हिमाचल में फिलहाल थमा बारिश का दौर
हिमाचल प्रदेश में इस समय मॉनसून की गतिविधियां काफी धीमी पड़ गई हैं। प्रदेश के अधिकतर इलाकों से बादल गायब हो गए हैं और सोमवार को खिली हुई धूप देखी जा रही है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के ताजा अपडेट के अनुसार, राज्य में मॉनसून 17 जुलाई तक कमजोर बना रहेगा। इस अवधि के दौरान मौसम विभाग की ओर से बारिश को लेकर कोई बड़ी चेतावनी जारी नहीं की गई है, जिससे लोगों को फिलहाल उमस और गर्मी का सामना करना पड़ सकता है।
18 जुलाई से फिर सक्रिय होगा मॉनसून
मौसम विभाग के शिमला केंद्र के निदेशक शोभित कटियार ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में मॉनसून ने पूरी तरह से विदाई नहीं ली है। 18 जुलाई से मॉनसून एक बार फिर पूरी तरह सक्रिय हो जाएगा। यह बारिश का सिलसिला 22 जुलाई तक जारी रहने की पूरी संभावना है। इस दौरान मैदानी और मध्य पर्वतीय जिलों में रुक रुक कर बारिश का दौर बना रहेगा। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि 20 जुलाई के आसपास सबसे अधिक बारिश होने की प्रबल संभावना है। इस दौरान कुछ क्षेत्रों में भारी से लेकर बहुत अधिक भारी बारिश भी हो सकती है। हालांकि, 23 जुलाई से एक बार फिर मॉनसून की गतिविधियां कमजोर होने लगेंगी और बारिश का असर कम हो जाएगा।
तापमान में उतार-चढ़ाव की स्थिति
आने वाले दिनों में तापमान के पैटर्न में बदलाव देखने को मिलेगा। 17 जुलाई तक प्रदेश के अधिकतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, इस दौरान मैदानी क्षेत्रों में अधिकतम तापमान 28 से 32 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है, जबकि मध्य पर्वतीय क्षेत्रों में पारा 22 से 26 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज होने की संभावना है। इसके बाद 18 जुलाई से जैसे ही बारिश का जोर बढ़ेगा, तापमान में एक बार फिर गिरावट दर्ज की जाएगी, जो 22 जुलाई तक बरकरार रहेगी। उसके बाद 23 जुलाई से फिर से गर्मी बढ़ने के आसार हैं।
भूस्खलन और जलस्तर को लेकर चेतावनी
मौसम विभाग ने आने वाले बारिश के दौर को लेकर विशेष चेतावनी जारी की है। शोभित कटियार ने कहा कि 18 से 22 जुलाई के बीच मध्य पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन और मलबा गिरने की घटनाओं का खतरा काफी बढ़ जाएगा। विशेष रूप से वे स्थान जो लैंडस्लाइड हॉटस्पॉट के रूप में चिन्हित किए गए हैं, वहां लोगों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। साथ ही, राज्य की नदियों, खड्डों और अन्य प्राकृतिक जल स्रोतों का जलस्तर भी अचानक बढ़ सकता है, जिससे निचले इलाकों में खतरा हो सकता है।
जुलाई में अब तक बारिश की स्थिति
राज्य में मॉनसून की बारिश का डेटा देखा जाए तो जुलाई के शुरुआती 12 दिनों में सामान्य से 32 फीसदी अधिक वर्षा दर्ज की गई है। हालांकि, जिलों के हिसाब से आंकड़े अलग हैं। जुलाई में सबसे ज्यादा बारिश किन्नौर में 151 फीसदी, सोलन में 115 फीसदी और कुल्लू में 107 फीसदी अधिक रिकॉर्ड की गई है। इसके उलट हमीरपुर जिला ऐसा रहा जहां सामान्य से 31 फीसदी कम बारिश हुई। वहीं, पूरे मॉनसून सीजन को देखें तो अब तक सामान्य से करीब 3 फीसदी कम वर्षा ही रिकॉर्ड की गई है। सोमवार शाम तक प्रदेश में कुल 96 सड़कें बारिश और भूस्खलन के कारण यातायात के लिए बंद थीं, जिन्हें खोलने का काम युद्धस्तर पर किया जा रहा है।
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