राजस्थान में स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
राजस्थान के सरकारी अस्पतालों से एक बेहद चिंताजनक मामला सामने आया है, जिसने पूरे चिकित्सा महकमे में हलचल मचा दी है। मई के महीने से लेकर अब तक प्रदेश भर में प्रसव के बाद 18 महिलाओं की दुखद मौत हो चुकी है। इसके अलावा, सात ऐसी प्रसूताएं हैं जिनकी सिजेरियन सर्जरी के बाद किडनी खराब हो गई और वे वर्तमान में डायलिसिस के सहारे जीवन बचाने की जद्दोजहद कर रही हैं। इन घटनाओं ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जुलाई के पहले हफ्ते में बढ़ा मौतों का आंकड़ा
मामले की गंभीरता तब और अधिक बढ़ गई जब केवल पांच दिनों के भीतर, यानी 5 जुलाई से 10 जुलाई के बीच, भीलवाड़ा और बांसवाड़ा जिलों में 9 महिलाओं ने दम तोड़ दिया। इस सिलसिलेवार मौत के पैटर्न ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों को भी सकते में डाल दिया है।
विभिन्न जिलों में मौतों का विवरण
- भीलवाड़ा: महात्मा गांधी अस्पताल में महज छह दिनों के भीतर 5 महिलाओं की सिजेरियन डिलीवरी के बाद मृत्यु हुई। सर्जरी के बाद अचानक बिगड़ी तबीयत और आईसीयू में भर्ती कराने के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।
- कोटा: मई के महीने में ही कोटा के एक सरकारी अस्पताल में 5 प्रसूताओं की मौत की सूचना मिली थी।
- बीकानेर: जून के महीने में सिजेरियन ऑपरेशन के बाद 6 महिलाओं की किडनी फेल होने की घटना हुई, जिनमें से 2 की मौत हो गई। बाकी 7 महिलाएं अभी भी डायलिसिस पर हैं।
स्वास्थ्य मंत्री ने जाहिर की हैरानी
राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने इस घटनाक्रम पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इन मौतों का पैटर्न अत्यंत हैरान करने वाला है। उन्होंने स्वीकार किया कि प्रशासन भी इस बात से अचंभित है कि मौतें इतने कम समय के अंतराल पर क्यों हो रही हैं। मंत्री ने बताया कि शुरुआत में आशंका थी कि भीषण गर्मी इसका कारण हो सकती है, लेकिन अब तापमान सामान्य होने के बावजूद स्थितियां वैसी ही हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि मरीजों की ब्लड रिपोर्ट और अन्य मेडिकल जांचें बिल्कुल सामान्य आ रही हैं, फिर भी मौतें नहीं रुक रही हैं।
जांच के लिए विशेष टीमें गठित
मामले की तह तक जाने के लिए सरकार ने प्रभावित जिलों के वरिष्ठ अधिकारियों, मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्यों और अस्पताल अधीक्षकों की आपात बैठक बुलाई है। दिल्ली के एम्स से भी इस मामले की समीक्षा करवाई गई है और वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञों की टीम लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी स्तर पर मेडिकल चूक या लापरवाही पाई जाती है, तो जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों के इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम, दवाओं की गुणवत्ता और इलाज के तौर-तरीकों का ऑडिट करने का निर्देश दिया है।
संसाधनों का अभाव और संक्रमण का खतरा
जांच के दौरान भीलवाड़ा के अस्पताल में बुनियादी संसाधनों की कमी की बात भी सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक, अस्पताल में प्रतिदिन 30 से 40 सिजेरियन ऑपरेशन किए जाते हैं, जबकि सर्जरी के लिए केवल 8 इंस्ट्रूमेंट सेट ही उपलब्ध हैं। इनमें से 5 नियमित और 3 इमरजेंसी के लिए निर्धारित हैं। प्रोटोकॉल के अनुसार, किसी भी इंस्ट्रूमेंट सेट को दोबारा इस्तेमाल में लाने से पहले तीन घंटे तक संक्रमण मुक्त (स्टेरलाइज) करना अनिवार्य है। अत्यधिक कार्यभार और उपकरणों की कमी के कारण संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है, जो संभावित रूप से इन मौतों की एक बड़ी वजह हो सकता है।
https://www.indiatv.in/rajasthan/18-women-died-after-childbirth-in-rajasthan-within-two-months-health-minister-said-pattern-of-deaths-is-shocking-2026-07-14-1231011