पहाड़ों की ताजी ट्राउट मछली की बढ़ती मांग
बागेश्वर जिले की कनलगढ़ घाटी में स्थित लीती गांव इन दिनों अपनी विशेष ट्राउट मछली के कारण सुर्खियों में है। इस गांव का भौगोलिक परिवेश और यहां का लगातार बहने वाला शीतल व स्वच्छ जल ट्राउट मछली के पालन के लिए बेहद उपयुक्त है। यही कारण है कि स्थानीय स्तर पर तैयार की गई यह मछली अब केवल बागेश्वर तक सीमित नहीं है, बल्कि हल्द्वानी और दिल्ली जैसे बड़े शहरों के बाजारों में भी अपनी धाक जमा रही है।
आईटीबीपी के जवानों की पसंद
भारतीय सीमा सुरक्षा में तैनात भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के जवान भी इस मछली के स्वाद और गुणवत्ता के मुरीद हो चुके हैं। स्थानीय निवासी धीरज उपाध्याय के अनुसार, पारंपरिक कृषि की तुलना में ट्राउट मछली का व्यवसाय काफी अधिक मुनाफा देने वाला साबित हो रहा है। इस मछली की बाजार में कीमत लगभग 500 रुपये प्रति किलो तय की गई है।
सेहत के लिए भी फायदेमंद
इस मछली की लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण इसकी ताजगी और बेहतरीन गुणवत्ता है, जिसके चलते पूरे साल इसकी मांग बनी रहती है। स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने वाले लोग विशेष रूप से ट्राउट मछली को अपनी डाइट में शामिल कर रहे हैं। इसके मुख्य लाभ निम्नलिखित हैं:
- इसमें प्रोटीन की प्रचुर मात्रा पाई जाती है।
- इसमें वसा का स्तर अपेक्षाकृत काफी कम होता है।
- पहाड़ी पानी में पले होने के कारण यह पूरी तरह से शुद्ध और ताजा होती है।
https://hindi.news18.com/news/uttarakhand/bageshwar-leeti-village-trout-itbp-rs-500-per-kg-local18-10646716.html