हाईकोर्ट में पेश हुए विधायक
मध्य प्रदेश में भाजपा विधायक संजय पाठक बुधवार को हाईकोर्ट की कार्यवाही के दौरान व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित हुए। यह पूरा मामला जस्टिस विशाल मिश्रा को फोन कॉल और संदेश भेजने से संबंधित एक चर्चित आपराधिक अवमानना केस का है। एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच के सामने सुनवाई के दौरान, विधायक ने एक हलफनामा दाखिल किया। इस हलफनामे में उन्होंने बिना किसी शर्त के अपनी गलती स्वीकार करते हुए माफी मांगी है।
विधायक का क्या है तर्क
विधायक संजय पाठक ने अपने लिखित हलफनामे के माध्यम से स्पष्टीकरण दिया कि जस्टिस विशाल मिश्रा को जो कॉल लगा था, वह पूरी तरह से एक अनजाने में हुई गलती थी। उन्होंने अदालत को बताया कि उनके फोन से जज के नंबर पर केवल एक सिंगल रिंग गई थी। इसके साथ ही, उन्होंने स्वीकार किया कि इसके बाद उन्होंने एक संदेश भेजा था, जिसका उद्देश्य मात्र अपना परिचय देना था। विधायक का कहना है कि यह सब अनजाने में हुआ और उनका इरादा न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का बिल्कुल नहीं था।
फैसले पर टिकी निगाहें
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें विस्तार से सुनीं और विधायक द्वारा मांगी गई माफी के बाद अपना फैसला फिलहाल सुरक्षित रख लिया है। मामले के अधिवक्ता आर्यन उरमालिया ने जानकारी दी कि हालांकि अदालत में कॉल और मैसेज का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था, फिर भी न्यायपीठ ने इस पर गंभीर रुख अपनाया। अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि फोन कॉल करना एक अलग बात हो सकती है, लेकिन कॉल के बाद संदेश भेजकर अपना परिचय देना न्यायिक मर्यादाओं के अनुकूल नहीं माना जा सकता। इसे अदालत की अवमानना से जुड़ा एक अत्यंत गंभीर विषय माना गया है। सुनवाई के बाद जब मीडिया ने उनसे पूछा कि उन्हें जज का निजी नंबर कैसे प्राप्त हुआ, तो संजय पाठक ने इस पर कोई भी टिप्पणी करने से साफ इनकार कर दिया और कहा कि अब अंतिम फैसला अदालत को ही करना है।
क्या है पूरा मामला
यह विवादित घटना 1 सितंबर 2025 की है। उस दौरान कोर्ट में एक विधायक के परिवार से जुड़ी कथित अवैध खनन की सुनवाई चल रही थी। तभी जस्टिस विशाल मिश्रा ने ओपन कोर्ट में इस बात का खुलासा किया कि एक विधायक ने उनसे संपर्क साधने का प्रयास किया है। न्यायिक निष्पक्षता और अदालत की गरिमा को बनाए रखने के लिए, जस्टिस मिश्रा ने तुरंत खुद को उस विशिष्ट मामले की सुनवाई से अलग करने का निर्णय लिया था।
याचिकाकर्ता और कानूनी प्रक्रिया
इस घटना के बाद कटनी निवासी आशुतोष मनु दीक्षित ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इस याचिका को स्वीकार करते हुए अदालत ने इसे न्यायपालिका की प्रतिष्ठा का विषय माना और संजय पाठक को नोटिस जारी किया था। इससे पहले कोर्ट ने विधायक की उस अर्जी को भी ठुकरा दिया था, जिसमें उन्होंने अदालत में व्यक्तिगत पेशी से छूट मांगी थी। जानकारी के अनुसार, आशुतोष मनु दीक्षित की ही शिकायत पर पूर्व में यह तथ्य भी सामने आया था कि संजय पाठक के परिवार की विभिन्न कंपनियों पर लगभग 430 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया गया है, जिसका जिक्र विधानसभा के पटल पर भी हो चुका है। अब सभी की नजरें हाईकोर्ट के अंतिम निर्णय पर टिकी हुई हैं कि अदालत इस पूरे घटनाक्रम को किस तरह देखती है।
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