भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल में प्रसूताओं की मौत का मामला: कलेक्टर जसमीत सिंह संधू ने संभाला मोर्चा, ओटी-2 बंद, हर मामले की होगी अलग-अलग जांच

भीलवाड़ा के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में पांच प्रसूताओं की मौत के बाद जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं; कलेक्टर ने ऑपरेशन थिएटर का निरीक्षण कर ओटी-2 को बंद कराया और विस्तृत जांच के आदेश दिए।

भीलवाड़ा जिला मुख्यालय पर स्थित सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, महात्मा गांधी चिकित्सालय में प्रसूताओं की मृत्यु के मामले ने प्रशासनिक और चिकित्सा जगत में हड़कंप मचा दिया है। इस गंभीर घटनाक्रम के बाद जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है और जांच की प्रक्रिया को तेज कर दिया गया है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जिला कलेक्टर जसमीत सिंह संधू ने स्वयं अस्पताल का दौरा किया। उन्होंने वहां की मौजूदा चिकित्सा व्यवस्थाओं और सुरक्षा मानकों का बारीकी से निरीक्षण किया।

कलेक्टर ने अस्पताल प्रबंधन के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की और संक्रमण नियंत्रण को लेकर कड़े निर्देश दिए। इस दौरान यह बात सामने आई कि अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर संख्या दो (ओटी-2) की कल्चर रिपोर्ट पॉजिटिव पाई गई है, जिसके बाद एहतियात के तौर पर इसे तुरंत प्रभाव से बंद कर दिया गया है। वहीं, सभी पांच प्रसूताओं की मौत के कारणों का विस्तृत और व्यक्तिगत चिकित्सा विश्लेषण किया जा रहा है।

कलेक्टर का अस्पताल दौरा और सुरक्षा समीक्षा

जिला कलेक्टर जसमीत सिंह संधू ने महात्मा गांधी चिकित्सालय पहुंचकर ऑपरेशन थिएटर और अन्य वार्डों का गहन मुआयना किया। इस निरीक्षण के दौरान उनके साथ अस्पताल के PMO (प्रमुख चिकित्सा अधिकारी) और मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल भी मौजूद रहे। कलेक्टर ने अस्पताल में साफ-सफाई, उपकरणों के स्टरलाइजेशन और मरीजों की सुरक्षा से जुड़े तमाम पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने निर्देश दिया कि मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के साथ किसी भी स्तर पर कोई समझौता नहीं किया जाना चाहिए।

ओटी-2 को किया गया बंद, ओटी-1 में सेवाएं सुचारू

अस्पताल के ऑपरेशन थिएटरों की सुरक्षा को लेकर कलेक्टर ने बताया कि नियमित जांच प्रक्रिया के तहत 29 जून को ओटी-2 से नमूने लेकर जांच के लिए भेजे गए थे। इस जांच की कल्चर रिपोर्ट पॉजिटिव आने के तुरंत बाद, उसी दिन से ओटी-2 में होने वाले सभी ऑपरेशनों को रोक दिया गया और उसे सील कर दिया गया। संक्रमण को पूरी तरह खत्म करने के लिए इस ऑपरेशन थिएटर का फ्यूमिगेशन कराया जा रहा है और सुरक्षा के सभी प्रोटोकॉल लागू किए जा रहे हैं।

इसके विपरीत, ओटी-1 की जांच रिपोर्ट पूरी तरह से सामान्य और निर्धारित चिकित्सा मानकों के भीतर पाई गई है। इसी वजह से ओटी-1 में सर्जरी और ऑपरेशन की प्रक्रिया लगातार जारी रखी गई है ताकि आने वाले मरीजों को किसी परेशानी का सामना न करना पड़े। अस्पताल में सी-सेक्शन के लिए आवश्यक जीवाणुरहित (स्टेरेलाइज्ड) उपकरणों के सेट पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं, जिससे प्रसूताओं का सुरक्षित उपचार किया जा रहा है।

सभी पांच मौतों का चिकित्सा विश्लेषण

प्रशासन और डॉक्टरों की टीम ने प्रसूताओं की मौत के सभी पांच मामलों का बहुत बारीकी से क्लिनिकल और लैब रिपोर्ट के आधार पर विश्लेषण किया है। कलेक्टर जसमीत सिंह संधू ने स्पष्ट किया कि शुरुआती जांच में इन पांचों मौतों के कारण एक-दूसरे से पूरी तरह अलग और अलग-अलग चिकित्सकीय परिस्थितियों से जुड़े पाए गए हैं:

  • पहला मामला: इस मामले में प्रसूता जब अस्पताल पहुंची थी, तब वह पहले से ही गंभीर रूप से एक्यूट गैस्ट्रोएंटेराइटिस (पेट के गंभीर संक्रमण) के लक्षणों से ग्रसित थी।
  • दूसरा मामला: इस महिला की मृत्यु का मुख्य कारण मायोकार्डियल इंफार्क्शन यानी गंभीर दिल का दौरा (हार्ट अटैक) होना सामने आया है।
  • तीसरा मामला: इस प्रसूता की मौत पल्मोनरी थ्रोम्बोएम्बोलिज्म (फेफड़ों की धमनी में रुकावट) के कारण हुई।
  • अन्य मामले: बाकी मामलों में प्रसूताओं में गर्भावस्था के दौरान होने वाले अति-उच्च रक्तचाप यानी गंभीर PIH (प्रेग्नेंसी इंड्यूस्ड हाइपरटेंशन) और HELLP सिंड्रोम जैसी बेहद जटिल और जानलेवा चिकित्सकीय परिस्थितियां पाई गई थीं।

राज्य स्तरीय विशेष टीम जल्द करेगी जांच

जिला कलेक्टर ने बताया कि प्रारंभिक चिकित्सा विश्लेषण के आधार पर इन मौतों को सीधे तौर पर अस्पताल के भीतर फैले किसी संक्रमण से जोड़ना तार्किक और उचित नहीं होगा, क्योंकि हर मरीज की स्थिति और मृत्यु का कारण भिन्न था। फिर भी, प्रशासन इस मामले को अत्यंत गंभीरता से ले रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष और विस्तृत जांच के लिए राज्य सरकार द्वारा गठित एक विशेष राज्य स्तरीय टीम भी जल्द ही भीलवाड़ा पहुंचेगी और महात्मा गांधी चिकित्सालय में पूरे मामले की गहन पड़ताल करेगी।

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