भारत-नेपाल बॉर्डर पर संदिग्ध अमेरिकी पकड़ा गया
सोनौली के मैनिहवा इलाके में उस समय अफरातफरी मच गई जब सीमा सुरक्षा बल यानी एसएसबी के जवानों ने एक अमेरिकी नागरिक को बिना वीजा नेपाल की सीमा में घुसने का प्रयास करते हुए पकड़ा। घटना शनिवार की सुबह की है, जब जवान सीमा स्तंभ 516 के निकट रूटीन पेट्रोलिंग कर रहे थे। इस दौरान सुरक्षा बलों को एक व्यक्ति संदिग्ध हालात में नेपाल की दिशा में जाता हुआ दिखाई दिया। जब जवानों ने उसे रोकने का प्रयास किया, तो वह बचने के लिए भागने लगा, लेकिन सुरक्षा बलों ने तत्परता दिखाते हुए उसे चारों तरफ से घेरकर काबू कर लिया। इसी बीच एक और खबर सामने आई है कि अमेरिका में रहने वाली भारतीय मूल की गूगल कर्मचारी शीतल व्रजेसियन की गोली मारकर हत्या कर दी गई है।
तलाशी में मिली नकदी और मोबाइल
पकड़े गए अमेरिकी नागरिक की पहचान 36 वर्षीय जॉर्डन ब्राउन के रूप में हुई है, जो अमेरिका के कैलिफोर्निया राज्य का रहने वाला बताया जा रहा है। पकड़े जाने के बाद जब उसकी तलाशी ली गई, तो सुरक्षा बलों को उसके पास से 31 हजार 460 रुपये नकद और 2 मोबाइल फोन मिले। हैरान करने वाली बात यह है कि उसके पास पासपोर्ट या वीजा जैसा कोई भी वैध यात्रा दस्तावेज नहीं था। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, वह बेंगलुरु से चलकर सोनौली सीमा तक पहुंचा था और बिना किसी कागजात के नेपाल जाने की फिराक में था। फिलहाल खुफिया एजेंसियां उससे सघन पूछताछ कर रही हैं।
जॉर्डन ब्राउन के अजीब दावों से बढ़ी चिंता
बिना दस्तावेजों के पकड़े जाने के बावजूद जॉर्डन ब्राउन ने अपनी पहचान और गतिविधियों के बारे में कई चौंकाने वाले दावे किए हैं। उसने खुद को अमेरिकी स्पेशल फोर्सेज का पूर्व सैनिक बताया है और कहा कि वह 'नाज़' नाम के किसी परिचित व्यक्ति की तलाश कर रहा है। उसके द्वारा दुनिया के कई देशों की यात्रा करने के दावों ने जांच एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। सुरक्षा विशेषज्ञ अब इन गतिविधियों की तुलना मैथ्यू वैनडाइक नामक व्यक्ति से कर रहे हैं, जिसे कुछ महीने पहले भारत में ही पकड़ा गया था।
कौन है मैथ्यू वैनडाइक और क्यों हुआ चर्चा में?
मैथ्यू वैनडाइक उन सात विदेशी नागरिकों में शामिल था, जिन्हें 17 मार्च को भारत के विरुद्ध साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। वह अवैध तरीके से म्यांमार में प्रवेश करने की कोशिश कर रहा था ताकि वहां के सशस्त्र समूहों को ट्रेनिंग दे सके। वैनडाइक खुद को सिक्योरिटी एनालिस्ट और डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर के तौर पर पेश करता था। साल 2011 में लीबिया के गृह युद्ध के दौरान वह विद्रोही लड़ाकों के साथ देखा गया था। बाद में उसने 'सन्स ऑफ़ लिबर्टी इंटरनेशनल' नामक संस्था बनाई, जो दुनिया भर के अशांत क्षेत्रों में हथियारबंद समूहों को मिलिट्री ट्रेनिंग और रणनीतिक सलाह देती है।
विद्रोह को बढ़ावा देने का आरोप
जांच के दौरान वैनडाइक के सोशल मीडिया अकाउंट्स और फोन से जो सबूत मिले, उनसे पता चला कि वह दुनिया भर में भड़कने वाले विद्रोहों का समर्थक है। उसका मानना था कि स्थानीय नागरिकों को खुद के लिए लड़ने हेतु प्रशिक्षित करना चाहिए। उसने वेनेजुएला, म्यांमार और ईरान जैसे देशों के विद्रोही गुटों में शामिल होने के लिए सार्वजनिक रूप से अपील भी की थी। भारतीय एजेंसियों का मानना है कि उसका पूर्वोत्तर भारत में सक्रिय हथियारबंद समूहों से संबंध हो सकता है। शक है कि वह उन समूहों को आधुनिक ड्रोन तकनीक और युद्ध कौशल सिखाने का काम कर रहा था।
भारत में क्यों हुआ था बवाल?
मैथ्यू वैनडाइक की गिरफ्तारी इसलिए बेहद गंभीर मानी गई क्योंकि सवाल यह उठा कि भारत की जमीन का इस्तेमाल एक ट्रांजिट कॉरिडोर के रूप में क्यों किया जा रहा था। क्या उसका भारत विरोधी प्रतिबंधित समूहों के साथ कोई गहरा नेटवर्क था? वह युद्ध अभियानों में माहिर माना जाता है और कथित तौर पर अमेरिकी सेना का हिस्सा भी रह चुका है। उसने इराक जैसे खतरनाक युद्ध क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दी हैं। उसे कोलकाता में पकड़ा गया था, जबकि उसके साथ पकड़े गए यूक्रेनी नागरिकों को दिल्ली और लखनऊ से हिरासत में लिया गया था। पटियाला हाउस कोर्ट में एनआईए ने कस्टडी मांगी थी ताकि इस अंतरराष्ट्रीय साजिश की गहराई तक जाया जा सके।
जॉर्डन ब्राउन मामले की अगली कड़ी
वैनडाइक की तरह ही अब जॉर्डन ब्राउन से पूछताछ की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि वह भारत में कितने समय से था और उसके असल मकसद क्या थे। उसे अब सोनौली पुलिस के सुपुर्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यह मामला एक बार फिर भारत की सुरक्षा और सीमाओं पर बढ़ रही विदेशी संदिग्धों की गतिविधियों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
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