55 दिन तक नहीं सुनी गई पुकार, धरने पर बैठे श्रमिक ने तोड़ा दम; अब सवालों के घेरे में जिम्मेदारी

बाड़मेर की गिरल लिग्नाइट माइंस में 55 दिन से जारी मजदूर आंदोलन के दौरान धरना स्थल पर एक श्रमिक की तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। घटना के बाद मजदूरों में भारी रोष है और निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है।

धरना स्थल पर बिगड़ी तबीयत, अस्पताल में मौत

बाड़मेर की गिरल लिग्नाइट माइंस में बीते 55 दिनों से चल रहे मजदूर आंदोलन के बीच एक दुखद घटना सामने आई है। धरना स्थल पर बैठे श्रमिक जेसाराम मेघवाल की अचानक तबीयत बिगड़ गई। उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी सांसें थम गईं।

मजदूरों में फूटा आक्रोश

जेसाराम मेघवाल की मौत की खबर मिलते ही आंदोलनरत मजदूरों में गहरा गुस्सा फैल गया। लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर डटे श्रमिकों का कहना है कि महीनों तक उनकी आवाज को अनसुना किया गया, जिसका परिणाम यह त्रासदी है।

विधायक भाटी पहुंचे अस्पताल

घटना की जानकारी मिलते ही शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी अस्पताल पहुंचे और मृतक के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया। भाटी ने प्रशासन, आरएसएमएम प्रबंधन और ठेकेदारों पर मजदूरों की मांगों की लगातार अनदेखी करने का गंभीर आरोप लगाया।

निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग

मजदूर संगठनों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई किए जाने की मांग उठाई है। श्रमिकों के बीच अब यह सवाल गहराता जा रहा है कि इतने लंबे आंदोलन के बावजूद उनकी समस्याओं के समाधान में देरी की आखिर जिम्मेदारी किसकी है।

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