ई-20 फ्यूल पर नितिन गडकरी का बड़ा बयान, इंजन खराब होने की खबरों को बताया पूरी तरह बेबुनियाद

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इथेनॉल मिश्रित ईंधन ई-20 को लेकर फैली भ्रांतियों को खारिज करते हुए इसे देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लिए जरूरी बताया है।

किसानों की आय बढ़ाने का जरिया है बायोफ्यूल

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में देश की अर्थव्यवस्था और बढ़ते प्रदूषण के स्तर पर चिंता जताते हुए ई-20 ईंधन के महत्व पर जोर दिया है। गडकरी का कहना है कि भारत वर्तमान में 22 लाख करोड़ रुपये से अधिक का जीवाश्म ईंधन आयात कर रहा है, जो देश के खजाने पर बड़ा बोझ है। इतना ही नहीं, सड़क परिवहन के क्षेत्र में होने वाला 40 फीसदी वायु प्रदूषण भी इसी ईंधन के कारण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि हम इस विशाल आयात को बायोफ्यूल यानी जैव ईंधन से बदल देते हैं, तो यह पैसा सीधे हमारे देश के किसानों की जेब में जाएगा, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में आमूलचूल परिवर्तन आएगा और उनका जीवन बेहतर बनेगा।

ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की जरूरत

गडकरी ने इस बात पर जोर दिया कि इथेनॉल के उपयोग से खेती से जुड़े उद्योगों की तस्वीर बदल रही है। उन्होंने मक्के का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे ही मक्के से इथेनॉल बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई, बाजार में मक्के की कीमतों में सुधार हुआ और किसानों को सीधा लाभ मिला। पहले गन्ना किसानों को अपने भुगतान के लिए महीनों का लंबा इंतजार करना पड़ता था, लेकिन आज इथेनॉल की बढ़ती मांग के कारण चीनी मिलों और गन्ना किसानों की स्थिति सुधरी है। मंत्री ने तीखे सवाल करते हुए कहा कि क्या ऊर्जा के मामले में देश का आत्मनिर्भर होना गलत है। यह आत्मनिर्भरता देश के सर्वांगीण विकास के लिए अत्यंत उपयोगी और अनिवार्य है।

इंजन खराब होने की अफवाहों पर सफाई

सोशल मीडिया पर ई-20 ईंधन से वाहनों के इंजन खराब होने को लेकर चल रही चर्चाओं पर नितिन गडकरी ने कहा कि उनके मंत्रालय को ऐसी कोई आधिकारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने इसे एक प्रकार का दुष्प्रचार करार दिया। उन्होंने चुनौती दी कि यदि 2023 से पहले की किसी भी गाड़ी में ई-20 ईंधन के कारण तकनीकी खराबी आई है, तो उसके मालिक सीधे उनके पास शिकायत दर्ज कराएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति समेत अन्य प्रमुख वाहन कंपनियों ने भी पुष्टि की है कि ई-20 से इंजन खराब होने का कोई साक्ष्य नहीं है। उन्होंने पटना के एक मामले का जिक्र करते हुए कहा कि वहां खराबी का कारण इथेनॉल नहीं, बल्कि पेट्रोल में की गई मिलावट थी।

माइलेज और तकनीकी खूबियां

ईंधन की दक्षता और माइलेज पर बात करते हुए उन्होंने स्वीकार किया कि हाईवे पर मामूली असर हो सकता है, लेकिन शहरों में इसका असर नगण्य है। उन्होंने फ्लेक्स इंजन की क्षमताओं को रेखांकित करते हुए बताया कि इनमें 100 प्रतिशत पेट्रोल और 100 प्रतिशत इथेनॉल का इस्तेमाल किया जा सकता है। हाइब्रिड फ्लेक्स इंजन तकनीक के फायदे बताते हुए उन्होंने कहा कि बार-बार ब्रेक लगाने वाले रास्तों पर यह तकनीक बिजली उत्पन्न कर गाड़ी की कार्यक्षमता को और बढ़ाती है। अंत में उन्होंने दोहराया कि ब्राजील जैसे देश 1970 से ही इसका सफल उपयोग कर रहे हैं और भारत सरकार ने पूरी वैज्ञानिक टेस्टिंग के बाद ही इसे देश में लागू किया है।

https://www.indiatv.in/india/politics/nitin-gadkari-addresses-concerns-regarding-e-20-biolfuel-ethanol-took-place-after-comprehensive-testing-2026-07-14-1231121