भीलवाड़ा के सरकारी अस्पताल में प्रसूताओं की मौत से हड़कंप
राजस्थान के भीलवाड़ा जिला मुख्यालय पर स्थित महात्मा गांधी अस्पताल के मातृ एवं शिशु चिकित्सालय से एक बेहद ही झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। यहां पिछले महज 6 दिनों के भीतर 5 प्रसूताओं की मौत हो जाने के बाद पूरे चिकित्सा महकमे में हड़कंप मच गया है। सबसे गंभीर बात यह है कि इन सभी प्रसूताओं की डिलीवरी सिजेरियन यानी ऑपरेशन के जरिए हुई थी। इस गंभीर घटनाक्रम के बाद अस्पताल प्रबंधन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ऑपरेशन थिएटर को पूरी तरह से बंद कर दिया है और पूरे मामले की तह तक जाने के लिए उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।
जांच के लिए वरिष्ठ डॉक्टरों की कमेटी गठित
इस दुखद मामले को लेकर मृत महिलाओं के परिजनों में भारी आक्रोश है और उन्होंने सीधे तौर पर अस्पताल के डॉक्टरों पर लापरवाही बरतने के आरोप लगाए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल ने तुरंत हरकत में आते हुए 6 सदस्यीय वरिष्ठ डॉक्टरों की एक जांच कमेटी का गठन किया है जो इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करेगी। इसी कड़ी में शुक्रवार को जिले के पोटला गांव की रहने वाली 32 वर्षीय संगीता जीनगर की तबीयत अचानक बहुत ज्यादा बिगड़ गई। उन्हें तुरंत मेडिकल ICU में स्थानांतरित किया गया, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सरकार को घेरा
प्रसूताओं की इस तरह लगातार हुई मौतों के बाद राजस्थान की सियासत भी गरमा गई है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस दर्दनाक घटना पर गहरा दुख जताते हुए सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल में केवल 6 दिनों के भीतर 5 प्रसूताओं की मृत्यु अत्यंत हृदयविदारक और बेहद चिंताजनक है। शोक संतप्त परिवारों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री ने आगे गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि ऑपरेशन थिएटर (OT) में संक्रमण की रिपोर्ट पॉजिटिव होने के बावजूद वहां लगातार सिजेरियन ऑपरेशन किए जाते रहे। उन्होंने अस्पताल की बदहाल व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि करीब 30 से 40 ऑपरेशनों के बीच महज 5 सर्जिकल सेट का ही उपलब्ध होना सीधे तौर पर घोर लापरवाही और बदहाल चिकित्सा व्यवस्था को दर्शाता है। कोटा, बीकानेर और जोधपुर के बाद अब भीलवाड़ा की यह स्थिति विचलित करने वाली है। उन्होंने पूछा कि क्या भाजपा सरकार ने राजस्थान को भगवान भरोसे छोड़ दिया है? एक के बाद एक आ रही ऐसी घटनाएं दिखाती हैं कि सरकार का इस सबसे कोई मतलब नहीं है। उन्होंने मांग की कि भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय को तुरंत अपनी एक विशेषज्ञ टीम भेजकर यहां की जांच करानी चाहिए जिससे प्रसूताओं की जान बचाई जा सके।
अस्पताल प्रशासन का पक्ष और PMO की सफाई
अशोक गहलोत के इन तीखे आरोपों और दावों के बाद अस्पताल प्रबंधन भी बचाव की मुद्रा में आ गया है। महात्मा गांधी अस्पताल के PMO डॉक्टर अरुण गौड ने संक्रमण की बात से पूरी तरह इनकार किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पांचों महिलाओं की मौत के मामलों में संक्रमण की कोई पुष्टि नहीं हुई है। हर मरीज की मौत अलग-अलग स्वास्थ्य कारणों से हुई है, जिसमें किसी महिला का हीमोग्लोबिन स्तर बहुत कम होना तो किसी अन्य को पहले से ही दूसरी बीमारियां होना शामिल है।
PMO ने बताया कि अस्पताल का OT पूरी तरह से नियमों के तहत संचालित किया जाता है। उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि:
- हमने सभी विभागाध्यक्षों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की है।
- OT में एकदम जमीनी स्तर पर बेहतरीन कार्य सुनिश्चित करने के लिए नर्सिंग स्टाफ को विशेष ट्रेनिंग भी दी जाती है।
- ऑपरेशन थिएटर को किसी भी प्रकार के संक्रमण से पूरी तरह सुरक्षित रखने के लिए समय-समय पर लगातार सैंपलिंग ली जाती है।
- तीन दिन पहले ही हमने मुख्यालय में सैंपल जांच के लिए भेजे थे, जहां गायनी OT का सैंपल फेल आने पर हमने एहतियात के तौर पर तुरंत उस OT को पूरी तरह बंद कर दिया है।
https://www.indiatv.in/rajasthan/five-women-died-after-childbirth-within-six-days-at-govt-hospital-in-bhilwara-2026-07-11-1230631