कानपुर में मोमोज की दुकानों पर FDA का छापा, 115 किलो संदिग्ध चटनी नष्ट

कानपुर में खाद्य सुरक्षा विभाग ने मोमोज की दुकानों पर छापेमारी कर भारी गंदगी पाई और 115 किलो चटनी को नष्ट कर दिया। अधिकारियों ने तीन दुकानों को तत्काल प्रभाव से बंद करने का आदेश दिया है और नमूनों को जांच के लिए लैब भेजा है।

कानपुर में मोमोज की स्वच्छता पर बड़ा सवाल

यदि आप भी बाहर मोमोज खाने के शौकीन हैं और अक्सर सड़क किनारे या छोटी दुकानों से इनका स्वाद लेते हैं, तो यह खबर आपको सावधान कर देगी। कानपुर में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन यानी FDA की एक बड़ी छापेमारी के बाद मोमोज की स्वच्छता और गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जांच के दौरान कई ऐसी जगहें सामने आई हैं, जहां मोमोज बेहद गंदगी के बीच तैयार किए जा रहे थे। इतना ही नहीं, उनके साथ परोसी जाने वाली चटनी की स्थिति इतनी खराब थी कि उसे सुरक्षित नहीं माना जा सकता था।

डीएम के आदेश पर FDA की सघन जांच

कानपुर के जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह द्वारा दिए गए निर्देशों के बाद, खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने 15 जुलाई को कानपुर के विभिन्न इलाकों में विशेष जांच अभियान चलाया। इस दौरान साकेत नगर, रावतपुर और मसवानपुर के क्षेत्रों को मुख्य रूप से निशाना बनाया गया। छापेमारी के दौरान तीन प्रमुख मोमोज ठिकानों पर भारी अनियमितताएं पाई गईं, जिसके चलते विभाग ने इन दुकानों को तुरंत बंद करा दिया। टीम ने खाद्य पदार्थों के कई नमूने एकत्र किए और लगभग 115 किलोग्राम संदिग्ध चटनी को नगर निगम के वेस्ट डिस्पोजल यार्ड में नष्ट करवा दिया। अधिकारियों की टीम सबसे पहले साकेत नगर के केशव नगर पहुंची, जहां मोमोज बनाने की प्रक्रिया और सफाई का स्तर बेहद निराशाजनक था। रावतपुर गांव में भी स्थिति कुछ ऐसी ही थी, जहां चटनी को खुले और असुरक्षित माहौल में रखा गया था। वहां से करीब 40 किलो चटनी नष्ट की गई।

पंजीकरण का अभाव और गंदगी का अंबार

जांच के क्रम में FDA अधिकारियों ने रावतपुर गांव की एक अन्य दुकान का मुआयना किया। वहां न केवल सफाई का पूरी तरह अभाव था, बल्कि दुकान के पास खाद्य कारोबार के लिए जरूरी पंजीकरण तक नहीं मिला। टीम ने मोमोज और रंगीन चटनी के नमूने लिए और मौके पर ही करीब 45 किलो चटनी को नष्ट कर दिया। विभाग ने साफ निर्देश दिए कि जब तक ये दुकानदार नियमों के तहत पंजीकरण नहीं कराते और स्वच्छता मानक पूरे नहीं करते, तब तक दुकान नहीं खुलेगी। अभियान की तीसरी बड़ी कार्रवाई साकेत नगर के एक अन्य प्रतिष्ठान पर हुई। वहां भी चटनी को संदिग्ध और गंदी परिस्थितियों में संग्रहित किया गया था। वहां से 30 किलो चटनी नष्ट कराई गई और दुकान को सील करने जैसी स्थिति में बंद करा दिया गया। इसके अलावा, मसवानपुर इलाके में ठेलों पर बेचे जा रहे रंगीन फिंगर चिप्स और चटनी की भी जांच हुई। मानक के विपरीत पाए जाने पर इन्हें भी नष्ट कर दिया गया और विक्रेताओं को सख्त चेतावनी दी गई।

लैब रिपोर्ट के आधार पर होगी सख्त कानूनी कार्रवाई

खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा एकत्र किए गए सभी खाद्य नमूनों को प्रयोगशाला भेज दिया गया है। सहायक आयुक्त (खाद्य) संजय प्रताप सिंह ने स्पष्ट किया है कि यदि लैब रिपोर्ट में ये नमूने खाद्य सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतरते हैं, तो संबंधित दुकानदारों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के तहत कड़ी कानूनी कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने कहा कि आमजन के स्वास्थ्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। खाद्य कारोबारियों के लिए निर्माण, भंडारण और बिक्री में स्वच्छता के नियमों का पालन करना अनिवार्य है। यह अभियान कानपुर में निरंतर जारी रहेगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ग्राहकों तक केवल सुरक्षित और मानक के अनुरूप खाद्य पदार्थ ही पहुंचें।

https://www.indiatv.in/uttar-pradesh/up-kanpur-momos-were-being-prepared-amidst-unhygienic-conditions-the-fda-destroyed-115-kg-of-suspicious-chutney-2026-07-16-1231486