2200 करोड़ के प्रोजेक्ट से बदलेगी शिमला की काया, टनल और फ्लाईओवर का जाल बिछाने की तैयारी

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में यातायात की गंभीर समस्या से निपटने के लिए सरकार ने 2200 करोड़ रुपये की मेगा योजना तैयार की है, जिसमें नई टनल, फ्लाईओवर और आधुनिक केबल-स्टे ब्रिज का निर्माण शामिल है।

शिमला में यातायात सुगम बनाने का खाका

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में बढ़ते हुए वाहनों के दबाव और आए दिन लगने वाले जाम से निजात पाने के लिए प्रदेश सरकार ने एक बड़ा और महत्वाकांक्षी कदम उठाया है। शहर की यातायात व्यवस्था को पूरी तरह से आधुनिक और सुगम बनाने के लिए 2200 करोड़ रुपये की लागत से एक व्यापक ढांचा तैयार किया जा रहा है। इस पूरी परियोजना की फंडिंग एशियन डेवलपमेंट बैंक यानी एडीबी के माध्यम से की जाएगी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य शहर में वैकल्पिक सड़कें, फ्लाईओवर और सुरंगों का जाल बिछाकर ट्रैफिक की समस्या को जड़ से खत्म करना है। इस संबंध में हाल ही में हिमाचल प्रदेश रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड की ओर से पहली स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन मीटिंग होटल होलीडे होम में आयोजित की गई।

विधायक हरीश जनार्था की अहम टिप्पणी

बैठक के दौरान स्थानीय विधायक हरीश जनार्था ने स्पष्ट किया कि टनल निर्माण का उद्देश्य तभी पूरा होगा जब वह यातायात को सीधे हाईवे से जोड़े। उन्होंने कहा कि टॉलैंड से आईजीएमसी तक बनने वाली टनल को आईजीएमसी और फोरलेन दोनों से जोड़ने की अनिवार्यता है। यदि टनल का निर्माण करने के बाद भी ट्रैफिक का दबाव कम नहीं होता या दूरी में कमी नहीं आती, तो इस पर किए जाने वाले खर्च का कोई औचित्य नहीं रह जाएगा। उन्होंने संबंधित निर्माण कंपनी को निर्देश दिए कि वे तत्काल प्रभाव से फिजिबिलिटी स्टडी करें। साथ ही उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि 2200 करोड़ रुपये के इस बड़े बजट का एक भी पैसा गलत दिशा में खर्च न हो और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ही आधारभूत ढांचा विकसित किया जाए।

प्रस्तावित टनल और उनके मार्ग

शहर में दो महत्वपूर्ण सुरंगों के निर्माण की रूपरेखा तैयार की गई है, जो ट्रैफिक की समस्या को हल करने में मददगार साबित होंगी। पहली सुरंग आईजीएमसी जंक्शन से शुरू होकर सेंट बीड्स कॉलेज के पास स्थित आईपीएच पंप हाउस तक जाएगी। वहीं, दूसरी सुरंग एचपी पीडब्ल्यूडी हट्स यानी हिमफेड पेट्रोल पंप के पास से निकलकर निगम विहार में डाकघर के नीचे तक बनेगी। इस बैठक में तकनीकी विशेषज्ञों ने परियोजनाओं की प्रारंभिक ड्राइंग, संभावित फायदों और निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों पर प्रस्तुतीकरण दिया। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि हितधारकों द्वारा दिए गए सुझावों का गहन अध्ययन करने के बाद ही इन्हें विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी डीपीआर में शामिल किया जाएगा। इन सुरंगों के बनने से न केवल समय की बचत होगी, बल्कि पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को भी काफी राहत मिलेगी।

दिसंबर 2026 तक तैयार होगा विधानसभा फ्लाईओवर

शहर में जारी विकास कार्यों की बात करें तो विधानसभा के पास बन रहा फ्लाईओवर दिसंबर 2026 तक बनकर तैयार हो जाएगा। फिलहाल निर्माण कार्य पूरे जोर-शोर से चल रहा है और निर्धारित समय सीमा के भीतर इसे जनता को समर्पित करने का लक्ष्य रखा गया है। इस फ्लाईओवर के शुरू होने से उस क्षेत्र में जाम की स्थिति में भारी कमी आने की उम्मीद है। विभाग ने विक्ट्री टनल, टॉलैंड जंक्शन, छोटा शिमला, शिमला बाईपास और आईजीएमसी जंक्शन जैसे व्यस्त इलाकों में गहन सर्वे भी किया है। आंकड़ों के अनुसार संजोली जंक्शन से हर रोज 27,266 वाहन गुजरते हैं, जबकि छोटा शिमला और विक्ट्री टनल पर यह संख्या क्रमशः 24,967 और 37,734 वाहन प्रतिदिन है। इन प्रमुख स्थानों पर ड्रोन के माध्यम से भी सर्वे किया गया है ताकि पीक आवर्स के दौरान यातायात के प्रवाह को बेहतर ढंग से समझा जा सके।

2200 करोड़ की परियोजना का विस्तार

यह 2200 करोड़ की परियोजना केवल टनल तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसके अंतर्गत सात प्रमुख अवसंरचना कार्य प्रस्तावित हैं। इनमें चक्कर बाईपास और एमएलए क्रॉसिंग पर वायाडक्ट, रेलवे पार्किंग से लेकर होटल होलीडे होम तक बनने वाला अत्याधुनिक केबल-स्टे ब्रिज, विक्ट्री टनल जंक्शन पर वायाडक्ट, मंजीयाठ में एंबुलेस रोड और मेहली-प्रीत नगर से लवासा चौकी तक सड़क का उन्नयन कार्य शामिल है। इन कार्यों में पैदल चलने वालों के लिए विशेष सुविधाएं विकसित करना भी शामिल है, ताकि शहर की परिवहन व्यवस्था सुरक्षित और जलवायु अनुकूल बन सके। यह पूरा प्रोजेक्ट शिमला को दीर्घकालिक आधार पर ट्रैफिक जाम से मुक्ति दिलाने के लिए एक टिकाऊ समाधान के रूप में देखा जा रहा है।

आईजीएमसी टनल से मिलने वाले लाभ

आईजीएमसी टनल परियोजना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जिसमें 1.45 किलोमीटर लंबी दो सुरंगों का निर्माण किया जाएगा। इनमें से एक 910 मीटर और दूसरी 540 मीटर की होगी। ये सुरंगें आईजीएमसी को छोटा शिमला और छोटा शिमला को संजौली से सीधा जोड़ेंगी। इस मार्ग के तैयार हो जाने के बाद वाहनों को सचिवालय क्षेत्र के व्यस्त मार्गों से होकर गुजरने की आवश्यकता नहीं रहेगी। यातायात विशेषज्ञों का अनुमान है कि वर्ष 2032 तक, जब यह परियोजना पूरी तरह से काम करने लगेगी, तो आईजीएमसी जंक्शन से संजौली चौक के बीच ट्रैफिक में लगभग 27 प्रतिशत की कमी आएगी। इसी तरह नवबहार से संजौली चौक के बीच भी वाहनों का दबाव करीब 36 प्रतिशत तक कम हो जाएगा।

आधुनिक केबल-स्टे ब्रिज की विशेषता

परियोजना का एक और आकर्षक हिस्सा रेलवे पार्किंग से होटल होलीडे होम तक बनने वाला केबल-स्टे ब्रिज है। यह पुल आधुनिक इंजीनियरिंग का एक बेहतरीन उदाहरण होगा, जिसमें पुल का मुख्य हिस्सा स्टील की मजबूत केबलों पर टिका होगा। केबल-स्टे तकनीक का उपयोग करने का मुख्य लाभ यह है कि इसमें बीच में पिलर की आवश्यकता नहीं होती, जिससे पहाड़ी क्षेत्रों की भू-आकृति पर असर कम पड़ता है और पर्यावरण का संरक्षण होता है। यह पुल न केवल वाहनों की आवाजाही को सुचारू बनाएगा बल्कि पैदल यात्रियों के लिए भी एक सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराएगा। इसका आधुनिक डिजाइन शिमला के शहरी परिदृश्य में एक नया आकर्षण जोड़ देगा। यह परियोजना न केवल इंजीनियरिंग का एक बेमिसाल नमूना साबित होगी, बल्कि भविष्य के शिमला के लिए यातायात की एक नई तस्वीर भी पेश करेगी।

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