27 साल पुराने फर्जीवाड़े का पर्दाफाश, पुलिस की नौकरी पाने के लिए जमा किया था जाली हलफनामा

उत्तर प्रदेश के आगरा में एक व्यक्ति को पुलिस सेवा में अवैध तरीके से भर्ती होने के जुर्म में 3 साल की कैद की सजा सुनाई गई है। आरोपी ने करीब 27 साल पहले फर्जी दस्तावेजों के जरिए पीएसी में नौकरी हासिल की थी।

न्याय में लगा लंबा समय

उत्तर प्रदेश के आगरा की एक अदालत ने 27 साल पुराने एक बड़े धोखाधड़ी मामले में अपना फैसला सुनाया है। अदालत ने भोजराज नामक एक व्यक्ति को फर्जी हलफनामा देकर पुलिस की नौकरी हथियाने के मामले में दोषी करार दिया है। आरोपी मूल रूप से उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के सिथरपुर गांव का निवासी है। अदालत ने उसे पीएसी यानी प्रादेशिक आर्म्ड कांस्टेबुलरी में भर्ती के लिए जाली दस्तावेजों के इस्तेमाल का दोषी मानते हुए 3 साल की जेल की सजा सुनाई है। इसके साथ ही कोर्ट ने उस पर 3,000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। यदि आरोपी जुर्माना जमा नहीं करता है, तो उसे अतिरिक्त जेल की सजा भुगतनी होगी।

क्या था पूरा मामला

यह मामला मुख्य रूप से वर्ष 1998-99 के दौरान का है, जिसने न्यायिक प्रक्रिया के दौरान ढाई दशक से अधिक का लंबा समय लिया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी भोजराज ने 1999 में जब पीएसी में कांस्टेबल पद के लिए अपनी दावेदारी पेश की थी, तब उसने चयन समिति के समक्ष एक झूठा हलफनामा प्रस्तुत किया। जब विभाग द्वारा दस्तावेजों की गहन जांच शुरू की गई, तब इस धांधली का खुलासा हुआ और प्रशासनिक स्तर पर सख्त कार्रवाई शुरू की गई।

एफआईआर और कानूनी कार्रवाई

धोखाधड़ी सामने आने के बाद, तत्कालीन क्लर्क प्रदीप कुमार वर्मा की ओर से शिकायत दर्ज कराई गई थी। इस शिकायत के आधार पर 1 जनवरी 1999 को आगरा के ताजगंज थाने में भोजराज के खिलाफ जालसाजी और धोखाधड़ी की धाराओं में मुकदमा पंजीकृत किया गया था। पुलिस ने मामले की विवेचना पूरी करने के बाद 31 मई 1999 को अदालत के समक्ष अपनी चार्जशीट पेश कर दी थी।

अदालत का फैसला

इस पूरे मामले की सुनवाई विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शिवानंद गुप्ता की अदालत में संपन्न हुई। सरकारी वकील राजेश कुमार के अनुसार, आरोपी ने भर्ती के समय गलत हलफनामा देकर तंत्र को गुमराह किया था। अभियोजन पक्ष ने सुनवाई के दौरान ठोस गवाहों और दस्तावेजी साक्ष्यों को पेश किया, जिन्हें कोर्ट ने सही पाया। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने स्पष्ट किया कि सरकारी नौकरी पाने के लिए धोखाधड़ी का सहारा लेना एक गंभीर अपराध है। इस फैसले के साथ ही नब्बे के दशक से लंबित चले आ रहे इस भर्ती घोटाले का अब अंत हो गया है।

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