राम मंदिर चढ़ावे की चोरी से सबक: हिमाचल के मंदिरों के लिए सरकार ने बदले दान और सुरक्षा के नियम

अयोध्या के राम मंदिर में हुई चढ़ावा चोरी की घटना के बाद हिमाचल सरकार ने राज्य के मंदिरों के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की है। अब मंदिरों में दानपात्रों की सुरक्षा से लेकर नकदी जमा करने और सीसीटीवी निगरानी तक के लिए सख्त निर्देश लागू कर दिए गए हैं।

हिमाचल के मंदिरों के लिए सुरक्षा की नई रूपरेखा

उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित राम मंदिर में सामने आए चढ़ावे की चोरी के मामले ने देशभर में मंदिरों की सुरक्षा और उनके प्रबंधन पर एक बड़ी बहस छेड़ दी है। इस घटना से सबक लेते हुए अब हिमाचल प्रदेश सरकार ने अपने राज्य के अधीन आने वाले सभी मंदिरों के लिए एक नई और सख्त मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू करने का फैसला किया है। भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग द्वारा जारी इन नए निर्देशों का मुख्य उद्देश्य श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित करना और मंदिर प्रबंधन में पारदर्शिता लाना है।

दानपात्रों और नकदी प्रबंधन में होगी सख्ती

नई व्यवस्था के तहत मंदिरों में मौजूद दानपात्रों (हुंडी) को लेकर विशेष सावधानी बरती जाएगी। अब सभी दानपात्र पूरी तरह से छेड़छाड़-रोधी होंगे और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर ही स्थापित किया जाएगा। प्रत्येक दानपात्र को एक विशिष्ट पहचान संख्या दी जाएगी। दानपात्रों को खोलने और बंद करने की प्रक्रिया में भी अब डबल लॉक या मल्टी-की प्रणाली लागू करना अनिवार्य होगा।

वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता लाने के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया है कि मंदिर में आने वाले नकद चढ़ावे को हर हाल में एक दिन के भीतर ही अधिकृत बैंक खाते में जमा किया जाए। अब मंदिर परिसर में बड़ी मात्रा में नकदी रखना प्रतिबंधित होगा, जब तक कि इसके लिए सक्षम अधिकारी से पहले ही लिखित अनुमति न ली गई हो। इसके साथ ही सरकार ने श्रद्धालुओं को डिजिटल दान देने के लिए प्रोत्साहित करने का निर्देश दिया है, जिसमें UPI, QR कोड और ऑनलाइन बैंकिंग जैसी आधुनिक सुविधाएं शामिल होंगी।

दान की गिनती और सीसीटीवी की निगरानी

चढ़ावे की गिनती की प्रक्रिया अब पूरी तरह से सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में संपन्न होगी और इसकी वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जाएगी। दानपात्र केवल उन तारीखों पर ही खोले जाएंगे जो पहले से तय की गई होंगी। इस प्रक्रिया के दौरान मंदिर अधिकारियों के अलावा जिला प्रशासन के प्रतिनिधि, लेखा अधिकारी, मंदिर प्रबंधन समिति के सदस्य और स्वतंत्र गवाहों की उपस्थिति अनिवार्य होगी।

मंदिर परिसर की सुरक्षा के लिए उच्च गुणवत्ता वाले नाइट विजन और ऑडियो रिकॉर्डिंग सुविधा वाले सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। ये कैमरे प्रवेश और निकास द्वार, गर्भगृह, दानपात्र कक्ष, गिनती कक्ष और स्ट्रॉन्ग रूम को पूरी तरह कवर करेंगे। रिकॉर्डिंग की सुरक्षा को लेकर भी सख्त निर्देश दिए गए हैं, जिसके तहत सीसीटीवी फुटेज को कम से कम 180 दिनों तक सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा।

कर्मचारियों का सत्यापन और नियमित ऑडिट

मंदिरों की सुरक्षा केवल तकनीकी उपकरणों तक सीमित नहीं रहेगी। नकदी और कीमती सामान संभालने वाले सभी कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन करना अनिवार्य होगा। साथ ही, इन कर्मचारियों की जिम्मेदारियों में समय-समय पर बदलाव किया जाएगा ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना न रहे। संवेदनशील स्थानों पर प्रवेश के लिए भी सख्त नियंत्रण व्यवस्था लागू की जाएगी। आभूषणों और अन्य कीमती वस्तुओं का हर तीन महीने में भौतिक सत्यापन किया जाएगा, जबकि वर्ष में एक बार सरकार द्वारा नामित एजेंसियों के माध्यम से गहन ऑडिट कराया जाएगा।

30 दिनों में देनी होगी अनुपालन रिपोर्ट

सरकार ने भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग के निदेशक को राज्य स्तरीय नोडल अधिकारी बनाया है। सभी मंदिरों को यह निर्देश दिए गए हैं कि वे 30 दिनों के भीतर इन नई SOP के अनुपालन की रिपोर्ट सरकार को सौंपें। इस रिपोर्ट में सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी की स्थिति, ऑडिट का ब्योरा और अन्य सुरक्षा प्रबंधों की जानकारी देनी होगी। जिला उपायुक्तों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने क्षेत्रों के अन्य मंदिरों में भी इन नियमों को सख्ती से लागू करवाएं। यदि किसी प्रबंधन समिति या अधिकारी द्वारा इन निर्देशों में लापरवाही बरती जाती है, तो उनके खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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