महेश्वर की खूबसूरती का असली अनुभव है रात का ठहराव
मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में स्थित महेश्वर अपनी ऐतिहासिक धरोहर, मां नर्मदा के विशाल घाटों, बेजोड़ शिल्पकला वाले मंदिरों और विश्व प्रसिद्ध माहेश्वरी साड़ियों के लिए पूरे विश्व में पहचाना जाता है। हर रोज यहां देश के कोने-कोने से और विदेश से भी बड़ी तादाद में सैलानी पहुंचते हैं। आम तौर पर पर्यटकों की दिनचर्या यह होती है कि वे दिन में महेश्वर का किला देखते हैं, प्राचीन मंदिरों के दर्शन करते हैं और देवी अहिल्याबाई होल्कर की राजगद्दी को निहारकर शाम होते-होते वापस लौट जाते हैं। लेकिन जो पर्यटक यहां रात रुकने का निर्णय लेते हैं, उन्हें महेश्वर का वह दिव्य और अलौकिक रूप देखने को मिलता है जो दिन के उजाले में कहीं छिप जाता है। नर्मदा नदी के तट पर बसा यह शहर शाम और सुबह के समय किसी सिनेमाई दृश्य जैसा प्रतीत होता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त के मोहक दृश्य
महेश्वर में रात गुजारने का सबसे बड़ा लाभ यह है कि आप नदी के घाटों पर होने वाले सूर्योदय और सूर्यास्त के अद्भुत प्राकृतिक दृश्यों का गवाह बन सकते हैं। जब सूरज की पहली किरणें नर्मदा के शांत जल पर पड़ती हैं, तो लहरों के साथ मिलकर वे पूरे घाट को सोने की तरह चमका देती हैं। यह सुनहरा दृश्य मन को गहरी शांति देने वाला होता है। वहीं, जब दिन ढलने को होता है और सूर्यास्त के समय आसमान की लालिमा नर्मदा के स्थिर पानी में प्रतिबिंबित होती है, तो वह नजारा किसी चित्रकार की पेंटिंग जैसा दिखता है। किले की प्राचीर से दिखने वाला यह नजारा हर पर्यटक की यादों में लंबे समय तक के लिए बस जाता है।
मुफ्त लेजर लाइट शो का आकर्षण
अंधेरा होते ही महेश्वर का ऐतिहासिक किला रोशनी से नहा उठता है। नर्मदा का शांत किनारा और जगमगाता हुआ किला मिलकर एक ऐसा माहौल बनाते हैं जो दिन के शोर-शराबे से बिल्कुल अलग अनुभव देता है। रात के सन्नाटे में किले का वैभव पर्यटकों को एक अलग ही सुकून का अहसास कराता है। इस जगह का सबसे खास आकर्षण शाम को आयोजित होने वाला लेजर लाइट शो है। रंग-बिरंगी लेजर किरणों और प्रभावी साउंड सिस्टम के जरिए माहिष्मति नगरी का गौरवशाली इतिहास, हैहयवंश की गाथा, होलकर राजवंश के राजाओं का योगदान और देवी अहिल्याबाई होल्कर के कार्यों को बहुत ही रोचक ढंग से प्रस्तुत किया जाता है। खास बात यह है कि इस शानदार और ज्ञानवर्धक शो का आनंद लेने के लिए पर्यटकों को किसी भी तरह का शुल्क नहीं देना पड़ता है, यह पूरी तरह से निशुल्क है।
नर्मदा आरती की अलौकिक दिव्यता
शाम ढलते ही नर्मदा घाट पर होने वाली भव्य नर्मदा आरती पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बन जाती है। काशी की विश्व प्रसिद्ध गंगा आरती की तर्ज पर होने वाली इस आरती का स्वरूप बेहद भव्य होता है। वैदिक मंत्रों के उच्चारण के बीच जब तीन पुजारी एक साथ लयबद्ध तरीके से आरती करते हैं, तो दीपों की रोशनी से पूरा घाट जगमगा उठता है। इस आध्यात्मिक वातावरण में सैकड़ों श्रद्धालु शामिल होते हैं और एक अलग ही सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव करते हैं। यह दृश्य मन को शुद्ध और शांत कर देने वाला होता है।
माहिष्मति का ऐतिहासिक वैभव
प्राचीन ग्रंथों और ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, महेश्वर को पुराने समय में माहिष्मति के नाम से जाना जाता था। इतिहासकारों का मानना है कि इस नगर को बसाने का श्रेय हैहयवंशी राजाओं को जाता है। पौराणिक कथाओं में उल्लेख मिलता है कि महान सम्राट कार्तवीर्य सहस्त्रार्जुन ने इसे अपनी राजधानी बनाया था। इसके बाद 18वीं शताब्दी का समय महेश्वर के लिए पुनरुद्धार का काल रहा, जब देवी अहिल्याबाई होल्कर ने इसका कायाकल्प किया। उन्होंने इसे इंदौर के बजाय अपनी राजधानी के रूप में चुना और महेश्वर की सांस्कृतिक व ऐतिहासिक पहचान को विश्व पटल पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। यदि आप अपनी यात्रा को वास्तव में यादगार बनाना चाहते हैं, तो ऐतिहासिक किला देखने, मंदिरों की नक्काशी को करीब से जानने और नर्मदा की लहरों का अनुभव करने के साथ-साथ यहां की रात को भी जरूर जिएं।
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