अयोध्या राम मंदिर प्रबंधन में बड़े सुधार की तैयारी, यूपी में दलित राजनीति पर छिड़ा घमासान और महाराष्ट्र का सियासी सस्पेंस

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के बाद प्रशासनिक व्यवस्था को कड़ा किया जा रहा है। दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश में दलित वोटों की जंग तेज हो गई है, जबकि महाराष्ट्र में शरद पवार की मुख्यमंत्री से मुलाकात ने नए कयासों को जन्म दिया है।

अयोध्या राम मंदिर: चोरी के खुलासे के बाद प्रबंधन में बड़े सुधार की तैयारी

अयोध्या में प्रभु श्री राम के भव्य मंदिर में चढ़ावे की चोरी का सनसनीखेज मामला सामने आने के बाद अब वहां की व्यवस्थाओं को नए सिरे से दुरुस्त करने की कवायद तेज हो गई है। राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कामकाज और उसके प्रशासनिक ढांचे में आमूल-चूल परिवर्तन करने का खाका तैयार किया जा रहा है। इस पूरी कवायद का उद्देश्य मंदिर की सुरक्षा, पारदर्शिता और दान में मिलने वाली धनराशि की सुरक्षा को पूरी तरह पुख्ता करना है।

इसके लिए ट्रस्ट के डीड और नियमों में बदलाव किए जा रहे हैं। वर्तमान नियमों में किसी भी मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी CEO की नियुक्ति का कोई कानूनी प्रावधान नहीं था। इसलिए ट्रस्ट के नियमों में संशोधन किया जा रहा है ताकि एक पेशेवर प्रशासनिक अधिकारी को CEO के रूप में तैनात किया जा सके। इसके साथ ही, ट्रस्ट के अध्यक्ष, महासचिव, कोषाध्यक्ष और अन्य महत्वपूर्ण सदस्यों की जिम्मेदारियां और जवाबदेही भी नए सिरे से तय की जाएंगी।

चोरी के इस खुलासे के बाद देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की लापरवाही भी खुलकर सामने आई है। बैंक की सुरक्षा और लेन-देन की निगरानी पर सवाल खड़े होने के बाद अब ट्रस्ट ने बड़ा फैसला लिया है। अब चढ़ावे की भारी-भरकम राशि को सिर्फ एक बैंक में रखने के बजाय SBI के अलावा अन्य बड़े बैंकों में भी रोटेशन के आधार पर जमा कराया जाएगा।

राम मंदिर के लिए देश की सर्वोच्च अदालत में लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता और ट्रस्ट के संस्थापक सदस्य के. पारासरन को नियमों में सुधार की इस अहम जिम्मेदारी को पूरा करने का काम सौंपा गया है। वह आगामी 22 जुलाई को होने वाली ट्रस्ट की बैठक में अपने महत्वपूर्ण सुझावों का मसौदा पेश करेंगे। इसी बैठक में तीन सदस्यों की एक विशेष समिति मंदिर के नए CEO के पद के लिए तीन योग्य नामों का प्रस्ताव रखेगी, जिस पर अंतिम फैसला इसी बैठक में लिया जाएगा।

इन्हीं विवादों के बीच, सिंधी समाज द्वारा दान की गई चांदी की ईंटों को लेकर भी ट्रस्ट ने स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है। सिंधी समाज की ओर से विश्व सिंधी सेवा संगम के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष राजू मनवानी ने 26 जनवरी 2021 को ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को 200 किलो वजन की चांदी की ईंटें सौंपी थीं। हाल ही में चोरी की खबरों के बाद राजू मनवानी ने इन ईंटों की सुरक्षा को लेकर अपनी चिंता जाहिर की थी।

इस शंका का समाधान करते हुए ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने शुक्रवार को सिंधी सेवा संगम के पदाधिकारियों को लिखित प्रमाण और रिकॉर्ड के साथ पूरी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि चांदी की एक-एक किलो की सभी 200 ईंटें पूरी तरह सुरक्षित हैं और बकायदा चढ़ावे के रजिस्टर में दर्ज हैं। इन ईंटों को अगस्त 2024 में मिंट कॉरपोरेशन की हैदराबाद शाखा में भेजा गया था, जहां इन्हें पिघलाकर सुरक्षा के लिहाज से 20-20 किलो की बड़ी ईंटों में बदल दिया गया। अब ये ईंटें अयोध्या में स्टेट बैंक के लॉकर में पूरी सुरक्षा के साथ रखी हुई हैं। इस पारदर्शी स्पष्टीकरण के बाद राजू मनवानी ने राम मंदिर ट्रस्ट का आभार जताया है।

अब अयोध्या मंदिर में सुरक्षा और प्रबंधन का एक नया ढांचा खड़ा हो रहा है। जल्द ही मंदिर को नया CEO मिल जाएगा, वित्तीय लेन-देन के लिए बैंकों की संख्या बढ़ाई जा रही है, और आंतरिक सुरक्षा तथा विजिलेंस की व्यवस्था को बेहद कड़ा किया जा रहा है। चोरी के आरोपियों से नकदी बरामद कर ली गई है और चोरी के पैसे से खरीदी गई संपत्तियों को कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। खोई हुई सोने की रामचरितमानस भी बरामद कर ली गई है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद इस बात पर विशेष ध्यान दे रहे हैं कि मंदिर की व्यवस्थाओं में कोई कमी न रहे, ताकि आगामी विधानसभा चुनाव में विपक्ष इस संवेदनशील मुद्दे का राजनीतिक लाभ न उठा सके।

उत्तर प्रदेश की दलित राजनीति: मायावती और चंद्रशेखर आजाद के बीच छिड़ा घमासान

उत्तर प्रदेश की सियासत में दलित वोटों को अपने पाले में बनाए रखने की जंग अब बेहद तीखी हो गई है। एक लंबे अंतराल के बाद बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती मीडिया के सामने आईं और उन्होंने सीधे तौर पर चंद्रशेखर आजाद जैसे युवा दलित नेताओं पर तीखा हमला बोला। मायावती ने चंद्रशेखर का नाम लिए बिना उन्हें दलितों का सबसे बड़ा दुश्मन करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ स्वार्थी तत्व केवल अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने और दलित वोटों को हथियाने के लिए दलित बस्तियों में जाकर घड़ियाली आंसू बहाते हैं। मायावती के अनुसार, ये नेता गरीबों की भलाई के लिए जमीनी स्तर पर कुछ नहीं करते, बल्कि उल्टे उन्हें कानूनी पचड़ों में फंसाकर खुद मौके से गायब हो जाते हैं।

यह पूरा विवाद मेरठ में हुई एक दलित छात्रा ललिता गौतम की दर्दनाक हत्या के बाद शुरू हुआ। इस घटना के विरोध में भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने मेरठ में उग्र प्रदर्शन किया, जिसके बाद मेरठ के SSP ने प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग किया और थप्पड़ तक जड़ दिए। इस घटना के बाद शुक्रवार को भीम आर्मी के प्रमुख और सांसद चंद्रशेखर आजाद रावण पीड़ित परिवार से मुलाकात करने के लिए मेरठ रवाना हुए। हालांकि, पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया और भारी गहमागहमी के बाद करीब दो घंटे की देरी से उन्हें मेरठ जाने की अनुमति दी गई।

मायावती के तीखे बयानों का जवाब देने में चंद्रशेखर आजाद ने भी देरी नहीं की। उन्होंने पलटवार करते हुए कहा कि अगर मायावती को सचमुच दलित समाज के दर्द और आंसुओं की जरा भी परवाह होती, तो वह अपने घर के बंद कमरे में बैठकर केवल सोशल मीडिया या कागजी बयान जारी नहीं करतीं। उन्हें मेरठ आकर खुद पीड़ित परिवार के आंसू पोंछने चाहिए थे। उन्होंने कहा कि मेरठ में उत्तर प्रदेश की एक बेटी की हत्या बेहद दुखद और निंदनीय है, और इस पर राजनीति होना स्वाभाविक है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मायावती को अब यह स्पष्ट रूप से दिखने लगा है कि उनका पारंपरिक दलित वोट बैंक धीरे-धीरे खिसककर चंद्रशेखर आजाद और अन्य राजनीतिक दलों की तरफ बढ़ रहा है। यही वजह है कि उन्होंने चंद्रशेखर पर हमला बोला है। हालांकि, मायावती की सबसे बड़ी कमजोरी यह बन चुकी है कि वह केवल लिखित बयान पढ़कर राजनीति करना चाहती हैं। वह अब सड़कों पर उतरकर जनता के बीच संघर्ष करती नहीं दिखतीं और अपने समर्थकों को भी सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करने से मना करती हैं। इसी निष्क्रियता का लाभ उठाकर नए दलित नेता उभरे हैं, लेकिन मायावती अपनी इस राजनीतिक शैली को बदलने के लिए तैयार नहीं हैं।

महाराष्ट्र का सियासी ड्रामा: क्या शरद पवार एनडीए के साथ जा सकते हैं?

महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों एक नया और बेहद चौंकाने वाला सस्पेंस गहरा गया है। महा विकास अघाड़ी के सहयोगी दलों, विशेष रूप से उद्धव ठाकरे की शिवसेना और कांग्रेस के नेताओं के बीच अचानक भारी बेचैनी और तनाव देखने को मिल रहा है। इस तनाव की मुख्य वजह यह चर्चा है कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता शरद पवार एक बार फिर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी NDA के साथ जा सकते हैं।

इस चर्चा को हवा तब मिली जब गुरुवार को शरद पवार ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मुलाकात की। चौंकाने वाली बात यह रही कि दोनों नेताओं के बीच करीब पांच मिनट तक बिल्कुल अकेले में गोपनीय बातचीत हुई। इस गुप्त मुलाकात की खबर जैसे ही बाहर आई, महाराष्ट्र की राजनीति में कयासों का बाजार गर्म हो गया। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने तुरंत इस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शरद पवार महाराष्ट्र के सबसे कद्दावर, वरिष्ठ और सम्मानित नेता हैं। यदि वे महायुति सरकार के साथ आते हैं, तो भाजपा उनका खुले दिल से स्वागत करेगी। एकनाथ शिंदे की शिवसेना के प्रवक्ताओं ने भी टिप्पणी करते हुए कहा कि शरद पवार राजनीति के चतुर खिलाड़ी हैं और वे हवा का रुख भांपने में माहिर हैं। यदि वे महायुति का हिस्सा बनते हैं, तो इसमें किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए।

इस मुलाकात पर उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना पूरी तरह भड़क गई है। पार्टी के मुखर नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि शरद पवार जैसे वरिष्ठ नेता को किसी भी सामान्य स्थान पर मुलाकात करनी चाहिए थी, उन्हें सीधे मंत्रालय में एकनाथ शिंदे के केबिन में जाने की क्या आवश्यकता थी? राउत ने दावा किया कि इस तरह के कदमों से शरद पवार की राजनीतिक विश्वसनीयता को भारी ठेस पहुंचती है। उन्होंने बेहद कड़े शब्दों में कहा कि यदि शरद पवार को उन्हीं लोगों के साथ बैठना है जिन्हें वे गद्दार कहते हैं, तो उन्हें भविष्य में अपने साथ हुए धोखे और पार्टी टूटने का रोना नहीं रोना चाहिए।

इस विवाद पर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने सफाई देते हुए कहा कि महाराष्ट्र की महान संस्कृति और परंपरा रही है कि यदि कोई वरिष्ठ नेता आपके द्वार पर आता है, तो उसका पूरा आदर-सत्कार किया जाना चाहिए। शरद पवार एक सम्मानित नेता हैं, इसलिए उनके साथ शिष्टाचार का व्यवहार किया गया। दूसरी ओर, आदित्य ठाकरे ने इस पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि राज्यसभा चुनाव के दौरान उनकी पार्टी ने केवल शरद पवार के सम्मान में अपनी सीट छोड़ दी थी। ऐसे में अगर शरद पवार उन्हीं लोगों के साथ बैठकर बातचीत करेंगे, तो दुख होना लाजिमी है। राजनीति में शरद पवार के रिश्ते हर दल के नेताओं के साथ हैं, इसलिए उनकी मुलाकातों को केवल दल-बदल के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। लेकिन उद्धव ठाकरे की सेना को शिंदे का नाम सुनते ही मिर्ची लग जाती है, वे यह भी भूल जाते हैं कि शरद पवार राज्य के सबसे अनुभवी प्रशासक हैं। शरद पवार की राजनीतिक और प्रशासनिक क्षमता अद्वितीय है, लेकिन उनके फैसलों ने हमेशा सहयोगियों को असमंजस में डाला है।

खाद्य पदार्थों में जानलेवा मिलावट: क्या दोषियों को मिलनी चाहिए मौत की सजा?

देश के आम नागरिकों की सेहत और जिंदगी से खिलवाड़ करने वाली एक बेहद परेशान करने वाली खबर गुजरात से सामने आई है, जो हर किसी को सावधान करने वाली है। किसी भी होटल, ढाबे या रेस्टोरेंट में खाना खाने के बाद जो हरी सौंफ माउथ फ्रेशनर के रूप में परोसी जाती है, वह आपकी सेहत के लिए बेहद खतरनाक और जहरीली हो सकती है। गुजरात के मेहसाणा जिले में खाद्य सुरक्षा विभाग ने छापेमारी कर 26 हजार किलोग्राम से अधिक जहरीली सौंफ जब्त की है। यह सौंफ बाहर से देखने में एकदम ताजी और गहरे हरे रंग की दिखती थी, लेकिन जांच में पता चला कि इस पर कपड़ा रंगने वाले बेहद जहरीले रासायनिक रंगों की परत चढ़ाई गई थी।

मेहसाणा के ऊंझा औद्योगिक क्षेत्र में स्थित इस अवैध कारखाने में खराब और सड़ी हुई सौंफ को चमकाने और रंगने का धंधा धड़ल्ले से चल रहा था। यहां से यह जहरीली सौंफ पैक करके पूरे देश के बाजारों और होटलों में सप्लाई की जाती थी। जांच अधिकारियों ने जब कारखाने के भीतर बोरों को खोला, तो वे हैरान रह गए। बोरों के भीतर रखी सौंफ पूरी तरह सड़ चुकी थी, उसमें फफूंद लग चुकी थी और कीड़े रेंग रहे थे। मिलावट का आलम यह था कि जिन बोरों में सौंफ रखी गई थी, वे भी हरे रंग के रसायनों से सराबोर हो चुके थे और कमरे की दीवारें पूरी तरह हरी हो चुकी थीं। पूछताछ में फैक्टरी मालिक ने कबूल किया कि वह बाजार से कौड़ियों के दाम पर सड़ी हुई और रिजेक्टेड सौंफ खरीदता था और फिर उसे आकर्षक दिखाने के लिए कपड़ा उद्योग में इस्तेमाल होने वाले खतरनाक रासायनिक हरे रंग से रंग देता था।

यह केवल सौंफ तक ही सीमित नहीं है। कुछ ही दिनों पहले अहमदाबाद के 100 से अधिक होटलों और आलीशान रेस्टोरेंट्स पर खाद्य विभाग ने अचानक छापेमारी की थी। इन होटलों में परोसे जाने वाले पनीर के सैंपल लेकर जब सरकारी लैब में जांच कराई गई, तो चौंकाने वाला सच सामने आया। इनमें से किसी भी होटल में शुद्ध दूध से बने असली पनीर का इस्तेमाल नहीं हो रहा था, बल्कि उसकी जगह केमिकल और पाम ऑयल से बना सिंथेटिक पनीर परोसा जा रहा था। हरी सब्जियों को ताजी दिखाने के लिए रासायनिक रंगों में डुबोकर बेचने की खबरें भी लगातार आती रहती हैं। यह पूरे देश के स्वास्थ्य के लिए एक बेहद गंभीर और जानलेवा संकट है। दुनिया के कई विकसित देशों में मानव जीवन के साथ इस तरह का खिलवाड़ करने वाले मिलावटखोरों के लिए मौत की सजा का कड़ा कानूनी प्रावधान है। हमारे देश भारत में भी अब वक्त आ गया है जब मिलावटखोरी को हत्या के प्रयास के समान मानते हुए अपराधियों के लिए फांसी की सजा का कड़ा कानून बनाया जाना चाहिए ताकि लोगों की जिंदगी सुरक्षित रह सके।

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