गार्ड की हत्या के पीछे की क्रूर सच्चाई
बिलासपुर के सरकंडा स्थित बाल संप्रेषण गृह में हुई सुरक्षा गार्ड नरेंद्र कुमार खांडे की नृशंस हत्या ने पूरे सिस्टम को हिलाकर रख दिया है। मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, हत्या और उसके बाद आरोपियों के फरार होने की साजिश की परतें खुलती जा रही हैं। यह घटना उस समय हुई जब गंभीर अपराधों में निरुद्ध चार बाल कैदियों ने अपनी योजना को अंजाम दिया। गार्ड को रास्ते से हटाने के लिए उन्होंने पहले उनके हाथ-पैर पीछे की तरफ रस्सियों से मजबूती से बांध दिए थे और फिर उनके मुंह में कपड़ा ठूंस दिया ताकि वे शोर न मचा सकें। इस क्रूरता के कारण दम घुटने से सुरक्षा गार्ड की मौके पर ही मौत हो गई।
एक हफ्ते से रची जा रही थी साजिश
पुलिस की शुरुआती तफ्तीश में यह सामने आया है कि इस फरारी की साजिश कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था, बल्कि इसे एक हफ्ते से तैयार किया जा रहा था। बाल संप्रेषण गृह के भीतर इस तरह की बड़ी योजना बनती रही और प्रबंधन को इसकी भनक तक नहीं लगी, जो सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करता है। आरोपियों ने भागने के लिए बहुत ही सुनियोजित तरीके से सुरक्षा गार्ड को निशाना बनाया, जिससे यह साफ होता है कि वे किसी भी कीमत पर जेल से बाहर निकलने के लिए दृढ़ संकल्पित थे।
आरोपियों की तलाश और पुलिस की रणनीति
घटना के 48 घंटे बीत जाने के बाद भी पुलिस के हाथ अभी तक खाली हैं। बिलासपुर के एसएसपी रजनेश सिंह ने जानकारी दी कि सभी चारों आरोपी बालिग हैं और अब उनके खिलाफ हत्या का गंभीर मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने जब आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले, तो उसमें वे चारों एक ही मोटरसाइकिल पर बैठकर भागते हुए दिखाई दिए। फुटेज और अन्य सुरागों के आधार पर जांच रायगढ़ की तरफ मुड़ गई है। पुलिस की विशेष टीमें रायगढ़ और कोरबा के संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं। अधिकारियों का दावा है कि वे जल्द ही फरार आरोपियों को धर दबोचेंगे।
परिजनों का प्रदर्शन और न्याय की मांग
अपने प्रियजन को खोने के बाद सुरक्षा गार्ड नरेंद्र खांडे के परिजन गहरे सदमे में हैं और न्याय की मांग को लेकर अड़े हुए हैं। घटना के दूसरे दिन भी परिजन धरने पर बैठे रहे। उनकी मांग है कि मृतक के परिवार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए और परिवार के किसी एक सदस्य को सरकारी नौकरी मिले। मृतक के बहनोई ने अपना दुख व्यक्त करते हुए मांग की कि सार्वजनिक स्थानों पर इन आरोपियों की तस्वीरें लगाई जाएं ताकि जनता भी उन्हें पहचान सके और पुलिस को सहयोग मिल सके।
प्रबंधन की लापरवाही पर उठे सवाल
जिस बाल संप्रेषण गृह का काम अपचारी किशोरों को सुधारना और उनकी कड़ी निगरानी करना है, वहीं से चार कैदियों का इस तरह भाग निकलना पूरी व्यवस्था पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है। सुरक्षा में चूक के इस मामले में अब कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आखिर जेल प्रशासन इतने दिनों तक आरोपियों की संदिग्ध गतिविधियों को क्यों नहीं भांप पाया? इस पूरी साजिश में किसकी लापरवाही सबसे बड़ी रही और क्या इसमें कोई बाहरी मदद भी शामिल थी? इन सभी सवालों के जवाब अब पुलिस की विस्तृत जांच और होने वाली कार्रवाई से ही स्पष्ट हो पाएंगे, जिसके इंतजार में पीड़ित परिवार और स्थानीय प्रशासन है।
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