कौशांबी में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में फर्जीवाड़ा, दूल्हा नदारद रहने पर पड़ोसी को बिठाया मंडप में

उत्तर प्रदेश के कौशांबी में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना का लाभ उठाने के लिए एक हैरान करने वाला फर्जीवाड़ा सामने आया है, जहां दूल्हे के नहीं आने पर पड़ोसी युवक को मंडप में बिठा दिया गया।

सामूहिक विवाह समारोह में हंगामा

उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत आयोजित एक कार्यक्रम में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने प्रशासन और स्थानीय लोगों को हैरान कर दिया है। सैनी थाना क्षेत्र के गुलामीपुर गांव की एक युवती नगमा बानो का निकाह पहले से ही रायबरेली के एक युवक के साथ 17 मार्च 2027 के लिए तय किया गया था। सरकारी योजना का लाभ उठाने के इरादे से परिजनों ने युवती का पंजीकरण इस सामूहिक विवाह योजना के लिए करवा दिया था। कार्यक्रम के दिन जब तय किया गया दूल्हा समारोह स्थल पर नहीं पहुंचा, तो परिवार वालों ने आनन-फानन में एक बड़ा कदम उठाते हुए गांव के ही एक पड़ोसी युवक को दूल्हा बनाकर मंडप में बिठा दिया।

पड़ोसी को दिया था दहेज का लालच

यह पूरा मामला सिराथू के सयारा मैदान में बीते रविवार को आयोजित सामूहिक विवाह कार्यक्रम का है। बताया जा रहा है कि जब मूल दूल्हा समारोह में नहीं आया, तो परिवार वालों ने गांव के ही युवक शनि वाल्मीकि को आधे दहेज का प्रलोभन दिया और मंडप में बिठा दिया। हालांकि, यह साजिश लंबे समय तक टिक नहीं सकी। जैसे ही लड़के के घर वालों को इसकी खबर मिली, वे तुरंत विवाह स्थल पर पहुंच गए। यहां दोनों पक्षों के बीच विवाद शुरू हो गया और विवाद के दौरान युवक की पिटाई भी हुई, जिससे पूरे समारोह स्थल पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

पुलिस और प्रशासन की जांच में खुलासा

सूचना पाकर पुलिस बल तुरंत घटनास्थल पर पहुंचा और मामले को शांत कराया। पुलिस ने युवक, युवती और दोनों परिवारों के सदस्यों को पूछताछ के लिए थाने ले जाकर हिरासत में लिया। प्राथमिक जांच में यह स्पष्ट हुआ कि जब विवाह के लिए दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा था, तब फिंगरप्रिंट मिलान के दौरान युवक का बायोमेट्रिक डेटा रिकॉर्ड से मेल नहीं खाया था। उसी समय उसे विवाह की आधिकारिक प्रक्रिया से हटा दिया गया था। अब बड़ा सवाल यह है कि बायोमेट्रिक सत्यापन में फेल होने के बावजूद वह युवक मंडप तक दोबारा कैसे पहुंच गया, इसकी गहन जांच की जा रही है।

रद्द किया गया विवाह पंजीकरण

इस पूरे घटनाक्रम पर मुख्य विकास अधिकारी विनोद राम त्रिपाठी ने स्पष्ट किया कि नगमा बानो का पंजीकरण सामूहिक विवाह योजना के लिए हुआ था, लेकिन बायोमेट्रिक मिलान न होने के कारण उसे प्रक्रिया से अलग कर दिया गया था। उन्होंने आगे बताया कि संबंधित विवाह का पंजीकरण अब पूरी तरह रद्द कर दिया गया है और इस पूरे मामले की विस्तृत जांच के सख्त निर्देश दिए गए हैं। गौरतलब है कि रविवार को सिराथू के सयारा मैदान में आयोजित इस भव्य समारोह में कुल 230 जोड़ों का विवाह संपन्न कराया गया, जिनमें दो मुस्लिम जोड़े भी शामिल थे। प्रशासन अब इस बात की जांच कर रहा है कि सुरक्षा घेरे और सरकारी प्रक्रिया के बावजूद यह फर्जीवाड़ा कैसे संभव हुआ।

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