आमतौर पर बारिश के मौसम में जामुन खाना हर कोई पसंद करता है। जामुन स्वाद में लाजवाब होने के साथ-साथ सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस जामुन के गूदे को खाने के बाद आप उसकी गुठली को बेकार समझकर फेंक देते हैं, वह असल में कई गंभीर बीमारियों की अचूक दवा है? जी हां, आयुर्वेद में जामुन की गुठली को सेहत का खजाना माना गया है। मधुमेह से लेकर उच्च रक्तचाप और पाचन संबंधी समस्याओं को दूर करने में इसका कोई सानी नहीं है।
सरैया मन वन्य जीव स्थली: जामुन का ऐतिहासिक और प्राकृतिक गढ़
बिहार के पश्चिम चम्पारण जिले के बैरिया प्रखंड में स्थित सरैया मन वन्य जीव स्थली अपने आप में बेहद खास है। यह क्षेत्र अपने घने जंगलों और जामुन के पेड़ों के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। करीब 850 हेक्टेयर के विशाल भूभाग में फैले इस हरे-भरे जंगल में जामुन की दर्जनों अलग-अलग किस्में पाई जाती हैं। हर साल जब जामुन का मौसम आता है, तो यहां बहुत बड़े पैमाने पर जामुन की पैदावार और उसकी हार्वेस्टिंग की जाती है।
स्थानीय बुजुर्गों और निवासियों के अनुसार, इस वन क्षेत्र का इतिहास और भी दिलचस्प है। एक समय था जब यहां की प्रसिद्ध सरैया झील का पानी बेहद चमत्कारी और औषधीय माना जाता था। उस दौरान पेड़ पर पके हुए जामुन सीधे टूटकर झील के पानी में गिर जाते थे। इस वजह से जामुन के सारे औषधीय गुण प्राकृतिक रूप से झील के पानी में घुल जाते थे। झील का पानी इतना गुणकारी हो जाता था कि लोग इसे दूर-दूर से खरीदने आते थे और स्वास्थ्य लाभ के लिए इसका सेवन करते थे।
फल जितना ही असरदार है इसका बीज: आयुर्वेद विशेषज्ञ की राय
बेतिया के प्रसिद्ध आयुर्वेदाचार्य डॉ. भुवनेश पांडे, जो पिछले करीब चार दशक से आयुर्वेद चिकित्सा के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, बताते हैं कि लोग अक्सर जामुन की गुठली के महत्व को नहीं समझ पाते हैं। उन्होंने बताया कि जामुन का फल जितना स्वास्थ्यवर्धक होता है, उसके बीज भी औषधीय गुणों के मामले में उतने ही शक्तिशाली होते हैं। हालांकि, जानकारी के अभाव में लोग जामुन खाने के बाद बीजों को कूड़े में डाल देते हैं।
डॉ. पांडे के अनुसार, जामुन की गुठली का लाभ उठाने का सबसे आसान तरीका यह है कि इन बीजों को अच्छी तरह से साफ कर लिया जाए। इन्हें पानी से धोने के बाद धूप में सुखा लेना चाहिए। जब ये पूरी तरह सूख जाएं, तो इन्हें पीसकर एक महीन चूर्ण तैयार कर लें। यह घरेलू चूर्ण कई तरह की शारीरिक व्याधियों को दूर करने में बेहद कारगर सिद्ध होता है।
जलन की समस्या और पाचन तंत्र में कमाल का असर
यदि कोई व्यक्ति सिर या घुटनों में तेज जलन की समस्या से परेशान रहता है, तो उसके लिए जामुन की गुठली का लेप काफी फायदेमंद हो सकता है। डॉ. भुवनेश पांडे बताते हैं कि जामुन के बीजों को पीसकर उसका लेप बना लें। इस लेप को किसी सूती कपड़े पर लगाकर प्रभावित अंग या स्थान पर बांधने से जलन में तुरंत और काफी हद तक राहत मिलती है।
इसके अलावा, जामुन की गुठली का चूर्ण हमारे पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में बहुत मदद करता है। इसमें प्रचुर मात्रा में फाइबर पाया जाता है। फाइबर की यह उच्च मात्रा कब्ज की पुरानी समस्या को ठीक करने और मल त्याग की प्रक्रिया को आसान बनाने में बहुत सहायक होती है। यह हमारे पेट की कार्यप्रणाली को बेहतर कर पाचन को मजबूत बनाता है।
कोलेस्ट्रॉल को संतुलित करने में मददगार
आजकल की बदलती जीवनशैली में कोलेस्ट्रॉल का असंतुलन एक आम समस्या बन चुका है। जामुन के बीजों में कार्मिनेटिव गुण पाए जाते हैं, जो पेट फूलने की समस्या, अपच और पेट की अन्य तकलीफों को कम करने में मददगार हैं। इसके साथ ही, यदि इसका रोजाना संतुलित मात्रा में सेवन किया जाए, तो यह शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करने का काम करता है। यह रक्त में मौजूद हानिकारक कोलेस्ट्रॉल यानी LDL को कम करने में मदद करता है, जबकि सेहत के लिए फायदेमंद माने जाने वाले अच्छे कोलेस्ट्रॉल यानी HDL के स्तर को बढ़ावा देता है।
ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर को रखेगा काबू में
उच्च रक्तचाप और डायबिटीज के मरीजों के लिए जामुन के बीज किसी संजीवनी से कम नहीं हैं। डॉ. पांडे के मुताबिक, इन बीजों में विशेष रूप से हाइपोटेंसिव गुण पाए जाते हैं, जो बढ़े हुए रक्तचाप को सामान्य बनाए रखने में मदद करते हैं। इसके अलावा, जामुन की गुठली में जम्बोलिन और हाइपोग्लाइसेमिक प्रभाव उत्पन्न करने वाले तत्व होते हैं। ये तत्व शरीर में रक्त शर्करा के स्तर को अचानक बढ़ने से रोकते हैं और शरीर के भीतर इंसुलिन के स्राव व उसके स्तर को सुधारने में बेहद सक्रिय भूमिका निभाते हैं।
हालांकि, आयुर्वेदाचार्य ने एक महत्वपूर्ण सावधानी भी बरतने को कहा है। उनका कहना है कि भले ही जामुन की गुठली औषधीय गुणों से भरपूर है, लेकिन किसी भी बीमारी के इलाज के तौर पर इसका नियमित सेवन शुरू करने से पहले हमेशा किसी योग्य चिकित्सक या आयुर्वेद विशेषज्ञ से परामर्श जरूर लेना चाहिए। सही खुराक और सही मार्गदर्शन से ही इसका पूरा और सुरक्षित लाभ उठाया जा सकता है।
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