यूपी और बिहार के बीच टूटा संपर्क, पीपा पुल बंद होने से बढ़ी लोगों की मुश्किलें

बिहार के भोजपुर में गंगा नदी पर बना महुली घाट-सिताब दियारा पीपा पुल मानसून के कारण बंद कर दिया गया है, जिससे स्थानीय निवासियों को अब लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है।

मानसून की दस्तक और पीपा पुल पर ताला

बिहार के भोजपुर जिले में रहने वाले हजारों लोगों के लिए आज से एक कठिन दौर शुरू हो गया है। गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर और मानसून की सक्रियता को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर महुली घाट-सिताब दियारा पीपा पुल को तत्काल प्रभाव से बंद करने का आदेश दिया है। यह पुल न केवल बिहार और उत्तर प्रदेश के बीच संपर्क का सबसे सुगम मार्ग था, बल्कि दोनों राज्यों की सीमाओं के बीच सामाजिक और व्यापारिक जीवन की एक महत्वपूर्ण कड़ी भी बना हुआ था। गंगा में पानी के बढ़ते बहाव के बीच सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने हर साल की तरह इस बार भी इस अस्थायी पुल को हटा लिया है।

नाव का सहारा या लंबा सफर

पीपा पुल के बंद हो जाने से स्थानीय निवासियों के सामने आवाजाही के लिए संकट खड़ा हो गया है। अब उनके पास गंगा पार करने के लिए बेहद सीमित और चुनौतीपूर्ण विकल्प बचे हैं। पहला विकल्प नाव के जरिए नदी पार करना है, लेकिन मानसून के दौरान गंगा का रौद्र रूप और तेज जलधारा इसे बेहद जोखिम भरा बनाती है। दूसरा विकल्प सड़क मार्ग है, जो लोगों के लिए आर्थिक और समय के लिहाज से काफी महंगा साबित होने वाला है। इस रूट के बंद होने से आम लोगों को अब अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए लगभग 100 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ेगी। जाहिर है, इतनी लंबी दूरी का सीधा असर लोगों के ईंधन खर्च और यात्रा के समय पर पड़ेगा।

व्यापार और दैनिक जीवन पर असर

इस पुल का इस्तेमाल केवल यात्री ही नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर कारोबारी और किसान भी करते थे। बड़हरा प्रखंड और उत्तर प्रदेश के सिताब दियारा इलाके के लोग इस पुल के जरिए ही एक-दूसरे के संपर्क में रहते थे। व्यापारियों का मानना है कि सामान की ढुलाई महंगी होने से बाजार की कीमतों पर दबाव बढ़ेगा। इसके अलावा, किसानों के लिए अपनी मेहनत की फसल को बाजार तक सही समय पर पहुंचाना एक बड़ी चुनौती बन गया है। रोजाना की भागदौड़ में शामिल छात्रों और नौकरीपेशा लोगों के लिए यह स्थिति और भी चिंताजनक है, जिन्हें अब अपने दफ्तर या शिक्षण संस्थान पहुंचने के लिए काफी अधिक समय देना होगा।

आपातकालीन सेवाओं के लिए बढ़ी चिंता

सबसे भयावह स्थिति स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में है। यदि कोई आपातकालीन स्थिति उत्पन्न होती है, तो मरीज को अस्पताल तक ले जाने में भारी देरी हो सकती है। पहले जो रास्ता चंद मिनटों का होता था, अब वह घंटों का सफर बन चुका है। ऐसे में स्वास्थ्य संबंधी आपातकाल में यह देरी किसी के जीवन के लिए भी बड़ा खतरा बन सकती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या कोई नई नहीं है, बल्कि हर साल मानसून के आगमन पर उन्हें इसी तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

स्थायी पुल की पुरानी मांग

हर साल मानसून में पीपा पुल को हटाने और पानी कम होने के बाद इसे दोबारा जोड़ने की प्रक्रिया से स्थानीय लोग थक चुके हैं। अब वहां के निवासियों ने सरकार से गंगा नदी पर एक स्थायी पुल बनाने की अपनी पुरानी मांग को फिर से तेज कर दिया है। लोगों का स्पष्ट कहना है कि अस्थायी समाधान से उन्हें केवल कुछ महीनों की राहत मिलती है, जबकि एक स्थायी पुल ही इस पूरे क्षेत्र को हर साल होने वाली इस परेशानी से मुक्ति दिला सकता है। फिलहाल प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे बंद पीपा पुल की ओर न जाएं और नदी पार करने के लिए केवल अधिकृत नाव सेवाओं का ही उपयोग करें। मानसून के विदा होने और गंगा का जलस्तर सामान्य होने के बाद ही इस पुल को दोबारा बहाल किया जाएगा, तब तक हजारों लोगों को इसी संघर्ष के साथ अपना जीवन यापन करना होगा।

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