राजस्थान: डेढ़ महीने में 19 प्रसूताओं की मौत पर घिरे स्वास्थ्य मंत्री, सवाल पूछने पर हंसते हुए बोले- 'ब्रेक के बाद मिलते हैं'

राजस्थान में पिछले डेढ़ महीने के भीतर 19 गर्भवती महिलाओं की मौत के गंभीर मामले सामने आए हैं। इस मुद्दे पर बुलाई गई उच्च स्तरीय बैठक के बाद जब मीडिया ने चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर से सवाल किए, तो वे टालमटोल करते हुए आगे बढ़ गए।

राजस्थान में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली और प्रसूताओं की सुरक्षा को लेकर एक बेहद चिंताजनक स्थिति सामने आई है। राज्य में पिछले महज डेढ़ महीने के भीतर 19 प्रसूताओं यानी गर्भवती महिलाओं की मौत हो चुकी है। इस बेहद गंभीर और संवेदनशील मुद्दे को लेकर पूरे प्रदेश में हड़कंप मचा हुआ है। इसी सिलसिले में राज्य के चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने विभाग की एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई थी। हालांकि, बैठक समाप्त होने के बाद जब पत्रकारों ने इस दुखद स्थिति पर मंत्री जी से जवाब मांगना चाहा, तो उनका रवैया बेहद हैरान करने वाला रहा।

सवालों पर हंसकर आगे बढ़े चिकित्सा मंत्री

उच्च स्तरीय बैठक खत्म होने के बाद जब मीडियाकर्मियों ने चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर को घेरा और राज्य में लगातार हो रही गर्भवती महिलाओं की मौतों पर सरकार की तैयारियों और कार्रवाई को लेकर सवाल पूछे, तो उन्होंने सीधे जवाब देने से परहेज किया। मंत्री पत्रकारों के सवालों पर केवल हंसते रहे और मुस्कुराते हुए बोले, "ब्रेक के बाद मिलते हैं।" इतना कहने के बाद वे पत्रकारों को छोड़कर आगे चले गए। उनका यह टालने वाला रवैया और बयान अब चर्चा का विषय बना हुआ है, जिससे सरकार की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

डेढ़ महीने में 19 महिलाओं ने गंवाई जान

राजस्थान में पिछले कुछ समय से चिकित्सा सेवाओं पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पिछले करीब डेढ़ महीने के दौरान अलग-अलग जिलों में अब तक कुल 19 प्रसूताओं की मौत हो चुकी है। इतनी बड़ी संख्या में हुई मौतों ने राज्य के सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और वहां मिलने वाले इलाज की गुणवत्ता पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

इन जिलों में सामने आए सबसे ज्यादा मामले

प्रसूताओं की मौत के यह मामले राज्य के कई हिस्सों से सामने आ रहे हैं। इनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित जिले शामिल हैं:

  • भीलवाड़ा
  • बांसवाड़ा
  • राज्य के अन्य प्रभावित जिले

अस्पतालों की व्यवस्थाओं पर उठ रहे हैं सवाल

इस बड़ी त्रासदी के बाद राज्य के अस्पतालों की व्यवस्थाओं, प्रसव के दौरान अपनाई जाने वाली उपचार प्रक्रियाओं और बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं की भारी कमी को लेकर लगातार आक्रोश बढ़ रहा है। लोगों का मानना है कि यदि अस्पतालों में समय पर सही इलाज और जरूरी सुविधाएं मिल पातीं, तो इन महिलाओं की जान बचाई जा सकती थी। स्वास्थ्य मंत्री द्वारा इस मुद्दे पर बुलाई गई बैठक के बाद भी स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है, और मंत्री के इस गैर-जिम्मेदाराना बयान ने लोगों की चिंताओं को और बढ़ा दिया है।

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