सीमित प्रकार के पशुओं के लिए ही खून उपलब्ध करा पाते हैं। लेकिन बिहार वेटरनरी कॉलेज की यह परियोजना काफी अलग होगी, क्योंकि यहां लगभग सभी तरह के पशुओं के लिए खून उपलब्ध हो सकेगा। इसे शुरू करने के लिए कई चरण निर्धारित किए गए हैं। पहले चरण में केवल पालतू पशुओं पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा और उसके बाद धीरे-धीरे इस सेवा का दायरा अन्य सभी प्रकार के पशुओं के लिए भी बढ़ा दिया जाएगा।

पशुओं के विभिन्न ब्लड ग्रुप सिस्टम

इंसानों की तरह पशुओं में भी ब्लड ग्रुप की विविधता होती है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इनके प्रमुख ब्लड टाइप इस प्रकार हैं:

  • कुत्ते: इनमें मुख्य रूप से डीईए ब्लड टाइप पाया जाता है।
  • बिल्लियां: इनमें मुख्य रूप से ए, बी और एबी ब्लड टाइप होते हैं।
  • गाय: गायों में कुल 11 ब्लड ग्रुप सिस्टम होते हैं, जिनमें A, B, C, F, J, L, M, R, S, T और Z शामिल हैं।
  • घोड़े: इनमें 8 प्रकार के ब्लड ग्रुप सिस्टम पाए जाते हैं, जो A, C, D, K, P, Q, U और T हैं।
  • भेड़ और बकरी: इनमें भी अलग-अलग प्रकार के ब्लड ग्रुप सिस्टम मौजूद होते हैं।

इन सभी जटिलताओं को ध्यान में रखते हुए ही पटना में बन रहे इस ब्लड बैंक को तैयार किया जा रहा है ताकि पशु चिकित्सा के क्षेत्र में एक बड़ी राहत मिल सके।

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