विदेशी निवेशकों को बड़ी राहत: सरकारी बॉन्‍ड पर टैक्‍स खत्‍म, अब तक वसूला जाता था 20 फीसदी तक टैक्‍स

रिजर्व बैंक ने विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश पर लगने वाला इनकम टैक्‍स पूरी तरह समाप्‍त कर दिया है। इस कदम का मकसद देश में विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ाकर रुपये और चालू खाते के घाटे को संभालना है।

ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव के दौर में देश की ओर विदेशी पूंजी खींचने के लिए सरकार ने एक अहम फैसला लिया है। रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्‍होत्रा ने शुक्रवार को मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के बाद घोषणा की कि अब विदेशी निवेशकों को सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करने पर कोई इनकम टैक्‍स नहीं देना होगा। इस छूट को अमल में लाने के लिए इनकम टैक्‍स कानून में संशोधन किया गया है और सरकार की ओर से इस संबंध में औपचारिक अधिसूचना भी जारी कर दी गई है।

नियम हुए आसान, सीधे निवेश कर सकेंगे विदेशी निवेशक

गवर्नर ने जानकारी दी कि RBI ने सरकारी प्रतिभूतियों में FPI निवेश से जुड़े नियमों को सरल बना दिया है। उन्‍होंने बताया कि 15 साल, 30 साल और 40 साल की अवधि वाले सभी नए सरकारी बॉन्‍ड पूरी तरह एक्सेसिबल रूट के तहत जारी किए जाएंगे। इसका मतलब यह है कि विदेशी निवेशक इन बॉन्‍ड में सीधे तौर पर पैसा लगा सकेंगे। ये बॉन्‍ड तीन ग्‍लोबल इंडेक्‍स का हिस्‍सा भी बनेंगे और इनसे मिलने वाले रिटर्न पर अब किसी प्रकार का इनकम टैक्‍स नहीं चुकाना पड़ेगा।

अब तक कितना देना पड़ता था टैक्‍स

मौजूदा व्‍यवस्‍था में विदेशी संस्‍थागत निवेशकों को सरकारी बॉन्‍ड में 12 महीने से अधिक समय तक निवेश बनाए रखने पर 12.5 फीसदी का लॉन्‍ग टर्म कैपिटल गेन टैक्‍स देना होता है। वहीं, यदि बॉन्‍ड को 12 महीने से कम अवधि के लिए रखा जाता है, तो होने वाले मुनाफे पर 20 फीसदी का शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्‍स लगता है। अब इस पूरे टैक्‍स को समाप्‍त कर दिया गया है।

इसके अलावा टीडीएस के रूप में काटे जाने वाले विदहोल्डिंग टैक्‍स से भी निवेशकों को राहत दी गई है। साल 2023 से पहले विदेशी निवेशकों पर 5 फीसदी विदहोल्डिंग टैक्‍स लगता था, जो बाद में बढ़कर 20 फीसदी तक पहुंच गया। फिलहाल सरकार ने इस टैक्‍स में भी छूट दे दी है।

इस फैसले के पीछे क्‍या है मकसद

ईरान युद्ध के बीच आरबीआई के विदेशी मुद्रा भंडार पर लगातार दबाव बना हुआ है। डॉलर में आ रही मजबूती के चलते रुपया कमजोर पड़ रहा है और आयात बिल का बोझ भी लगातार बढ़ रहा है। ऐसी स्थिति में देश के चालू खाते के घाटे के बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।

इसी जोखिम से बचने के लिए रिजर्व बैंक विदेशी निवेश को बढ़ावा देने पर जोर दे रहा है। जब देश में विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ेगा, तो आयात के लिए खजाने में अधिक रकम उपलब्‍ध होगी। इसके जरिये चालू खाते के घाटे यानी कैड पर नियंत्रण पाया जा सकेगा।

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