शिक्षा से जुड़ने का सुनहरा अवसर
बिहार में उन महिलाओं और युवतियों के लिए उम्मीद की एक नई किरण जगी है, जो पारिवारिक जिम्मेदारियों या अन्य किन्हीं वजहों से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी नहीं कर सकी थीं। गया जिले में 'सेकेंड चांस' (दूसरा मौका) नाम से एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य ऐसी ग्रामीण महिलाओं, जिन्हें स्थानीय भाषा में 'दीदियां' कहा जाता है, और उन बेटियों को पुनः शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना है, जिन्होंने अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी थी। यह पहल जीविका और प्रथम संस्था के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है।
किसी भी उम्र की महिलाएं ले सकती हैं हिस्सा
इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें आयु सीमा का कोई बंधन नहीं है। किसी भी आयु वर्ग की महिलाएं इस अभियान के साथ जुड़कर अपनी मैट्रिक यानी कक्षा 10वीं की परीक्षा में शामिल हो सकती हैं। यह उन महिलाओं के लिए विशेष रूप से मददगार है जो दोबारा परीक्षा देने की इच्छा तो रखती हैं, लेकिन मार्गदर्शन के अभाव में आगे नहीं बढ़ पातीं। संस्थान उन्हें न केवल परीक्षा के लिए तैयार करते हैं, बल्कि उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए भी निरंतर कार्य कर रहे हैं ताकि वे बोर्ड परीक्षा में सफल हो सकें।
दूरस्थ शिक्षा के जरिए हो रही पढ़ाई
अभियान के तहत शिक्षा की व्यवस्था दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से की गई है। इच्छुक अभ्यर्थियों का पंजीकरण राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान और बिहार मुक्त विद्यालयी शिक्षा एवं परीक्षा बोर्ड के नियमों के तहत कराया जाता है। गया जिले में यह योजना पिछले 2 वर्षों से सक्रिय रूप से चल रही है। पिछले वर्ष इस योजना के माध्यम से 2 महिलाओं ने पंजीकरण कराया था और खुशी की बात यह है कि दोनों ही अभ्यर्थी इस वर्ष परीक्षा में सफल भी रहीं।
बड़े स्तर पर लक्ष्य का निर्धारण
इस वर्ष जीविका के अधिकारियों ने इस अभियान के दायरे को और अधिक विस्तृत करने का निर्णय लिया है। जीविका के एसडी मैनेजर राकेश कुमार ने जानकारी दी है कि इस वर्ष 400 से अधिक महिलाओं, युवाओं और शिक्षा के इच्छुक ग्रामीणों को इस अभियान के साथ जोड़ने का बड़ा लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष विशेष रूप से डोभी और बोधगया प्रखंड क्षेत्रों में इस कार्यक्रम का संचालन किया जाएगा।
पंजीकरण और शिक्षण प्रक्रिया
पंजीकरण की प्रक्रिया जल्द ही शुरू होने वाली है। इच्छुक महिलाएं अपने नजदीकी जीविका संकुल संघों और स्थानीय जीविका कार्यालयों से संपर्क कर इस अभियान का हिस्सा बन सकती हैं। एक बार पंजीकरण पूरा होने के बाद, प्रथम संस्था के सहयोग से उन्हें कक्षाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। यह पढ़ाई ऑफलाइन क्लासरूम और ऑनलाइन माध्यमों के जरिए कराई जाती है। इतना ही नहीं, महिलाओं को मुफ्त स्टडी मैटेरियल यानी अध्ययन सामग्री और मॉक टेस्ट की सुविधा भी दी जाती है, ताकि परीक्षा के दौरान उन्हें किसी भी प्रकार की घबराहट न हो और वे पूरी तैयारी के साथ बोर्ड परीक्षा में बैठ सकें।
यह पहल न केवल महिलाओं को शिक्षित करने का माध्यम है, बल्कि यह उन्हें समाज में आत्मनिर्भर बनाने और उनके अधूरे सपनों को फिर से जीने का हौसला देने का एक प्रयास है।
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