पूर्णिया: सड़क हादसे में तड़पते मासूम को देख सेल्फी लेने में जुटे थे लोग, सांसद पप्पू यादव ने मसीहा बनकर बचाई जान

पूर्णिया में एक सड़क हादसे के दौरान जब घायल बच्चा सड़क पर तड़प रहा था, तो मौके पर मौजूद लोग मदद करने के बजाय तस्वीरें लेने में लगे रहे। तभी वहां से गुजर रहे सांसद पप्पू यादव ने बच्चे को गोद में उठाया और अस्पताल पहुंचाकर उसकी जान बचाई, साथ ही समाज की संवेदनहीनता पर गहरा दुख व्यक्त किया।

पूर्णिया में मानवीय संवेदनाओं का शर्मनाक चेहरा

आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया की चमक-धमक के बीच क्या हम इंसानियत का मूल अर्थ भूलते जा रहे हैं? क्या किसी मासूम की जान अब मोबाइल के कैमरे में कैद होने वाली सेल्फी से सस्ती हो गई है? बिहार के पूर्णिया से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने न केवल समाज की क्रूर हकीकत को आईने के सामने खड़ा कर दिया है, बल्कि इंसानियत के नाम पर एक बड़ा सवाल भी खड़ा कर दिया है। पूर्णिया के झील टोला इलाके में हुए एक सड़क हादसे ने यह साबित कर दिया है कि कैसे भीड़ का हिस्सा बने लोग तड़पते हुए जीवन को बचाने के बजाय रील और तस्वीरों में मशगूल हो गए थे।

सड़क पर तड़पता रहा बच्चा, लोग व्यस्त रहे सेल्फी में

घटना की शुरुआत उस समय हुई जब एक स्कूली छात्र सड़क से गुजर रहा था। तभी एक तेज रफ्तार बाइक ने उसे जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गया और उसके सिर से खून की धार बहने लगी। बच्चा सड़क पर दर्द से कराह रहा था और मदद के लिए चिल्ला रहा था। दुर्घटना के कुछ ही क्षणों में वहां भीड़ जमा हो गई। आमतौर पर ऐसी स्थिति में लोगों को घायल की मदद के लिए दौड़ पड़ना चाहिए था, लेकिन पूर्णिया की इस भीड़ का बर्ताव कुछ और ही था। वहाँ मौजूद लोग घायल बच्चे को अस्पताल ले जाने के बजाय अपने मोबाइल निकालकर उसकी तस्वीरें खींचने और वीडियो बनाने में व्यस्त थे। ऐसा लग रहा था मानो किसी की जिंदगी से ज्यादा महत्वपूर्ण सोशल मीडिया पर साझा करने के लिए एक तस्वीर थी।

पप्पू यादव ने निभाई मसीहा की भूमिका

उसी रास्ते से पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव का काफिला गुजर रहा था। कसबा से लौटते समय उनकी नजर सड़क पर लगी भीड़ और खून से लथपथ पड़े मासूम पर पड़ी। भीड़ का अजीब व्यवहार और बच्चे की हालत देखकर वह खुद को रोक नहीं पाए और तुरंत गाड़ी से नीचे उतर आए। बिना किसी देरी के उन्होंने लहूलुहान बच्चे को अपनी गोद में उठाया और उसे अस्पताल ले जाने के लिए निकल पड़े। अस्पताल की ओर जाते समय वे लगातार बच्चे को हौसला देते रहे। उन्होंने प्यार से उसे 'बेटा' कहकर संबोधित किया और ढांढस बंधाया कि उसे कुछ नहीं होगा। रास्ते में ही उन्होंने अस्पताल प्रशासन को फोन करके निर्देश दे दिए थे कि डॉक्टरों की टीम को आपातकालीन स्थिति के लिए तैयार रखा जाए ताकि बच्चे को तुरंत इलाज मिल सके।

समाज की स्थिति पर छलका सांसद का दर्द

जीएमसीएच अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने फौरन बच्चे का उपचार शुरू कर दिया। पप्पू यादव के सहयोगियों ने बच्चे के परिवार के सदस्यों को ढूंढा और उन्हें सूचित किया। जब परिजन अस्पताल पहुंचे, तो सांसद ने बच्चे के भाई को इलाज और दवाइयों के लिए नकद आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई। डॉक्टरों ने पुष्टि की है कि समय पर इलाज मिलने के कारण बच्चा अब खतरे से बाहर है। अस्पताल से निकलने के बाद सांसद पप्पू यादव का गुस्सा और दुख साफ दिखाई दे रहा था। उन्होंने बेहद भावुक लहजे में कहा कि जब वे कसबा से वापस आ रहे थे, तब उन्होंने यह भयानक दृश्य देखा। उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि जिस समाज में हम जी रहे हैं, वह नैतिक रूप से पूरी तरह खत्म हो चुका है। उन्होंने कहा कि आज किसी की नाव डूब जाए, किसी के साथ दुर्घटना हो जाए या कोई दर्दनाक घटना घटे, लोग सेल्फी लेने में जुट जाते हैं। सांसद ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि यह देश अंदर से मर चुका है और इंसानियत का दम घुट रहा है। उन्होंने यहां तक कहा कि कभी-कभी सोचने पर मजबूर होना पड़ता है कि क्या ऐसे संवेदनहीन समाज में रहना उचित है जहाँ किसी की जान की कोई कीमत नहीं बची।

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