बेंगलुरु: क्लास से बाहर निकालकर की गई पिटाई, सदमे में 7वीं के छात्र ने उठाया आत्मघाती कदम

बेंगलुरु के एक निजी स्कूल में प्रताड़ना और पिटाई से आहत 7वीं कक्षा के छात्र ने आत्महत्या का प्रयास किया, जिसके बाद पुलिस ने स्कूल प्रशासन और शिक्षकों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

स्कूली प्रताड़ना का गंभीर मामला

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से एक बेहद दुखद और विचलित करने वाली खबर सामने आई है। यहाँ के एक नामी निजी स्कूल में पढ़ने वाले 7वीं कक्षा के एक छात्र ने अपने साथ हुई बदसलूकी और पिटाई के बाद अपनी जान देने की कोशिश की। इस खौफनाक घटना से पहले छात्र ने अपनी बहन को पूरी स्थिति के बारे में बताया था। घटना के तुरंत बाद छात्र को आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उसका इलाज चल रहा है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने स्कूल के प्रबंधकों और शिक्षकों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।

घटना की पूरी जानकारी

पुलिस से प्राप्त प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना मंगलवार को घटित हुई। पीड़ित छात्र शहर के मरियप्पनपाल्या इलाके के एक स्कूल में शिक्षा ग्रहण कर रहा था। अधिकारियों ने बताया कि कक्षा के दौरान किसी अन्य विद्यार्थी के साथ हुई एक छोटी सी शरारत के चलते शिक्षक ने न केवल उसे कड़ी फटकार लगाई, बल्कि उसे जबरन क्लास से बाहर भी निकाल दिया था। इस अपमान और मानसिक दबाव से छात्र बुरी तरह टूट गया। मामले की जांच कर रहे एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि छात्र के पिता की ओर से दी गई शिकायत के आधार पर ज्ञानभारती पुलिस थाने में स्कूल प्रबंधन के सचिव, स्कूल के प्रिंसिपल और 2 से 3 शिक्षकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है। इन आरोपियों पर BNS की संबंधित धाराओं और किशोर न्याय अधिनियम यानी जेजे एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

शिक्षा के अधिकार के तहत शिक्षा

पीड़ित छात्र स्कूल में शिक्षा के अधिकार यानी RTE अधिनियम, 2009 के अंतर्गत दाखिला लेकर पढ़ रहा था। छात्र के पिता ने अपनी शिकायत में गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि 14 जुलाई को स्कूल के संस्थापक सचिव, प्रधानाध्यापक और कुछ शिक्षकों ने किसी अज्ञात कारणवश उनके बेटे को अपना निशाना बनाया। पिता का आरोप है कि बच्चे के साथ बेरहमी से मारपीट की गई, जिससे उसके शरीर के कई हिस्सों पर गहरी चोटें आई हैं। पिता ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि शारीरिक पिटाई के बाद उपजे अत्यधिक भय और मानसिक वेदना के चलते उनके बेटे ने उसी दिन शाम के समय फांसी लगाकर आत्महत्या करने की कोशिश की।

लंबे समय से था मानसिक तनाव

पिता ने आगे बताया कि उनका बेटा पिछले कुछ दिनों से स्कूल जाने से पूरी तरह कतरा रहा था। छात्र का यह कहना था कि स्कूल के सचिव, प्रिंसिपल और शिक्षक उसे लगातार मानसिक रूप से परेशान कर रहे हैं। इतना ही नहीं, छात्र ने यह भी दावा किया कि अन्य छात्रों के अभिभावक भी उसे टारगेट कर रहे थे। माता-पिता उसे ढांढस बंधा रहे थे और उन्होंने उसे आश्वासन दिया था कि वर्तमान शैक्षणिक सत्र खत्म होते ही उसका दाखिला किसी दूसरे विद्यालय में करा दिया जाएगा, लेकिन इससे पहले ही यह हादसा हो गया। पुलिस फिलहाल इस मामले के हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही है।

स्कूल में बुलिंग के बढ़ते मामले

स्कूलों में छात्रों के साथ होने वाली प्रताड़ना का यह कोई इकलौता वाकया नहीं है। इससे पहले जयपुर में 9 साल की मासूम अमायरा ने बुलिंग से तंग आकर स्कूल की चौथी मंजिल से छलांग लगाकर अपनी जान दे दी थी। इसी तरह, बेंगलुरु में ही महज 5 दिन पहले एक और दुखद घटना हुई थी, जिसमें स्कूल में मात्र 20 रुपये का जुर्माना लगाए जाने से अपमानित महसूस करने पर एक छात्रा ने खुदकुशी कर ली थी।

सहायता के लिए संपर्क करें: यदि आप या आपका कोई परिचित मानसिक दबाव में है, तो कृपया पेशेवर मदद लें।

TISS Icall: 022-25521111 (सोमवार से शनिवार, सुबह 8 बजे से रात 10 बजे तक) उपलब्ध है।

https://www.indiatv.in/india/national/bengaluru-class-7-student-suicide-attempt-fir-against-private-school-2026-07-15-1231424