गैंग का खुलासा
चंद्रपुर पुलिस ने एक बेहद हैरान करने वाली साजिश का पर्दाफाश किया है जिसमें महज 18 हजार रुपये के बकाया भुगतान के विवाद के चलते 21 लाख 14 हजार रुपये की कीमत वाला एक पूरा ट्रक और उस पर लदे 342 गैस सिलेंडर को गायब कर दिया गया। इस मामले की सबसे चौकाने वाली बात यह है कि इस अपराध को अंजाम देने वाला कोई बाहरी अपराधी नहीं, बल्कि उसी ट्रक का ड्राइवर था जिसने अपने क्लीनर के साथ मिलकर इस पूरी वारदात को अंजाम दिया। पुलिस ने करीब चार दिन तक चली गहन छानबीन के बाद दो आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया है, जबकि एक गैस एजेंसी संचालक की तलाश अब भी जारी है।
घटना का विवरण
पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, यह घटना 12 जुलाई की है। खुटाला स्थित एमआईडीसी गैस बॉटलिंग प्लांट से अशोक लेलैंड कंपनी का एक ट्रक अचानक गायब हो गया था। इस ट्रक में 332 घरेलू और 10 कमर्शियल गैस सिलेंडर भरे हुए थे। ट्रक के मालिक और ट्रांसपोर्टर वैभव खांडरे ने जब इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई, तो पडोली पुलिस और स्थानीय अपराध शाखा ने संयुक्त रूप से मामले की जांच शुरू की और अंततः सच सामने आ गया।
साजिश और गिरफ्तारी
जांच में पता चला कि ट्रक ड्राइवर राजेंद्र काले ने अपने क्लीनर कुणाल घुरुडे के साथ मिलकर ट्रक को ठिकाने लगाने की योजना बनाई थी। दोनों ने मिलकर ट्रक को गडचिरोली स्थित मोहित गैस एजेंसी तक ले जाने का सौदा किया। वहां गोदाम में स्थान की कमी का बहाना बनाकर सिलेंडर को चंद्रपुर के चिचपल्ली में स्थित रणदिवे गैस एजेंसी में उतार दिया गया। पुलिस के अनुसार, रणदिवे गैस एजेंसी को शायद इस बात की जानकारी नहीं थी कि सिलेंडर चोरी के हैं। एजेंसी ने इनमें से 150 सिलेंडरों को ग्राहकों के बीच वितरित भी कर दिया था। स्थानीय अपराध शाखा के निरीक्षक अमोल काचौरे ने बताया कि छापेमारी के दौरान पुलिस ने 82 भरे हुए घरेलू सिलेंडर, 250 खाली घरेलू सिलेंडर, 10 भरे हुए कमर्शियल सिलेंडर और ट्रक को बरामद कर लिया है। कुल जब्ती की कीमत 21 लाख 14 हजार रुपये आंकी गई है।
बकाया राशि का विवाद
पूछताछ में ड्राइवर ने यह स्वीकार किया कि गैस एजेंसी संचालक के पास उसकी 18 हजार रुपये की राशि बकाया थी। लंबे समय से मांग करने के बावजूद भुगतान नहीं होने पर वह बेहद नाराज था और इसी खुन्नस में उसने ट्रक और माल को गायब करने की साजिश रची। पुलिस ने रणदिवे गैस एजेंसी से 2 लाख 47 हजार रुपये नकद भी जब्त किए हैं। हालांकि, मोहित गैस एजेंसी का संचालक मोहित पोतदार अभी फरार है और पुलिस उसकी तलाश कर रही है। उसकी गिरफ्तारी के बाद ही यह पता चल सकेगा कि क्या यह केवल पैसे का विवाद था या इसके पीछे कोई बड़ा संगठित गिरोह सक्रिय है। गौरतलब है कि इससे पहले उत्तर प्रदेश के झांसी में भी इसी साल मार्च के महीने में गैस सिलेंडरों से भरा एक ट्रक चोरी होने का मामला सामने आया था, जिसमें 524 सिलेंडर लदे थे और उनकी कीमत करीब 17,35,051 रुपये थी।
https://www.indiatv.in/maharashtra/truck-made-to-disappear-over-non-payment-of-rs-18000-outstanding-dues-in-chandrapur-2026-07-15-1231380