छपरा के किसान का नया प्रयोग
बिहार के छपरा जिले में खेती और पशुपालन के पारंपरिक तरीकों को पीछे छोड़ते हुए युवा किसान नई राह तलाश रहे हैं। जिले के मढ़ौरा प्रखंड अंतर्गत पोझी भूआलपुर गांव के रहने वाले पप्पू कुमार यादव ने मछली पालन के व्यवसाय में एक नई पहचान बनाई है। उन्होंने साबित कर दिया है कि अगर सही तकनीक और मेहनत का सही तालमेल हो, तो खेती से इतर अन्य विकल्पों में भी भारी मुनाफा कमाया जा सकता है। उनकी सफलता की कहानी अब आसपास के उन युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है जो नौकरी की तलाश में भटक रहे हैं।
सीखने की शुरुआत और संघर्ष
पप्पू कुमार यादव की सफलता का सफर संघर्ष से शुरू हुआ था। अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने नौकरी पाने के लिए कई जगह प्रयास किए, लेकिन कामयाबी हाथ नहीं लगी। हार मानने के बजाय उन्होंने खुद को आत्मनिर्भर बनाने का फैसला किया। उन्होंने इंटरनेट पर मछली पालन से जुड़ी जानकारियां जुटानी शुरू कीं और इस क्षेत्र की बारीकियों को समझने के लिए बाहर निकलने का निर्णय लिया। सबसे पहले उन्होंने मोबाइल के माध्यम से बुनियादी जानकारी हासिल की और उसके बाद उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल की यात्रा की। इन राज्यों में जाकर उन्होंने मछली पालन के आधुनिक तरीकों का जमीनी अनुभव प्राप्त किया और वहां की कार्यप्रणाली को बारीकी से समझा।
मछली पालन का आधुनिक मॉडल
आज पप्पू कुमार यादव लगभग डेढ़-डेढ़ एकड़ के चार बड़े तालाबों में मछली पालन कर रहे हैं। उनके काम करने का तरीका बेहद वैज्ञानिक और व्यवस्थित है। वह बाहर से मछली का जीरा मंगवाते हैं और उसे सीधे तालाब में डालने के बजाय पहले एक अलग डैम में रखते हैं। वहां जब मछली का जीरा पूरी तरह से विकसित हो जाता है और उसकी ग्रोथ संतोषजनक हो जाती है, तब उसे मुख्य तालाब में छोड़ा जाता है। इस सावधानीपूर्ण तरीके से मछलियों के जीवित रहने की दर और उनकी विकास गति दोनों में सुधार होता है। उन्होंने बताया कि उनकी मछलियां महज 4 से 5 महीने के अंतराल में ही बिक्री के लिए तैयार हो जाती हैं।
मुनाफे का गणित और खेती से तुलना
पप्पू कुमार यादव का मानना है कि पारंपरिक कृषि की तुलना में मछली पालन में अधिक लाभ है। उनके अनुसार, वे साल में कम से कम दो बार मछलियों की फसल तैयार कर उन्हें बाजार में बेचते हैं। इस व्यवसाय की खास बात यह है कि इसमें निवेश के मुकाबले मुनाफा कहीं अधिक मिलता है, जिसके कारण अब किसान इसे एक लाभदायक विकल्प के रूप में देख रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस कार्य को शुरू करने में शुरुआत में जो तकनीक सीखी थी, वही आज उनकी कामयाबी का मुख्य आधार है।
दूसरे किसानों के लिए बने मार्गदर्शक
एक समय था जब इस क्षेत्र में पप्पू कुमार यादव इकलौते ऐसे व्यक्ति थे जो व्यावसायिक स्तर पर मछली पालन का काम कर रहे थे। लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है। उनकी सफलता को देखकर आसपास के अन्य किसान भी प्रभावित हुए हैं। वे पप्पू कुमार यादव से प्रशिक्षण ले रहे हैं और अपने खेतों में तालाब खुदवाकर मछली पालन के व्यवसाय में उतर रहे हैं। वर्तमान में उनके क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक किसान अब इस आधुनिक मछली पालन प्रणाली को अपना चुके हैं। इस बढ़ती संख्या से यह स्पष्ट है कि नई तकनीक अपनाने से न केवल पप्पू बल्कि पूरा इलाका आर्थिक समृद्धि की ओर कदम बढ़ा रहा है। वे न केवल खुद कमा रहे हैं बल्कि दूसरों को भी आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
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