डीलिमिटेशन बिल: जादुई आंकड़े 360 से एनडीए की दूरी, क्या मानसून सत्र में बदलेगा सियासी गणित?

संसद के मानसून सत्र से पहले परिसीमन विधेयक को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। एनडीए सरकार के लिए दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा हासिल करना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, जिस पर सबकी निगाहें टिकी हैं।

संसद में परिसीमन बिल की आहट

संसद का मानसून सत्र शुरू होने वाला है और इस बार गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा डीलिमिटेशन बिल यानी परिसीमन विधेयक को लेकर हो रही है। आपको याद होगा कि पिछले सत्र के दौरान मोदी सरकार इस विधेयक को पारित कराने की कोशिश में थी, लेकिन दो-तिहाई बहुमत का जादुई आंकड़ा न मिल पाने के कारण यह संभव नहीं हो सका था। उस समय सरकार को कुल 360 मतों की आवश्यकता थी, जबकि वे इस आंकड़े से 54 वोट पीछे रह गए थे। अब राजनीतिक समीकरणों में आए बदलावों के बीच अटकलें लगाई जा रही हैं कि सरकार इस अहम विधेयक को एक बार फिर सदन के पटल पर पेश कर सकती है।

लोकसभा में अंकों का खेल

वर्तमान स्थिति को देखें तो लोकसभा में कुल 540 सदस्य मौजूद हैं। किसी भी संवैधानिक संशोधन को मंजूरी दिलाने के लिए कम से कम 360 सांसदों का समर्थन अनिवार्य है। फिलहाल एनडीए के पास 298 सांसदों का समर्थन है। यदि टीएमसी (TMC) के 20 बागी सांसद और उद्धव ठाकरे गुट के 6 सदस्य सरकार के खेमे में शामिल हो जाते हैं, तो यह संख्या बढ़कर 324 हो जाएगी। लेकिन इस जोड़-तोड़ के बाद भी सरकार बहुमत के लक्ष्य से 36 वोट पीछे ही रहती है।

डीएमके और एनसीपी (शरद पवार) की भूमिका

राजनीतिक विश्लेषकों की नजरें अब डीएमके और एनसीपी (शरद पवार) जैसे दलों पर टिकी हैं। यदि डीएमके के 22 सांसद और एनसीपी (शरद पवार) के 8 सांसद सरकार का साथ देते हैं, तो एनडीए का आंकड़ा 354 तक पहुंच सकता है। इसके बावजूद, सरकार दो-तिहाई बहुमत के जादुई आंकड़े से 6 वोट की दूरी पर ही रहेगी। ऐसे में अन्य छोटे दलों और निर्दलीय सांसदों का रुख निर्णायक साबित हो सकता है।

सुप्रिया सुले का नया फॉर्मूला

इसी बीच, एनसीपी (शरद पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने एक बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने राज्यों में लोकसभा सीटों को 50 प्रतिशत तक बढ़ाने का प्रस्ताव रखा था। सुप्रिया सुले के अनुसार, यदि सरकार देशभर में समान रूप से 50 प्रतिशत सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव लाती है, तो उस पर विचार किया जा सकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि आवश्यकता हुई तो वह सदन में इस संबंध में आधिकारिक संशोधन पेश करने के लिए तैयार हैं।

विपक्ष में क्या बढ़ेंगी मुश्किलें?

सुप्रिया सुले के इस बयान ने विपक्षी गठबंधन इंडिया (INDIA) के भीतर नई बहस छेड़ दी है। अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या शरद पवार और डीएमके सरकार के प्रस्ताव का समर्थन करेंगे, या फिर विपक्षी एकता बनी रहेगी। हालांकि, सुप्रिया सुले ने एनडीए में शामिल होने की तमाम चर्चाओं को खारिज करते हुए कहा कि उनकी पार्टी इंडिया (INDIA) गठबंधन के साथ मिलकर ही भविष्य के बड़े कदम उठाएगी।

मानसून सत्र में होगी अग्निपरीक्षा

सोमवार से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र पर पूरे देश की निगाहें हैं। यदि सरकार इस सत्र में परिसीमन बिल को सदन में लाती है, तो यह मौजूदा राजनीतिक वातावरण की सबसे कठिन परीक्षा होगी। देखना यह होगा कि क्या इस बार मोदी सरकार 360 के जादुई आंकड़े को पार कर पाती है या नहीं।

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