मानसून की नई करवट और अलर्ट
भारत में मानसून की सक्रियता का एक नया दौर शुरू हो चुका है। देश के अधिकांश हिस्सों में अब मौसम का मिजाज पूरी तरह से बदलता हुआ नजर आ रहा है। दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों में मूसलाधार बारिश का तांडव देखने के बाद अब वहां कुछ दिनों के लिए राहत के आसार हैं, लेकिन अब खतरा पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत की ओर बढ़ गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी IMD ने अपने ताजा बुलेटिन में अगले 7 दिनों का विस्तृत मौसम पूर्वानुमान जारी किया है। मुख्य रूप से बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र के कारण कई राज्यों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश की संभावनाएं प्रबल हो गई हैं।
क्यों हो रही है ऐसी स्थिति?
मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उससे सटे ओडिशा तथा पश्चिम बंगाल के तटवर्ती इलाकों में एक कम दबाव का क्षेत्र निर्मित हुआ है। इस मौसमी प्रणाली का सीधा असर पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा समेत पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र पर पड़ेगा। इस प्रभाव के चलते इन इलाकों में बारिश की गतिविधियों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होने वाली है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन इलाकों में मानसून सुस्त था, वहां भी अब नमी वाली हवाएं पहुंचने के कारण बारिश का सिलसिला तेज होगा।
ओडिशा और बिहार के लिए विशेष चेतावनी
ओडिशा के लिए 16 और 17 जुलाई का समय अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया है। इन दो दिनों में राज्य के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। विभाग का मानना है कि कहीं-कहीं अत्यंत भारी वर्षा भी दर्ज की जा सकती है। लगातार होने वाली इस मूसलाधार बारिश से निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इसके अलावा शहरी बाढ़ और नदियों के जलस्तर में अचानक वृद्धि होने का भी अंदेशा है। बिहार में भी 18 से 20 जुलाई के बीच मौसम का मिजाज बिगड़ने की पूरी संभावना है, जहां व्यापक बारिश हो सकती है।
पूर्वोत्तर राज्यों में लैंडस्लाइड का खतरा
पूर्वोत्तर भारत के सभी सातों राज्यों यानी अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में पूरे सप्ताह बारिश का दौर बना रहेगा। असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश के लिए 16 जुलाई यानी गुरुवार के दिन विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है। इन क्षेत्रों में पहाड़ी इलाका होने के कारण लगातार बारिश से भूस्खलन यानी लैंडस्लाइड की घटनाएं बढ़ने का खतरा बना रहता है। स्थानीय प्रशासन को पहले से ही बाढ़ बचाव की तैयारी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
पर्वतीय क्षेत्रों का हाल
उत्तर भारत के पहाड़ी राज्यों में भी मौसम बदलने वाला है। उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में अगले कुछ दिनों तक रुक-रुक कर बारिश होती रहेगी, लेकिन 18 से 21 जुलाई के बीच वर्षा की तीव्रता में काफी तेजी आएगी। उत्तराखंड में 19 जुलाई तक और हिमाचल प्रदेश में 18 और 19 जुलाई को भारी वर्षा की चेतावनी जारी की गई है। 20 और 21 जुलाई को इन दोनों राज्यों में अत्यधिक भारी वर्षा की भी संभावना है, जिसके कारण सड़क संपर्क बाधित होने और यात्रा में जोखिम बढ़ने की पूरी आशंका है।
दिल्ली-NCR और मैदानी इलाकों का मिजाज
जहां एक ओर देश के कई राज्य बारिश से जूझ रहे हैं, वहीं दिल्ली-NCR के निवासियों को फिलहाल कोई राहत नहीं मिलने वाली है। मौसम विभाग का कहना है कि राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में अभी भी पसीने वाली भीषण गर्मी और उमस का प्रकोप जारी रहेगा। अगले कुछ दिनों तक यहां बारिश की कोई संभावना नहीं है। हालांकि, उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों में अगले पांच दिनों तक सामान्य से कम वर्षा होने का पूर्वानुमान है। उत्तर प्रदेश में बारिश का दायरा धीरे-धीरे बढ़ेगा, जहां पूर्वी हिस्सों में 17 से 21 जुलाई और पश्चिमी हिस्सों में 19 से 21 जुलाई के बीच भारी बारिश दर्ज की जा सकती है। पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में भी 20 और 21 जुलाई को कुछ स्थानों पर भारी बारिश की फुहारें पड़ सकती हैं।
मध्य भारत और प्रायद्वीपीय क्षेत्रों की स्थिति
मध्य भारत की बात करें तो छत्तीसगढ़ में 16 और 17 जुलाई को भारी बारिश की संभावना है। पूर्वी मध्य प्रदेश में 18 और 19 जुलाई को मौसम खराब हो सकता है। विदर्भ क्षेत्र में भी बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। इसके विपरीत पश्चिम-मध्य भारत और दक्षिण भारत के अधिकांश हिस्सों में अगले 7 दिनों तक मौसम कमजोर रहेगा। तटीय कर्नाटक, केरल और कोंकण-गोवा के इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। वहीं, आंधी-तूफान के साथ 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का भी अलर्ट जारी किया गया है।
बचाव और सावधानी की सलाह
IMD ने तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में लू यानी हीटवेव चलने की चेतावनी दी है। कुल मिलाकर प्रशासन ने लोगों को सलाह दी है कि वे खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा करने से बचें और बाढ़ संभावित इलाकों के पास जाने की गलती न करें। अपनी सुरक्षा के लिए मौसम विभाग द्वारा जारी किए गए ताजा बुलेटिन पर निरंतर नजर बनाए रखना ही एकमात्र विकल्प है।
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