हिमालय की वादियों के अनमोल फल को मिली नई पहचान
हिमाचल प्रदेश के शीत मरुस्थल के रूप में विख्यात लाहौल-स्पीति जिले के लिए एक गौरवपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। भारत सरकार ने स्थानीय स्तर पर पाए जाने वाले हिमालयी सुपर फ्रूट सीबकथॉर्न, जिसे स्थानीय भाषा में छरमा कहा जाता है, को प्रतिष्ठित भौगोलिक संकेत यानी GI टैग प्रदान किया है। इस सम्मान से न केवल इस फल को एक कानूनी और विशिष्ट पहचान मिली है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी इसके लिए नई राहें खुल गई हैं। इस कदम से स्थानीय किसानों और स्वयं सहायता समूहों की आजीविका में सुधार होने की प्रबल संभावना है।
अर्थव्यवस्था और विपणन को मिलेगी नई गति
जीआई टैग मिलने का सीधा अर्थ यह है कि अब स्पीति का सीबकथॉर्न अपनी एक अलग ब्रांडिंग के साथ देश और दुनिया के बाजारों तक पहुंचेगा। यह पहल उत्पाद के बेहतर विपणन और किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य दिलाने में निर्णायक साबित होगी। केलांग वन मंडल के अधिकारियों का मानना है कि इससे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और बड़े स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। यह न केवल कृषि आधारित आय में वृद्धि करेगा, बल्कि स्थानीय उत्पादों के प्रति वैश्विक विश्वास भी कायम करेगा।
सीबकथॉर्न: गुणों का अद्भुत भंडार
वन मंडल केलांग के अधिकारी इन्द्रजीत सीरा के अनुसार, सीबकथॉर्न का वैज्ञानिक नाम हिप्पोफे रहमनोइड्स है। यह मुख्य रूप से हिमालय के ठंडे और शुष्क रेगिस्तानी इलाकों में उगने वाली एक कांटेदार झाड़ी है। इस फल की पोषण क्षमता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें संतरे की तुलना में 10 से 12 गुना अधिक विटामिन-सी मौजूद होता है। इसके अलावा, यह फल स्वास्थ्य के लिए आवश्यक कई पोषक तत्वों का भंडार है, जिनमें शामिल हैं:
- ओमेगा-3 फैटी एसिड
- ओमेगा-6 फैटी एसिड
- ओमेगा-9 फैटी एसिड
- दुर्लभ ओमेगा-7 फैटी एसिड
ये सभी तत्व मानव हृदय की कार्यप्रणाली, त्वचा के स्वास्थ्य और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए अत्यंत लाभकारी माने जाते हैं।
पर्यावरण संरक्षण और औषधीय महत्व
स्वास्थ्यवर्धक उत्पादों, पोषक खाद्य पदार्थों और हर्बल औषधियों के निर्माण में सीबकथॉर्न की भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है। औषधीय गुणों के अलावा, यह पौधा पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण है। यह झाड़ी बंजर भूमि को हरा-भरा बनाने और मिट्टी के कटाव को रोकने में बड़ी भूमिका निभाती है। गौर करने वाली बात यह है कि यह सुपर फ्रूट केवल लाहौल-स्पीति ही नहीं, बल्कि किन्नौर जिले में भी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। हिमाचल प्रदेश सरकार की इस जीआई टैग वाली सूची में किन्नौरी सेब, किन्नौरी टोपी और सफेद मक्की जैसे अन्य प्रमुख उत्पाद पहले से ही शामिल हैं।
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