पाकिस्तान में आतंकियों की बदलती रणनीति
पाकिस्तान में सक्रिय प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने भारत के विरुद्ध अपनी नापाक रणनीति में एक बहुत बड़ा और चिंताजनक बदलाव किया है। सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट और गुप्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यह संगठन अब केवल बंदूकों और बारूद पर निर्भर नहीं रह गया है। इसके बजाय, अब वे एक बेहद सुनियोजित और हाई-टेक जिहाद की जमीन तैयार कर रहे हैं, जिसने भारतीय सुरक्षा तंत्र को पूरी तरह से सतर्क कर दिया है। कश्मीर में सुरक्षाबलों की सख्त घेराबंदी और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बढ़ती चौकसी के कारण पारंपरिक घुसपैठ के रास्ते लगभग बंद हो चुके हैं, जिससे बौखलाकर लश्कर ने अब खुद को तकनीक और शारीरिक मजबूती के नए आयामों में ढालना शुरू कर दिया है।
राजनीतिक मुखौटे का सहारा
लश्कर-ए-तैयबा अपनी आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए सीधे अपने नाम का इस्तेमाल करने के बजाय अब पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग (PMML) जैसे राजनीतिक मुखौटों का उपयोग कर रहा है। इन सफेदपोश संगठनों के बैनर तले पाकिस्तान के विभिन्न प्रमुख शहरों में विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। इन कैंपों में केवल कट्टरपंथी विचारधारा का प्रचार नहीं किया जा रहा, बल्कि एक ऐसा कठिन मॉड्यूल तैयार किया गया है जो युवाओं को किसी भी युद्ध जैसी स्थिति के लिए तैयार करने का दावा करता है। यहाँ युवाओं को जूडो, कराटे, ताइक्वांडो, कुश्ती और अन्य कठिन शारीरिक व्यायाम सिखाए जा रहे हैं। इन गतिविधियों का प्राथमिक उद्देश्य एक ऐसा कैडर तैयार करना है जो शारीरिक क्षमता में किसी प्रशिक्षित कमांडो के स्तर तक पहुंच सके।
मोस्ट वांटेड आतंकी की सीधी निगरानी
इस पूरे प्रशिक्षण अभियान के दौरान एक चौंकाने वाला पहलू सामने आया है, जो सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय है। हाल ही में सामने आए कुछ वीडियो साक्ष्यों में भारत का मोस्ट वांटेड आतंकी राणा मोहम्मद अशफाक खुद स्विमिंग पूल में उतरकर पाकिस्तानी युवाओं को एडवांस तैराकी सिखाता हुआ नजर आ रहा है। सुरक्षा जानकारों का मानना है कि लश्कर के शीर्ष कमांडर का खुद पानी में उतरकर ट्रेनिंग देना इस बात का संकेत है कि संगठन जलमार्ग से होने वाली घुसपैठ की नई रणनीति बना रहा है। यह 26/11 जैसे समुद्री हमलों की तर्ज पर विशेष अभियानों की तैयारी हो सकती है। कठिन परिस्थितियों में पानी के अंदर रहकर दुश्मन की नजरों से बचकर सीमा पार करने की यह कला इन युवाओं को भविष्य के खतरनाक जल-सैनिकों के रूप में विकसित कर रही है।
AI और डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल
इस नई रणनीति का सबसे खतरनाक और हैरान करने वाला हिस्सा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और साइबर तकनीक से जुड़ा है। लश्कर ने स्किल डेवलपमेंट के नाम पर बड़ी संख्या में महिलाओं और युवतियों को भी अपने दायरे में लिया है। उन्हें विशेष रूप से कोडिंग, डिजिटल टूल्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बारीकियां सिखाई जा रही हैं। एक वीडियो के दौरान आतंकी राणा मोहम्मद अशफाक को यह स्वीकार करते हुए सुना जा सकता है कि भारत तकनीक के क्षेत्र में उनसे बहुत आगे निकल चुका है, इसलिए उनके आतंकियों को भी अब हर हाल में आधुनिक तकनीक में पारंगत होना ही होगा। यह स्पष्ट करता है कि वे भविष्य में सूचना युद्ध छेड़ने की तैयारी कर रहे हैं।
साइबर हमले और प्रोपेगेंडा का खतरा
खुफिया एजेंसियों के लिए यह तकनीकी झुकाव एक गंभीर चुनौती बन गया है। इस एडवांस ट्रेनिंग का सीधा उपयोग भविष्य में भारत के खिलाफ बड़े पैमाने पर साइबर हमले करने और महत्वपूर्ण डिजिटल बुनियादी ढांचों को नुकसान पहुंचाने के लिए किया जा सकता है। इसके अलावा, सोशल मीडिया पर डीपफेक तकनीक का उपयोग करके दुष्प्रचार फैलाने और घाटी के युवाओं को बरगलाने के लिए भी इस नए कैडर का इस्तेमाल होने की प्रबल संभावना है। पाकिस्तान में चल रहे इन कैंपों में लगातार शीर्ष आतंकियों का आना-जाना लगा रहता है, जो युवाओं को कथित धर्मयुद्ध के नाम पर भड़का रहे हैं। भारत की सुरक्षा एजेंसियां इस हाई-टेक नेटवर्क पर हर पल नजर बनाए हुए हैं और इसे आने वाले समय के लिए एक बड़ी सुरक्षा चुनौती के रूप में देख रही हैं।
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