इस समय भारतीय अर्थव्यवस्था एक साथ कई दबावों से जूझ रही है। पश्चिम एशिया में चल रहा युद्ध, बढ़ती महंगाई, महंगा होता कच्चा तेल और कमजोर पड़ती वैश्विक मांग ने आर्थिक माहौल को चुनौतीपूर्ण बना दिया है। ऐसे समय में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए विकास दर का अनुमान घटाते हुए महंगाई का अनुमान बढ़ा दिया है। दूसरी ओर, सरकार ने विदेशी निवेशकों को एक बड़ी टैक्स राहत देकर देश में पूंजी प्रवाह यानी कैपिटल फ्लो बढ़ाने की कोशिश की है।
विदेशी निवेशकों को बड़ी टैक्स राहत
आर्थिक दबावों के बीच सरकार ने विदेशी पूंजी को आकर्षित करने के लिए अहम कदम उठाया है। घोषणा के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) को सरकारी बॉन्ड (G-Secs) पर मिलने वाले ब्याज तथा बिक्री से होने वाली आय पर कैपिटल गेन टैक्स से छूट दी जाएगी। अब तक विदेशी निवेशकों को 12.5% लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स और सरकारी बॉन्ड के ब्याज पर 20% टैक्स चुकाना पड़ता था। नई व्यवस्था से भारतीय बॉन्ड बाजार में विदेशी निवेश बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
रुपये और बाजार को मिल सकता है सहारा
सरकार का मानना है कि इस फैसले से देश में स्थिर विदेशी पूंजी आएगी। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब रुपये पर लगातार दबाव बना हुआ है और विदेशी निवेशकों की ओर से बिकवाली देखने को मिल रही है। माना जा रहा है कि यदि विदेशी निवेश बढ़ता है तो इससे रुपये को मजबूती मिल सकती है और सरकार की उधारी की लागत में भी कमी आ सकती है।
विकास दर के अनुमान में कटौती
आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 6.9% से घटाकर 6.6% कर दिया है। केंद्रीय बैंक का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव, ऊंची ऊर्जा कीमतें, सप्लाई चेन में रुकावट और मौसम से जुड़े जोखिम आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकते हैं। RBI के अनुसार, FY27 की पहली तिमाही में विकास दर 6.6%, दूसरी तिमाही में 6.3%, तीसरी तिमाही में 6.5% और चौथी तिमाही में 6.8% रहने का अनुमान है। हालांकि, RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि निजी खपत, निवेश, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर के निर्यात के दम पर भारतीय अर्थव्यवस्था अब भी मजबूती बनाए हुए है।
महंगाई को लेकर बढ़ी चिंता
आरबीआई ने महंगाई के मोर्चे पर भी सतर्कता दिखाई है। केंद्रीय बैंक ने FY27 के लिए खुदरा महंगाई (CPI) का अनुमान 4.6% से बढ़ाकर 5.1% कर दिया है। खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतें, पश्चिम एशिया संकट के चलते ऊर्जा लागत में उछाल और मौसम संबंधी जोखिम महंगाई बढ़ाने वाले प्रमुख कारण बताए गए हैं। आरबीआई का अनुमान है कि तीसरी तिमाही में महंगाई 5.9% तक पहुंच सकती है, जो उसके तय लक्ष्य के ऊपरी स्तर के करीब है। इसके अलावा, एल नीनो और सामान्य से कमजोर मानसून की आशंका को भी केंद्रीय बैंक ने प्रमुख जोखिमों में रखा है। यदि बारिश कम होती है तो खाने-पीने की चीजों का उत्पादन प्रभावित हो सकता है, जिससे खाद्य महंगाई और बढ़ने का खतरा रहेगा।
रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं
आरबीआई ने फिलहाल रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा है, लेकिन साफ संकेत दिया है कि वह महंगाई और वैश्विक हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है। आने वाले महीनों में युद्ध, तेल की कीमतें और मानसून की स्थिति यह तय करेंगी कि भारत की अर्थव्यवस्था किस दिशा में आगे बढ़ती है। फिलहाल सरकार और आरबीआई दोनों के सामने विकास और महंगाई के बीच संतुलन बनाए रखने की बड़ी चुनौती है।
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