बिहार: मछली के तालाब के ऊपर मुर्गी पालन, किसान ने अपनाया कमाई का अनोखा मॉडल

जहानाबाद के एक किसान ने तकनीक का इस्तेमाल कर तालाब के ऊपर ही पोल्ट्री फार्म तैयार किया है, जिससे खर्च कम होगा और एक ही जमीन से कई गुना ज्यादा मुनाफा कमाने का रास्ता साफ होगा।

मछली और मुर्गी पालन का अद्भुत संगम

बिहार में खेती और पशुपालन के पारंपरिक तरीकों से अलग, जहानाबाद जिले के एक प्रगतिशील किसान ने कमाल का प्रयोग किया है। आपने अब तक पोल्ट्री फार्म को जमीन पर बने शेड में देखा होगा, लेकिन मखदुमपुर प्रखंड के रहने वाले देव शरण प्रसाद ने अपने मछली पालन वाले तालाब के ऊपर ही मुर्गी पालन की व्यवस्था शुरू कर दी है। उन्होंने अपनी सूझबूझ और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए एक ऐसा स्ट्रक्चर तैयार किया है, जो आने वाले समय में खेती के नए आयाम स्थापित कर सकता है।

कैसे काम करता है यह अनूठा मॉडल

देव शरण प्रसाद पिछले 2 वर्षों से मछली पालन के व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। उन्होंने अपने तालाब के ऊपर ही पिलर डालकर एक मजबूत ढांचा खड़ा किया है। इस पूरे स्ट्रक्चर को तैयार करने के लिए उन्होंने इस्पात यानी लोहे का उपयोग किया है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि मुर्गियों के रहने वाली जगह को जालीदार बनाया गया है। इस जालीदार फर्श का सीधा फायदा यह है कि मुर्गियों का मल सीधे नीचे तालाब में गिरता है, जो मछलियों के लिए बेहतरीन भोजन यानी फीड का काम करता है। इससे मछली पालन के लिए बाजार से अलग से फीड खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे खर्च में भारी कटौती होती है।

आर्थिक बचत और लागत का ब्योरा

देव शरण बताते हैं कि बिहार में इस तरह का एकीकृत प्रोजेक्ट देखने को कम ही मिलता है। इस मॉडल को अपनाने के कई फायदे हैं। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि इससे खेती योग्य जमीन की काफी बचत होती है। किसान का दावा है कि इस एकीकृत फार्मिंग से मछली और मुर्गी पालन के कुल खर्च में लगभग 35 फीसदी तक की कमी आएगी।

इस पूरे प्रोजेक्ट की लागत पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि इस स्ट्रक्चर को तैयार करने में कुल 6 लाख रुपए का खर्च आएगा। अभी तक इस्पात और पिलर लगाने का मुख्य कार्य पूरा हो चुका है, जिस पर 4.50 लाख रुपए खर्च किए गए हैं। वहीं, मुर्गियों को खरीदने और उनके खानपान के लिए करीब डेढ़ लाख रुपए की अतिरिक्त लागत आएगी।

लीक से हटकर सोचने का फायदा

देव शरण प्रसाद का मानना है कि यदि आप व्यापार में सिर्फ लकीर के फकीर बने रहेंगे, तो लाभ की संभावनाएं काफी सीमित हो जाती हैं। उनका कहना है कि अगर आप कुछ नया और हटकर काम करते हैं, तो न केवल समाज में आपकी अलग पहचान बनती है, बल्कि कमाई के नए रास्ते भी खुलते हैं। वे फिलहाल इसी मॉडल पर काम कर रहे हैं और भविष्य के लिए उन्होंने और भी कई योजनाएं बना रखी हैं।

भविष्य की योजनाएं और विस्तार

किसान ने अपनी भविष्य की योजनाओं के बारे में विस्तार से चर्चा करते हुए बताया कि वे जल्द ही पोल्ट्री वाले इस स्ट्रक्चर में बटेर पालन की भी शुरुआत करने जा रहे हैं। उनका लक्ष्य केवल मछली या मुर्गी पालन तक सीमित नहीं है, बल्कि वे एक ही जमीन के टुकड़े का अधिकतम इस्तेमाल कर उसे 5 अलग-अलग तरह की आय का जरिया बनाना चाहते हैं। कम लागत और अधिक मुनाफा देने वाला यह व्यवसाय अन्य किसानों के लिए भी एक बेहतरीन प्रेरणा का स्रोत है। फिलहाल, तालाब से मछली बेचकर वे मुनाफा कमा रहे हैं, लेकिन जल्द ही पोल्ट्री का काम शुरू होते ही उनकी आमदनी में बड़ा उछाल देखने को मिलेगा।

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