पूर्णिया का अनोखा मां कामाख्या मंदिर, जहां हर मंगलवार को असम से आती हैं देवी

बिहार के पूर्णिया में स्थित है मां कामाख्या का प्राचीन मंदिर, जहां हर मंगलवार को देवी के आगमन की मान्यता है। जानिए इस 700 साल पुराने मंदिर की अद्भुत परंपराएं और इसके महत्व के बारे में।

बिहार का अनूठा आध्यात्मिक केंद्र

भारत में आस्था और विश्वास के कई ऐसे केंद्र हैं जिनकी परंपराएं किसी को भी हैरान कर सकती हैं। बिहार के पूर्णिया जिले की मजरा पंचायत में स्थित मां कामाख्या मंदिर इन्हीं में से एक है। यह बिहार का पहला और भारत का दूसरा कामाख्या मंदिर माना जाता है। पूर्णिया जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह मंदिर प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर क्षेत्र में है। अपनी अनोखी मान्यताओं के चलते यह स्थान अब एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में भी अपनी पहचान बना चुका है, जहां देशभर से श्रद्धालु खिंचे चले आते हैं।

700 साल से अधिक पुराना इतिहास

मंदिर के पुजारी पवन कुमार झा और गौरीकांत मिश्रा के साथ स्थानीय कमेटी सदस्य भोला यादव का कहना है कि यह मंदिर 700 साल से भी अधिक पुराना है। इसकी प्राचीनता ही लोगों की अटूट आस्था का मुख्य कारण है। मंदिर समिति के सदस्यों के अनुसार, श्रद्धालु दूर-दराज के क्षेत्रों से अपनी मन्नतों को लेकर यहां आते हैं। भक्तों का अटूट विश्वास है कि जो भी सच्चे मन से यहां मां की आराधना करता है, उनकी प्रार्थनाएं कभी खाली नहीं जातीं।

मंगलवार का विशेष महत्व और मान्यता

इस मंदिर की सबसे चौंकाने वाली और खास मान्यता यह है कि साक्षात मां कामाख्या हर मंगलवार को असम से चलकर पूर्णिया के इस मंदिर में आती हैं। स्थानीय पुजारियों और निवासियों के अनुसार, असम स्थित मुख्य कामाख्या मंदिर के कपाट भी मंगलवार को बंद रहते हैं। ऐसी लोक मान्यता है कि मंगलवार के दिन सुबह 8:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक मां कामाख्या इसी मंदिर में साक्षात विराजमान रहती हैं। यही वजह है कि मंगलवार का दिन मंदिर में विशेष पूजा और अनुष्ठानों के लिए चुना जाता है।

बलि प्रथा और भक्तों की भीड़

मंदिर में मंगलवार के दिन का नजारा देखने लायक होता है। सुबह से ही दर्शन करने वालों की लंबी कतारें लग जाती हैं। अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए श्रद्धालु मां को तरह-तरह की वस्तुएं अर्पित करते हैं। इस मंदिर में विशेष बलि देने की भी एक प्राचीन प्रथा है, जिसका पालन भक्त अपनी मान्यताओं के अनुसार करते हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस विशेष समय अवधि के दौरान मंदिर परिसर में मां की दिव्य उपस्थिति का अनुभव किया जा सकता है। मंदिर के प्रति लोगों का लगाव और बढ़ती लोकप्रियता इस बात का प्रमाण है कि यह स्थान आज लाखों लोगों के लिए श्रद्धा का केंद्र बन चुका है। जो भी भक्त मंगलवार को मां कामाख्या के दर्शन के लिए यहां आते हैं, उनकी हर मुराद पूरी होती है, ऐसा पूर्णिया के निवासी गर्व के साथ बताते हैं।

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