मध्यस्थता प्रक्रिया का विफल होना
वाराणसी में चल रहे बहुचर्चित ज्ञानवापी मस्जिद-श्रृंगार गौरी विवाद को आपसी बातचीत से सुलझाने की सारी कोशिशें मंगलवार को विफल हो गईं। सुप्रीम कोर्ट की पहल पर आयोजित इस मध्यस्थता बैठक में हिंदू और मुस्लिम, दोनों ही पक्षों ने शामिल होने के बावजूद किसी भी सुलह के प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। हिंदू पक्ष की ओर से श्रृंगार गौरी मामले से जुड़ी सभी वादिनी और पैरोकार हर-हर महादेव का उद्घोष करते हुए लोक अदालत पहुंचे। वहीं, दूसरी ओर मुस्लिम पक्ष का रुख स्पष्ट रहा कि इस मामले का निपटारा अदालत में चल रहे मुकदमों के अंतिम फैसले से ही होगा।
बैठक में कौन-कौन हुआ शामिल
सुप्रीम कोर्ट ने 14 जुलाई को एक निर्देश जारी करते हुए ज्ञानवापी से जुड़े सभी संबंधित पक्षों को वाराणसी की लोक अदालत में उपस्थित होने के लिए कहा था। अदालत का उद्देश्य था कि दोनों पक्ष आमने-सामने बैठकर इस विवाद का सौहार्दपूर्ण समाधान निकाल सकें। इस बैठक के लिए हिंदू पक्ष की ओर से राखी सिंह, लक्ष्मी देवी, सोमनाथ व्यास समेत अन्य एडीजे कोर्ट के वादी और वकील पहुंचे। इसके साथ ही अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की तरफ से भी अधिवक्ता बैठक में सम्मिलित हुए।
मध्यस्थता को लेकर दोनों पक्षों की राय
वाराणसी कचहरी स्थित मनोरंजन कक्ष के मेडिएशन सेंटर में यह बैठक लगभग 20 मिनट तक चली, लेकिन कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकल सका। हिंदू पक्ष के अधिवक्ता सुधीर त्रिपाठी और वादिनी रेखा पाठक ने स्पष्ट किया कि ज्ञानवापी परिसर मंदिर है और वहां मौजूद पुरातात्विक साक्ष्य इसके प्रमाण हैं। उन्होंने दावा किया कि वे बिना शर्त बातचीत के लिए तैयार थे, लेकिन मुस्लिम पक्ष ने इस पर सहमति नहीं दी। अब जबकि सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई पर रोक लगा रखी है और अगली तारीख 27 जुलाई तय है, हिंदू पक्ष अब सर्वोच्च न्यायालय से मामले में जल्द सुनवाई की अपील करने की रणनीति बना रहा है।
मुकदमों के आधार पर ही निकलेगा नतीजा
मुस्लिम पक्ष का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिवक्ता मुमताज अहमद, रईस अंसारी, तैहिद और एखलाक अहमद ने भी बैठक में अपनी बात रखी। उन्होंने साफ कहा कि जब दोनों पक्ष किसी समझौते के लिए तैयार ही नहीं हैं, तो आगे की प्रक्रिया का कोई औचित्य नहीं बनता। उनके अनुसार, अब सुप्रीम कोर्ट में होने वाली आगामी पहल भी निरर्थक हो जाएगी। मुस्लिम पक्ष का मानना है कि ज्ञानवापी विवाद का अंतिम निपटारा केवल न्यायालय में जारी कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से ही संभव है।
दावों की स्थिति और प्रबंधन समिति का पक्ष
हिंदू पक्ष का तर्क है कि मुगल शासनकाल के दौरान मंदिर को ध्वस्त करके मस्जिद का ढांचा खड़ा किया गया था, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे एक निराधार दावा बताते हुए ज्ञानवापी को एक वैध वक्फ संपत्ति करार देता है। अंजुमन इंतजामिया मसाजिद के संयुक्त सचिव सैयद मोहम्मद यासीन के अनुसार, इस मस्जिद को लेकर कुल 36 अलग-अलग मुकदमे दायर किए गए हैं। ऐसे में इतने सारे वादियों के बीच किसी एक समाधान पर पहुंचना व्यावहारिक रूप से बेहद कठिन है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
बैठक की संवेदनशीलता को देखते हुए वाराणसी कचहरी और मनोरंजन कक्ष के आसपास सुरक्षा की कड़ी व्यवस्था की गई थी। मौके पर पीएसी और सिविल पुलिस की भारी तैनाती देखी गई। लोक अदालत परिसर में केवल ज्ञानवापी मामले से जुड़े संबंधित व्यक्तियों को ही भीतर जाने की अनुमति दी गई थी ताकि कानून-व्यवस्था की स्थिति बनी रहे।
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