शिवहर में जीविका दीदी का कमाल
बिहार में ग्रामीण परिवेश की महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने के लिए चलाए जा रहे जीविका कार्यक्रम के परिणाम अब धरातल पर नजर आने लगे हैं। कई महिलाएं अब न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुधार रही हैं, बल्कि वे स्वरोजगार के माध्यम से अन्य लोगों के लिए भी कमाई के अवसर पैदा कर रही हैं। इसी क्रम में शिवहर जिले के पुरनहिया ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले दोस्तियां गांव से एक प्रेरणादायक सफलता की कहानी सामने आई है। यहां की निवासी आमना खातून ने अपनी कड़ी मेहनत और जीविका के सहयोग से लहठी यानी लाह की चूड़ियां बनाने का काम शुरू किया और आज वह क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए एक बड़ी मिसाल बन चुकी हैं।
वर्ष 2018 में शुरू हुआ सफलता का सफर
आमना खातून के इस आत्मनिर्भर बनने के सफर की शुरुआत साल 2018 में हुई, जब उन्होंने जीविका समूह की सदस्यता ग्रहण की। उस समय उनके पास संसाधनों की काफी कमी थी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने समूह से 40,000 रुपये का ऋण लेकर लहठी निर्माण के काम की शुरुआत की। अपनी लगन और ईमानदारी के दम पर उन्होंने इस पहली पूंजी का सदुपयोग किया और समय पर ऋण चुकाया। इसके बाद उनका आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने अपने व्यवसाय को और आगे ले जाने के लिए चरणबद्ध तरीके से ऋण लिया। उन्होंने इसके बाद 80,000 रुपये और फिर 1.5 लाख रुपये का ऋण प्राप्त किया, जिससे उन्हें अपने छोटे से उद्योग को विस्तार देने में मदद मिली।
कामकाज का तरीका और परिवार का सहयोग
आज आमना खातून के घर पर संचालित इस लघु उद्योग में तरह-तरह की डिजाइनर और आकर्षक लहठियां तैयार की जाती हैं, जिनकी बाजार में भारी मांग रहती है। इस पूरे व्यवसाय को बड़े पैमाने पर चलाने में उन्हें अपने पूरे परिवार का भरपूर सहयोग मिल रहा है। वर्तमान में इस कारखाने में उनके पति, भाई और दो अन्य स्थानीय मजदूर मिलकर काम करते हैं। कुल पांच लोगों की यह टीम दिन-रात मेहनत करके ग्राहकों की मांग के अनुसार बेहतरीन गुणवत्ता वाली चूड़ियां तैयार करती है। आमना स्वयं घर पर रहकर निर्माण कार्य का प्रबंधन देखती हैं, जबकि उनके पति विपणन और माल की आपूर्ति का जिम्मा संभालते हैं। जीविका के अधिकारियों और समन्वयकों की मदद से उन्हें देश भर में आयोजित होने वाले विभिन्न मेलों में स्टॉल लगाने का अवसर मिलता है, जिससे उनका बाजार काफी व्यापक हो गया है।
सालाना 20 लाख तक पहुंचा टर्नओवर
आज आमना खातून का लहठी उद्योग शिवहर की सीमाओं को पार कर चुका है। उनकी तैयार की गई चूड़ियां अब पटना, दिल्ली, हरियाणा, बनारस, रांची और देवघर जैसे बड़े शहरों में भेजी जा रही हैं। जहां से भी ऑर्डर मिलता है, उनके पति खुद माल लेकर वहां तक सप्लाई करने जाते हैं। आमना के इस छोटे से गृह उद्योग का सालाना टर्नओवर आज 20 लाख रुपये तक पहुँच चुका है। इस व्यापार से उन्हें सालाना लगभग 5 से 6 लाख रुपये की शुद्ध बचत हो जाती है। आमना का कहना है कि इस कमाई के माध्यम से वे अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने में समर्थ हो रही हैं और उनका पूरा परिवार आर्थिक रूप से संतुष्ट है। वह चाहती हैं कि उनके गांव और क्षेत्र की अन्य महिलाएं भी घर से बाहर निकलकर जीविका समूह से जुड़ें और आत्मनिर्भर होकर अपने पैरों पर खड़ी हों।
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