भारत अपने समृद्ध हस्तशिल्प, सदियों पुरानी परंपराओं और वस्त्र उद्योग के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। देश के अलग-अलग हिस्सों में तैयार होने वाले कपड़े सिर्फ भारतीय संस्कृति की पहचान ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी अलग जगह बनाए हुए हैं। मगर क्या आपको पता है कि हमारे देश में एक ऐसा शहर भी है जिसे 'सिल्क सिटी' के नाम से पुकारा जाता है? यह शहर है बिहार राज्य में बसा भागलपुर, जहां बने रेशमी कपड़े और साड़ियां देश ही नहीं, विदेशों में भी खूब पसंद की जाती हैं।
भागलपुर को क्यों कहते हैं 'सिल्क सिटी'
भागलपुर में रेशम उद्योग का इतिहास सैकड़ों साल पुराना माना जाता है। यहां खास तौर पर टसर सिल्क का उत्पादन होता है, जो अपनी प्राकृतिक चमक, आकर्षण और खूबसूरत बनावट के लिए पहचाना जाता है। यहां के बुनकर पीढ़ी-दर-पीढ़ी रेशमी कपड़े तैयार करते आ रहे हैं और उनकी यह कला आज भी जीवित है। यही वजह है कि भागलपुर को भारत की 'सिल्क सिटी' कहा जाता है।
विदेशी बाजारों में जबरदस्त मांग
भागलपुर की सिल्क साड़ियां, दुपट्टे, स्टोल, कुर्ते और दूसरे परिधान अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जापान समेत कई यूरोपीय देशों तक पहुंच चुके हैं। विदेशी पर्यटकों को यहां के हाथ से बने टसर के डिजाइन और बारीक बुनावट बेहद पसंद आती है। यही कारण है कि भागलपुर का सिल्क उद्योग स्थानीय अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभाता है और हजारों परिवारों को रोजगार भी देता है।
क्यों खास है टसर सिल्क
टसर सिल्क को बाकी रेशम की तुलना में ज्यादा टिकाऊ और हल्का माना जाता है। इसका सुनहरा रंग इसे बेहद आकर्षक बना देता है। गर्मियों में यह कपड़ा पहनने पर आरामदायक महसूस होता है और इसकी खास बुनावट इसे अलग पहचान देती है। यहां आने वाले सैलानी भागलपुर के सिल्क बाजारों का चक्कर लगाना पसंद करते हैं। कई लोग तो सीधे बुनकरों से सिल्क उत्पाद खरीदते हैं, ताकि उन्हें असली और बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पाद मिल सकें।
वस्त्र परंपरा का जीवंत प्रतीक
भारत की सिल्क सिटी भागलपुर सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि देश की समृद्ध वस्त्र परंपरा का प्रतीक है। यहां की टसर सिल्क साड़ियां और कपड़े अपनी खूबसूरती, गुणवत्ता और हस्तशिल्प कला के दम पर दुनियाभर में अपनी पहचान बना चुके हैं।
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