अंतरिक्ष की ओर अनिल मेनन की पहली उड़ान
इस समय दुनिया भर में अनिल मेनन का नाम चर्चा का विषय बना हुआ है। भारतीय मूल के नासा के अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन 14 जुलाई को अपनी पहली अंतरिक्ष यात्रा पर निकलने जा रहे हैं। वे अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन यानी ISS के लिए रवाना होंगे। उनका यह मिशन करीब आठ महीने तक जारी रहेगा। इस दौरान वे मानव स्वास्थ्य, अंतरिक्ष की नई तकनीकों और भविष्य में चंद्रमा तथा गहरे अंतरिक्ष के अभियानों के लिए महत्वपूर्ण वैज्ञानिक परीक्षण करेंगे। कर्नल अनिल मेनन कजाकिस्तान के बैकोनूर कोस्मोड्रोम से रॉसकॉसमॉस के सोयुज MS-29 अंतरिक्ष यान के जरिए उड़ान भरेंगे। उनके साथ इस दल में रूसी अंतरिक्ष यात्री प्योत्र दुब्रोव और अन्ना किकीना भी शामिल होंगे। यह टीम एक्सपीडिशन-74 और एक्सपीडिशन-75 मिशन के तहत काम करेगी। सभी अंतरिक्ष यात्रियों की पृथ्वी पर वापसी अप्रैल 2027 में निर्धारित है, जहाँ मेनन फ्लाइट इंजीनियर की भूमिका निभाएंगे।
कौन हैं अनिल मेनन और उनकी पृष्ठभूमि
49 वर्षीय अनिल मेनन का जन्म मिनेपोलिस, मिनेसोटा में हुआ था। उनके माता-पिता यूक्रेनी और भारतीय मूल के प्रवासी हैं। मेनन की शैक्षणिक योग्यता काफी प्रभावशाली रही है। उन्होंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से न्यूरोबायोलॉजी में स्नातक, स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में मास्टर्स और स्टैनफोर्ड मेडिकल स्कूल से MD की डिग्री हासिल की है। वे न केवल एक कुशल फिजिशियन हैं बल्कि US स्पेस फोर्स में कर्नल के पद पर भी कार्यरत हैं।
मेनन का करियर सेवा और साहसिक कार्यों से भरा रहा है। उन्होंने US एयरफोर्स के साथ मिलिट्री फ्लाइट सर्जन के रूप में अफगानिस्तान में ऑपरेशन एनड्योरिंग फ्रीडम के दौरान युद्ध के मैदान में घायल सैनिकों को मेडिकल सहायता प्रदान की थी। इसके अलावा, उन्होंने हिमालयन रेस्क्यू एसोसिएशन के साथ मिलकर माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई करने वाले पर्वतारोहियों का इलाज करने का अनुभव भी लिया है। उनका भारत से भी खास जुड़ाव रहा है। एक रोटरी एम्बेस्डोरियल स्कॉलर के रूप में उन्होंने भारत में एक साल बिताया और पोलियो टीकाकरण अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
नासा और स्पेसएक्स में अब तक का सफर
साल 2014 में नासा से जुड़ने के बाद मेनन ने फ्लाइट सर्जन के तौर पर काम किया। उस समय वे ISS पर तैनात एस्ट्रोनॉट्स के स्वास्थ्य पर नजर रखते थे। इसके बाद 2018 में वे स्पेसएक्स चले गए, जहां उन्होंने कंपनी का पहला मेडिकल प्रोग्राम शुरू करने में मदद की। वे स्पेसएक्स के शुरुआती क्रूड मिशन्स के लीड फ्लाइट सर्जन थे और उन्होंने गहरे अंतरिक्ष मिशनों के लिए विशेष मेडिकल सिस्टम विकसित किए। दिसंबर 2021 में नासा ने उन्हें अपने एस्ट्रोनॉट ग्रुप 23 में शामिल किया। अब तक वे पृथ्वी से अंतरिक्ष यात्रियों की मदद कर रहे थे, लेकिन अब वे स्वयं अंतरिक्ष की गहराइयों में अनुसंधान करने के लिए तैयार हैं।
परिवार में एस्ट्रोनॉट का साथ
अनिल मेनन के परिवार का भी अंतरिक्ष विज्ञान से गहरा नाता है। उनकी पत्नी अन्ना मेनन खुद एक प्रसिद्ध एस्ट्रोनॉट और स्पेसएक्स की सीनियर इंजीनियर हैं, जो सितंबर 2024 में पोलरिस डॉन मिशन के जरिए अंतरिक्ष यात्रा कर चुकी हैं।
मिशन के महत्वपूर्ण वैज्ञानिक लक्ष्य
मेनन की यह यात्रा लंबी अवधि के अंतरिक्ष मिशनों के लिहाज से बहुत अहम मानी जा रही है। उनके मिशन के प्रमुख वैज्ञानिक उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
- मानव स्वास्थ्य अनुसंधान: माइक्रोग्रैविटी में रक्त के संचार, नसों की स्थिति और रक्त की संरचना में होने वाले बदलावों का विस्तृत अध्ययन करना।
- तकनीकी नवाचार: ISS पर पीने के पानी से स्टेराइल IV फ्लूइड बनाने वाली नई तकनीक का परीक्षण करना।
- आपातकालीन चिकित्सा: AI और AR तकनीक के साथ अल्ट्रासाउंड इमेजिंग का उपयोग कर अंतरिक्ष में मेडिकल इमरजेंसी से निपटने के प्रयोग करना।
- मटेरियल साइंस: एडवांस्ड सेमीकंडक्टर क्रिस्टल ग्रोथ पर प्रयोग करना ताकि भविष्य की तकनीकें अधिक सक्षम बन सकें।
अनिल मेनन का करियर चिकित्सा, इंजीनियरिंग, सैन्य सेवा और अंतरिक्ष अन्वेषण का एक अनूठा संगम है, जो उन्हें नासा के सबसे प्रमुख भारतीय मूल के अंतरिक्ष यात्रियों की कतार में खड़ा करता है।
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