रेशम नगरी की खास पहचान
भागलपुर को देश में रेशम शहर के तौर पर जाना जाता है। यहां के बुनकर अपनी कलाकारी के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हैं। भागलपुर में सिल्क, लिनन, कॉटन और स्टेपल समेत कई तरह के कपड़ों का निर्माण बड़े पैमाने पर होता है। यहां की साड़ियां न केवल देखने में आकर्षक होती हैं, बल्कि पहनने में भी काफी आरामदायक और सहज महसूस होती हैं। यही कारण है कि भागलपुर की साड़ियों की मांग केवल भारत के विभिन्न राज्यों में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी खूब बनी हुई है।
फिर से लौट आया है बाटिक प्रिंट का दौर
फैशन की दुनिया में पुराने दौर का आकर्षण फिर से लौट रहा है। कभी बिहार और बंगाल की पहचान मानी जाने वाली बाटिक प्रिंट शैली बीच में लुप्त सी हो गई थी। एक लंबा समय ऐसा भी आया जब बाजार से यह डिजाइन पूरी तरह गायब हो गया, लेकिन आज की पीढ़ी को फिर से यह पारंपरिक डिजाइन काफी पसंद आ रहा है। नए-नए डिजाइनों और रंगों के साथ बाटिक प्रिंट वाली साड़ियां फिर से चलन में हैं और बाजार में इनकी जबरदस्त मांग देखी जा रही है।
साड़ी निर्माण की लंबी प्रक्रिया
किसी भी साड़ी को अंतिम रूप देने के पीछे बुनकरों की कड़ी मेहनत छिपी होती है। भागलपुर के कारीगरों के अनुसार, एक बेहतरीन साड़ी बनाने की प्रक्रिया काफी लंबी और श्रमसाध्य होती है। सबसे पहले धागों का चयन किया जाता है और उसके बाद उनकी विशेष तरीके से रंगाई की जाती है। रंगने के बाद धागों को सुखाया जाता है और फिर उन्हें लूम यानी करघे पर चढ़ाया जाता है। इसके बाद कपड़े की बुनाई होती है और फिर उसे फिनिशिंग के दौर से गुजरना पड़ता है। अंत में साड़ी को माड़ी लगाकर उसे विशेष डिजाइन देने का कार्य किया जाता है। जो साड़ी ग्राहकों को बाजार में बहुत ही सुंदर और तैयार अवस्था में मिलती है, उसके पीछे बुनकरों के पसीने की पूरी कहानी छिपी होती है।
कैसे तैयार होता है खास बाटिक प्रिंट
बाटिक प्रिंट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे किसी भी तरह की मशीन से तैयार नहीं किया जाता है। यह पूरी तरह से हस्तकला का नमूना है। इसमें डिजाइन उकेरने के लिए फोम, लकड़ी या फिर मोम से बने विशेष सांचों का इस्तेमाल किया जाता है। कलाकार इन सांचों को अलग-अलग डिजाइनों में ढालते हैं और फिर कपड़े पर प्रिंट उकेरा जाता है। इस प्रक्रिया में बारीकी और धैर्य की बहुत जरूरत होती है, जिसके बिना यह प्रिंट निखर कर नहीं आता है। जिस तरह से यह प्रिंट कभी बिहार और बंगाल में काफी मशहूर था, ठीक उसी तरह आज भी यह अपने नए और आधुनिक अवतार के साथ बाजार में अपनी जगह बनाने में कामयाब हो गया है।
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