अमेरिकी शेफ जमयांग त्सेरिंग चरस मामला: हिमाचल हाईकोर्ट ने CBI को सौंपी जांच, पुलिस की भूमिका पर उठाए गंभीर सवाल

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अमेरिकी नागरिक और मशहूर शेफ जमयांग त्सेरिंग से जुड़े मादक पदार्थ मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप दी है। अदालत ने पुलिस की कार्रवाई और आरोपी को लगी गंभीर चोटों की स्वतंत्र जांच कराने के निर्देश दिए हैं।

हिमाचल प्रदेश में अमेरिकी नागरिक और तिब्बती मूल के मशहूर शेफ जमयांग त्सेरिंग से जुड़े मादक पदार्थ कानून (NDPS) के एक मामले में बहुत बड़ा मोड़ आया है। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपने का ऐतिहासिक आदेश दिया है। अदालत ने न केवल इस मामले की निष्पक्ष जांच के आदेश दिए हैं, बल्कि कुल्लू पुलिस की कार्यप्रणाली, गिरफ्तारी की परिस्थितियों और कार्रवाई के दौरान शेफ जमयांग त्सेरिंग को लगी गंभीर शारीरिक चोटों की भी स्वतंत्र जांच कराने को कहा है।

हाईकोर्ट के माननीय जस्टिस राकेश कैंथला की एकल पीठ ने इस संवेदनशील मामले की सुनवाई करते हुए पुलिस के रवैए पर कई तीखे सवाल उठाए। अदालत ने पाया कि पुलिस द्वारा पेश की गई केस डायरी में कई महत्वपूर्ण और बुनियादी पहलुओं का कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है। कोर्ट ने इस बात पर विशेष रूप से आश्चर्य और चिंता व्यक्त की कि आखिर याचिकाकर्ताओं को घटना वाले दिन शाम को 6:50 बजे से लेकर रात के 1:30 बजे तक घटनास्थल पर ही क्यों रोके रखा गया? इसके अलावा, शेफ जमयांग त्सेरिंग को लगी गंभीर चोटों का कोई स्पष्ट और विश्वसनीय ब्यौरा भी पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज नहीं था। इन सभी संदेहास्पद परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने माना कि मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच बेहद जरूरी है।

हाईकोर्ट ने FIR रद्द करने से किया इनकार

हालांकि, जहां एक तरफ हाईकोर्ट ने पुलिस की भूमिका की जांच केंद्रीय एजेंसी से कराने का फैसला सुनाया, वहीं दूसरी तरफ उसने कुल्लू जिले के भुंतर पुलिस थाने में दर्ज NDPS अधिनियम के तहत दर्ज मुख्य FIR को रद्द करने से साफ इनकार कर दिया। अदालत का कहना था कि पुलिस द्वारा की गई प्रक्रियागत अनियमितताओं या शेफ को झूठा फंसाए जाने के आरोपों की सच्चाई केवल मुकदमे के दौरान पेश किए जाने वाले साक्ष्यों के आधार पर ही तय की जा सकती है।

जस्टिस राकेश कैंथला ने स्पष्ट किया कि केवल आरोपों के आधार पर इस शुरुआती स्तर पर आपराधिक मामले की FIR को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता। उन्होंने अपने आदेश में यह भी रेखांकित किया कि यदि आगे की जांच में आरोपियों के पास से मादक पदार्थ की वास्तविक बरामदगी साबित हो जाती है, तो पुलिस द्वारा की गई संभावित प्रक्रियागत गलतियों या कमियों का फायदा उठाकर आरोपी अपनी कानूनी जिम्मेदारी से पूरी तरह मुक्त नहीं हो सकते。

आखिर क्या है पूरा मामला और क्या हैं आरोप?

याचिका में दी गई जानकारी के अनुसार, यह पूरा घटनाक्रम जनवरी 2026 का है। अमेरिकी नागरिक और प्रसिद्ध शेफ जमयांग त्सेरिंग अपने दो अन्य सहयोगियों के साथ जनवरी के आखिरी हफ्ते में अमेरिका से भारत पहुंचे थे। वे हिमाचल प्रदेश के मनाली और कसोल क्षेत्र का दौरा करने के बाद धर्मशाला के पास मैक्लोडगंज की तरफ जा रहे थे। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में होटल व्यवसाय शुरू करने की संभावनाओं और व्यावसायिक अवसरों का जमीनी स्तर पर आकलन करना था।

याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि 22 फरवरी को जब वे सफर कर रहे थे, तभी पुलिस ने उनके वाहन को जबरन रोक लिया। याचिका में पुलिसकर्मियों पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा गया है कि पुलिस ने सबसे पहले उनसे 4 लाख रुपये नकद से भरा एक बैग सौंपने की मांग की। जब त्सेरिंग और उनके साथियों ने पुलिस की इस अनुचित मांग को मानने से इनकार कर दिया, तो पुलिसकर्मियों ने कथित तौर पर जबरन उनके वाहन में प्रवेश किया। आरोप है कि इसके बाद पुलिस ने खुद ही उनके निजी सामान में 28 ग्राम चरस रख दी और उनके खिलाफ एक झूठा और मनगढ़ंत मामला दर्ज कर लिया।

इतना ही नहीं, याचिका में यह भी कहा गया है कि पुलिस ने उन्हें कई घंटों तक बिना भोजन, पानी या शौचालय जैसी बुनियादी मानवीय सुविधाओं के अवैध रूप से हिरासत में रखा। सबसे गंभीर आरोप यह लगाया गया है कि इस कथित हिरासत के दौरान पुलिसकर्मियों ने जमयांग त्सेरिंग को सरल सड़क पर धक्का दे दिया, जिसके कारण वहां से गुजर रहे एक तेज रफ्तार टेम्पो ट्रैवलर ने उन्हें टक्कर मार दी। इस भयानक हादसे में त्सेरिंग को अत्यंत गंभीर चोटें आईं और उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

हिमाचल प्रदेश पुलिस का पक्ष और दलीलें

दूसरी ओर, हिमाचल प्रदेश पुलिस ने याचिकाकर्ताओं द्वारा लगाए गए इन सभी संगीन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। पुलिस का दावा है कि उन्होंने कानून के दायरे में रहकर पूरी कार्रवाई की थी। पुलिस के अनुसार, आरोपियों के वाहन से 28 ग्राम चरस और 4 लाख रुपये की नकदी बरामद की गई थी, और यह पूरी जब्ती स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी में पूरी तरह से कानूनी और नियमानुसार तरीके से की गई थी।

पुलिस ने शेफ जमयांग त्सेरिंग को लगी चोटों पर अपनी सफाई देते हुए कहा कि जब पुलिस टीम वाहन की तलाशी ले रही थी, तभी त्सेरिंग अचानक सड़क की तरफ भागे और एक तेज रफ्तार से आ रहे टेम्पो ट्रैवलर की चपेट में आ गए, जिससे वे घायल हुए। पुलिस का कहना है कि इसमें पुलिसकर्मियों की कोई संलिप्तता नहीं थी और यह विशुद्ध रूप से एक सड़क दुर्घटना थी।

बचाव पक्ष के वकील की अदालत में बहस

याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता निशांत शर्मा ने माननीय अदालत के समक्ष दलील दी कि हिरासत में लिए जाने के तुरंत बाद ही जमयांग त्सेरिंग ने पुलिस विभाग के एक उच्चाधिकारी यानी IG स्तर के अधिकारी से संपर्क किया था। उन्होंने उसी समय पुलिसकर्मियों द्वारा किए जा रहे प्रक्रियागत उल्लंघनों और प्रताड़ना की लिखित और मौखिक शिकायत दर्ज कराई थी।

अधिवक्ता निशांत शर्मा ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि अब जब पूरे मामले की जांच देश की सबसे प्रतिष्ठित जांच एजेंसी CBI करेगी, तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। उन्होंने कहा कि CBI जांच से न केवल त्सेरिंग को लगी गंभीर चोटों की वास्तविक परिस्थितियों का पता चलेगा, बल्कि पुलिसकर्मियों के आचरण, उनके द्वारा की गई अवैध हिरासत और वाहन में जबरन मादक पदार्थ प्लांट करने के आरोपों की भी पूरी तरह से निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच हो सकेगी।

CBI जांच से खुलेगा सच का पिटारा

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के इस कड़े रुख के बाद अब इस हाई-प्रोफाइल मामले की कमान पूरी तरह से CBI के हाथों में होगी। केंद्रीय एजेंसी को अब कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर गहराई से पड़ताल करनी होगी:

  • घटना वाले दिन शाम 6:50 बजे से लेकर देर रात 1:30 बजे तक याचिकाकर्ताओं को मौके पर रोके रखने के पीछे पुलिस का असली मकसद क्या था?
  • क्या पुलिस ने सचमुच रिश्वत के रूप में 4 लाख रुपये की मांग की थी और मना करने पर 28 ग्राम चरस प्लांट की थी?
  • शेफ जमयांग त्सेरिंग को लगी गंभीर चोटें किसी हादसे का परिणाम थीं या फिर पुलिस की प्रताड़ना का हिस्सा थीं?
  • क्या कुल्लू पुलिस के स्थानीय अधिकारियों ने इस पूरी कार्रवाई के दौरान NDPS अधिनियम के तहत निर्धारित आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं का उल्लंघन किया?

इस मामले में CBI की एंट्री से हिमाचल प्रदेश पुलिस के उन अधिकारियों और कर्मचारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं जो इस कार्रवाई का हिस्सा थे। इस संवेदनशील मामले में आगे होने वाले खुलासे न केवल दोनों पक्षों के दावों की सच्चाई सामने लाएंगे, बल्कि देवभूमि हिमाचल में कानून व्यवस्था और पुलिस तंत्र की विश्वसनीयता पर भी गहरा असर डालेंगे।

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