राम मंदिर के पहले CEO पद के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू, जानें आयु सीमा और योग्यता

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के लिए आधिकारिक तौर पर आवेदन आमंत्रित किए हैं, जिसमें 50 से 70 वर्ष की आयु के अनुभवी व्यक्ति पात्र होंगे।

अयोध्या राम मंदिर के लिए नियुक्त होंगे पहले CEO

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास ने राम मंदिर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी CEO के महत्वपूर्ण पद के लिए आधिकारिक भर्ती का ऐलान कर दिया है। यह पद पूरी तरह से अनुबंध आधारित होगा और शुरुआत में नियुक्ति **तीन साल** की अवधि के लिए की जाएगी। हालांकि, कार्य संतोषजनक पाए जाने पर इसे आगे बढ़ाए जाने का भी प्रावधान रखा गया है। न्यास ने स्पष्ट किया है कि केवल **50 से 70 साल** की उम्र के बीच के व्यक्ति ही इस पद के लिए अपनी उम्मीदवारी पेश कर सकते हैं। इसके अलावा आवेदक को **हिंदी** और **अंग्रेजी** भाषाओं का पूर्ण और अच्छा ज्ञान होना अनिवार्य है। भर्ती के इच्छुक उम्मीदवार **18 जुलाई** को शाम **4 बजे** तक अपना आवेदन जमा कर सकते हैं।

सीईओ की भूमिका और चयन प्रक्रिया

सोमवार को ट्रस्ट द्वारा जारी की गई आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, इस पद पर नियुक्त होने वाला व्यक्ति अयोध्या राम मंदिर का पहला CEO होगा। यह नियुक्ति ऐसे समय में हो रही है जब मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं, जिसके चलते इस पद का महत्व और अधिक बढ़ गया है। मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष **नृपेंद्र मिश्रा** ने रविवार को स्पष्ट किया कि पहले CEO के अधिकार और दायित्व पूरी तरह से न्यास द्वारा ही निर्धारित किए जाएंगे। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया है कि इस प्रक्रिया या CEO के कामकाज में किसी भी तरह का सरकारी हस्तक्षेप नहीं होगा। CEO की मुख्य जिम्मेदारी मंदिर के प्रति भक्तों के विश्वास को बनाए रखना और वित्तीय व्यवस्था का कुशल प्रबंधन करना होगा। इसके साथ ही, उन्हें अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करनी होंगी और ट्रस्ट के सहायक के रूप में जवाबदेही निभानी होगी।

प्रशासनिक अधिकार और चयन समिति

नृपेंद्र मिश्रा ने बताया कि CEO के कार्यालय के संचालन के लिए कर्मचारियों की नियुक्ति करने की स्वतंत्रता संबंधित अधिकारी को होगी, लेकिन संपूर्ण प्रशासन पर अंतिम नियंत्रण न्यास का ही रहेगा। आवेदनों की बारीकी से जांच करने और सबसे उपयुक्त नाम की सिफारिश करने के लिए ट्रस्ट ने **तीन सदस्यीय** एक विशेष समिति गठित की है। इस समिति में **उच्चतम न्यायालय** के सेवानिवृत्त न्यायाधीश **न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली**, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल **विष्णुकांत चतुर्वेदी** और **एनआईटी रायपुर** के पूर्व अध्यक्ष **सुरेश हवारे** शामिल हैं। नृपेंद्र मिश्रा ने खुद को इस चयन समिति से अलग रखा है और कहा है कि **22 जुलाई** को होने वाली ट्रस्ट की बैठक के एजेंडे को देखने के बाद ही वे इसमें अपनी भागीदारी पर फैसला लेंगे। उन्होंने **चंपत राय** के संबंध में टिप्पणी करते हुए कहा कि उनके प्रति निष्ठा में कोई कमी नहीं है, बल्कि यह निगरानी की प्रक्रिया में कमी का मामला है।

न्यास की सक्रियता और व्यवस्था में बदलाव

ट्रस्ट के महासचिव **चम्पत राय** और **डॉ. अनिल मिश्रा** के इस्तीफों की चर्चाओं के बीच, निर्मोही अखाड़े के अध्यक्ष और ट्रस्ट के सदस्य **महंत दीनेन्द्र दास** मंदिर परिसर में अत्यंत सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। वे निरंतर मंदिर की व्यवस्थाओं का जायजा ले रहे हैं। सोमवार को वे राम मंदिर की मंगला आरती में सम्मिलित हुए और यात्री सुविधा केंद्र पहुंचकर वहां की कार्यप्रणाली का निरीक्षण किया। इससे एक दिन पहले, रविवार को भी **दीनेन्द्र दास** ने गर्भगृह में श्रंगार आरती में भाग लिया और काउंटिंग सेंटर जाकर चढ़ावे की गिनती की प्रक्रिया को स्वयं देखा। फिलहाल न्यास मंदिर की प्रशासनिक कार्यप्रणाली को चुस्त और पारदर्शी बनाने की दिशा में हरसंभव कदम उठा रहा है, जिसमें CEO की नियुक्ति को एक बड़ा सुधार माना जा रहा है।

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