अगर आप खेती-किसानी से जुड़े हैं तो गर्मी के मौसम में हर 3 साल में एक बार अपने खेत की गहरी जुताई जरूर करवाएं। दरअसल लगातार बढ़ते रासायनिक खाद के इस्तेमाल के कारण मिट्टी की सतह से कुछ इंच नीचे एक पतली कठोर परत जम जाती है, जिसके चलते पोषक तत्व नीचे तक नहीं पहुंच पाते और जमीन धीरे-धीरे बंजर होने लगती है। इसी समस्या से बचने के लिए हर तीन साल में एक बार प्लाऊ से गहरी जुताई बेहद जरूरी मानी जाती है, क्योंकि यह आधे से 1 फीट तक मिट्टी को उलट-पलट देता है।
क्या कहते हैं कृषि विशेषज्ञ
छतरपुर के नौगांव कृषि विज्ञान केंद्र में पदस्थ डॉक्टर कमलेश अहिरवार बताते हैं कि जिले में इस समय अधिकांश किसानों के खेत खाली पड़े हैं और तापमान 40 के पार चल रहा है। ऐसे में किसानों को अपने खेत की जुताई जरूर करवा लेनी चाहिए, हालांकि यह जुताई 3 साल में सिर्फ एक बार ही करनी चाहिए। उनके मुताबिक यह जुताई न केवल खरीफ की फसल के लिए बल्कि रबी सीजन की फसल के लिए भी लाभकारी साबित होती है।
डॉ. कमलेश सलाह देते हैं कि खेत की जुताई कल्टीवेटर या हेरो से करने के बजाय प्लाऊ से ही करवाई जाए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जुताई गहरी होनी चाहिए, तभी इसका असली फायदा मिलता है, वरना केवल पैसे की बर्बादी होती है।
जुताई के लिए प्लाऊ ही क्यों
विशेषज्ञ के अनुसार किसान सालों से खेतों में रासायनिक खाद का इस्तेमाल करते आ रहे हैं, जिसकी वजह से मिट्टी के नीचे एक पतली सीमेंटेड परत बन जाती है और इससे खेत की उर्वरता घटती चली जाती है। इस परत को तोड़ने के लिए गर्मी के मौसम में हर 3 साल में एक बार प्लाऊ से गहरी जुताई करना आवश्यक है। प्लाऊ गहरी जुताई करने में सक्षम होता है और मिट्टी को आधे से एक फीट तक पलट देता है, इसलिए पहली बारिश से पहले यह काम कर लेना चाहिए।
कठोर परत बनने की वजह
खेत में खाद, विशेषकर रासायनिक उर्वरक डालने के बाद सतह पर कठोर पपड़ी जमने का मुख्य कारण मिट्टी में पर्याप्त नमी का न होना, खाद का ठीक से न घुलना और भारी मशीनों का उपयोग है। जब यूरिया या डीएपी जैसी खाद को समान रूप से मिलाने के बजाय सतह पर ही छोड़ दिया जाता है और ऊपर से हल्का पानी (हवा या फुव्वारा/ड्रिप के जरिए) दिया जाता है, तो एक ठोस परत बन जाती है।
किराये पर भी उपलब्ध हैं यंत्र
छतरपुर जिले में कस्टम हायरिंग सेंटर भी खोले गए हैं, जहां से किसान ट्रैक्टर के साथ प्लाऊ यंत्र किराये पर ले सकते हैं या फिर अकेले प्लाऊ भी किराये पर लिया जा सकता है।
गर्मी में जुताई के फायदे
डॉ. कमलेश बताते हैं कि गर्मी में खेत की जुताई करने से मिट्टी में मौजूद कीट-पतंग नष्ट हो जाते हैं। जुताई के दौरान नीचे की मिट्टी ऊपर आ जाती है और उसमें दबे कीटों के बच्चे, लार्वे, अंडे और प्यूपा भी ऊपर आकर बिना किसी दवा के तेज धूप में खत्म हो जाते हैं। इससे अलग से दवाई डालने की जरूरत नहीं पड़ती। साथ ही बीमारी फैलाने वाले फफूंद, फंगस, वायरस और बैक्टीरिया भी समाप्त हो जाते हैं और खेत में पड़ा चारे का दाना भी नष्ट हो जाता है।
जलस्तर बढ़ाने में मददगार
विशेषज्ञ के मुताबिक खेत की जुताई न करने पर मानसून की बारिश का पानी खेत से बहकर नदी-नालों में चला जाता है और इसी के साथ खेत के पोषक तत्व भी बह जाते हैं। वहीं जुताई के बाद बारिश का पानी खेत में ही रुका रहता है, जिससे कुआं और ट्यूबवेल जैसे जलस्रोतों का जलस्तर भी बढ़ता है।
मानसून से पहले निपटा लें यह काम
डॉ. कमलेश का कहना है कि अगर गर्मियों में जुताई नहीं हो पाती, तो मानसून की पहली बारिश में खेत का पानी पोषक तत्वों समेत बह जाता है। इसलिए मई के आखिरी सप्ताह से लेकर 15 जून से पहले तक खेत की जुताई जरूर कर लेनी चाहिए।
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