प्रकृति का वह रहस्यमयी नज़ारा जो ग्रेविटी को देता है चुनौती
प्रकृति की गोद में कई ऐसे नजारे देखने को मिलते हैं जो हमारी आंखों पर यकीन करने को मजबूर कर देते हैं। अमूमन हम जानते हैं कि पानी का स्वभाव ऊंचाई से नीचे की ओर बहना है और यही गुरुत्वाकर्षण यानी ग्रेविटी का बुनियादी नियम भी है। लेकिन क्या आपने कभी ऐसा कल्पना की है कि पानी नीचे गिरने के बजाय आसमान की तरफ उड़ने लगे? यह सुनने में किसी साइंस फिक्शन फिल्म की कहानी जैसा लगता है, लेकिन यह सच है। इसे रिवर्स वाटरफॉल के नाम से जाना जाता है। हाल ही में चीन के झेजियांग प्रांत में कुछ ऐसा ही अद्भुत दृश्य कैमरे में कैद हुआ, जिसने इंटरनेट पर खलबली मचा दी है। हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब ऐसा हुआ हो; भारत में भी महाराष्ट्र के पहाड़ी इलाकों में ऐसे नजारों का अनुभव मानसून के दौरान अक्सर होता रहता है।
चीन में दिखा रिवर्स वाटरफॉल का हैरान कर देने वाला दृश्य
11 जुलाई को चीन के वेनझोउ शहर में टाइफून बावी ने दस्तक दी थी, जिसके कारण वहां भीषण तबाही और तेज हवाओं का दौर चला। इसी दौरान वहां स्थित डालोंगकिउ वाटरफॉल पर एक दुर्लभ प्राकृतिक घटना घटी। लगभग 190 मीटर यानी 623 फीट की ऊंचाई से गिरते हुए इस झरने के पानी को तेज आंधी ने नीचे गिरने ही नहीं दिया। तीव्र हवाओं ने पानी को उलटी दिशा में उछाल दिया, जिससे वहां पानी का एक भंवर सा बन गया और वह नीचे जाने के बजाय आसमान की तरफ उड़ने लगा। वहां मौजूद लोगों ने इस दुर्लभ दृश्य को अपने कैमरों में रिकॉर्ड किया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सब हवा के बेहद भारी दबाव के कारण संभव हुआ, जिसने एक प्राकृतिक रिवर्स इफेक्ट पैदा कर दिया।
क्या भारत में भी ऐसी प्राकृतिक घटनाएं होती हैं?
यह भ्रम न पालें कि यह दृश्य केवल चीन तक ही सीमित है। भारत के महाराष्ट्र में मानसून के दौरान ऐसे कई स्थान हैं जहां रिवर्स वाटरफॉल के दर्शन होते हैं। महाराष्ट्र के पश्चिमी घाट में स्थित नानेघाट इसका सबसे प्रमुख उदाहरण है। यह ऐतिहासिक पहाड़ी दर्रा समुद्र तल से लगभग 2600 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। जून से अगस्त के बीच जब यहां मानसून का जोर होता है, तो हवाओं की गति बेहद तीव्र हो जाती है। जब ऊंचाई से पानी नीचे की ओर गिरता है, तो नीचे से ऊपर की ओर चलने वाली हवाओं का दबाव इतना अधिक होता है कि वह पानी को धारा के रूप में नीचे गिरने से रोक देती है और उसे वापस ऊपर की तरफ उड़ा देती है। उस समय वहां का वातावरण किसी जादुई दुनिया जैसा प्रतीत होता है और यह स्थान पर्यटकों के लिए एक बड़ा आकर्षण बन जाता है।
नियाग्रा फॉल्स और दुनिया भर में इस घटना के उदाहरण
रिवर्स वाटरफॉल का अनुभव सिर्फ छोटे झरनों तक सीमित नहीं है। अमेरिका स्थित विश्व प्रसिद्ध नियाग्रा फॉल्स जैसे विशाल झरने भी इस घटना का साक्षी बनते हैं। नियाग्रा फॉल्स दुनिया के सबसे शक्तिशाली झरनों में गिना जाता है, जहां पानी का प्रवाह और वेग अत्यधिक होता है। इसके बावजूद, कई बार हवा की तीव्र गति और पानी के गिरने की दिशा के तालमेल से वहां भी रिवर्स वाटरफॉल जैसा भ्रम पैदा हो जाता है। जब हवा की गति पानी की गिरने की रफ्तार से अधिक हो जाती है, तो पानी नीचे जाने के बजाय हवा में बिखरने या ऊपर की ओर मुड़ने लगता है। दुनिया भर के वैज्ञानिक और भू-गर्भ शास्त्री इस घटनाक्रम पर लगातार शोध करते रहते हैं ताकि प्रकृति के इस व्यवहार को गहराई से समझा जा सके।
रिवर्स वाटरफॉल के पीछे छिपा असली विज्ञान
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो इसे किसी भी तरह का चमत्कार या जादू मानना गलत है। इसके पीछे का मुख्य कारण एयरोडायनामिक्स और वायुमंडलीय दबाव का अनूठा मिश्रण है। प्रक्रिया को सरल शब्दों में समझें तो:
- जब पहाड़ों की संकरी घाटियों या ऊंचे दर्रों के बीच से तेज हवाएं गुजरती हैं, तो उनकी गति कई गुना अधिक बढ़ जाती है।
- यह संकरी जगह एक तरह से टनल या नली का काम करती है, जिससे हवा का दबाव बढ़ जाता है।
- इसी रास्ते में यदि कोई झरना आता है, तो वह हवा का दबाव पानी की भारी धारा को नीचे गिरने से बाधित कर देता है।
- परिणामस्वरूप, पानी की धारा अपनी अखंडता खो देती है और वह फुहारों के रूप में हवा के झोंकों के साथ ऊपर की तरफ उड़ने लगती है।
यही कारण है कि देखने वाले को ऐसा लगता है जैसे पानी गुरुत्वाकर्षण के नियम को पूरी तरह से नकार रहा है। प्रकृति का यह रूप न केवल विस्मयकारी है, बल्कि यह भौतिक विज्ञान के उन सिद्धांतों का प्रदर्शन भी है जो अक्सर हमारी सामान्य नजरों से ओझल रहते हैं। चाहे वह चीन की पहाड़ियां हों या भारत के पश्चिमी घाट, रिवर्स वाटरफॉल हमेशा लोगों के लिए कौतूहल का विषय बना रहेगा।
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