रसोई की स्वच्छता और बर्तनों का महत्व
हिंदू धर्म और वास्तु शास्त्र में रसोई को घर का सबसे महत्वपूर्ण स्थान माना गया है। ऐसी मान्यता है कि रसोई में जितनी अधिक शुद्धता और व्यवस्था बनी रहती है, घर में सुख और शांति का वास उतना ही गहरा होता है। बल्लभगढ़ के उदासीन साधु आश्रम के महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य का कहना है कि रसोई की स्थिति सीधे तौर पर घर की आर्थिक स्थिति और खुशहाली को प्रभावित करती है।
इन बर्तनों से बनाएं दूरी
महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य के अनुसार रसोई के रखरखाव में कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है:
- रसोई में कभी भी टूटे हुए, चटके हुए या जल चुके बर्तन नहीं रखने चाहिए।
- बहुत पुराने और खराब हो चुके बर्तनों का प्रयोग करने से बचना चाहिए।
- हमेशा साफ-सुथरे और सही स्थिति वाले बर्तनों का ही इस्तेमाल करना शुभ होता है।
रात के समय की सावधानी
अक्सर लोग रात के समय रसोई में जूठे बर्तन छोड़ देते हैं, जो वास्तु के नजरिए से गलत माना जाता है। महंत ने स्पष्ट किया है कि रात को सोने से पहले रसोई के सभी बर्तनों को अच्छी तरह धोकर साफ रखना चाहिए। रात भर जूठे बर्तन छोड़ने से घर में नकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ता है, जिसका सीधा असर घर के वातावरण पर पड़ता है।
रसोई की दिशा और चूल्हे का स्थान
वास्तु शास्त्र में रसोई के निर्माण के लिए सही दिशा का चुनाव करना बहुत जरूरी है। महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं कि रसोई को हमेशा अग्नि कोण में ही बनाना चाहिए। यह दिशा पूरब और दक्षिण के बीच के हिस्से को दर्शाती है। इसके अलावा, खाना बनाते समय भी दिशा का ध्यान रखना अनिवार्य है। चूल्हे का मुख कभी भी दक्षिण दिशा की ओर नहीं होना चाहिए, क्योंकि इसे शुभ नहीं माना जाता है।
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