दतिया में बीजेपी के सामने खड़ा हुआ सियासी संकट
मध्य प्रदेश की राजनीति में दतिया विधानसभा उपचुनाव से ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी के भीतर बड़ा राजनीतिक बवाल मच गया है। पार्टी नेतृत्व ने इस बार पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा पर भरोसा न जताते हुए आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारने का निर्णय लिया है। जैसे ही आशुतोष तिवारी के नाम की घोषणा हुई, वैसे ही दतिया में विरोध की लहर दौड़ गई। नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों का गुस्सा सड़कों पर साफ दिखाई दे रहा है, जहां वे पार्टी के इस फैसले का कड़ा विरोध कर रहे हैं।
NH-44 पर लगा लंबा जाम
टिकट कटने की खबर फैलते ही नरोत्तम मिश्रा के हजारों समर्थक सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने एनएच-44 पर चक्का जाम कर दिया, जिससे यातायात पूरी तरह बाधित हो गया और कई किलोमीटर तक गाड़ियों की लंबी कतारें लग गईं। समर्थकों ने अपना गुस्सा जाहिर करने के लिए जगह-जगह टायर जलाए और नरोत्तम मिश्रा के पक्ष में जोरदार नारेबाजी की। दतिया के कई हिस्सों में दुकानें बंद करवा दी गईं, जिससे जनजीवन पूरी तरह प्रभावित रहा। प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि यदि पार्टी नेतृत्व ने अपने इस फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया और नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं दिया गया, तो उनका यह विरोध प्रदर्शन और भी तीव्र हो जाएगा।
संगठन में सामूहिक इस्तीफे से हड़कंप
दतिया में बीजेपी को सबसे बड़ा झटका सांगठनिक स्तर पर लगा है। विरोध स्वरूप भाजपा जिलाध्यक्ष रघुवीर शरण कुशवाह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके साथ ही पूरी जिला कार्यकारिणी ने भी सामूहिक रूप से पद छोड़ने का ऐलान कर दिया है। यह इस्तीफा केवल जिला स्तर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पार्टी के सभी पार्षदों ने भी अपना पद छोड़ दिया है, जिसके चलते दतिया में अब भाजपा का पूरा ढांचा लगभग बिखर गया है। रघुवीर सिंह कुशवाह ने अपने आधिकारिक पत्र में स्पष्ट किया है कि यह सामूहिक इस्तीफा उन कार्यकर्ताओं की भावनाओं का सम्मान है जिन्होंने जमीनी स्तर पर बूथ-बूथ जाकर पार्टी के लिए कठिन मेहनत की थी। उन्होंने कहा कि उपचुनाव में लिया गया एकतरफा फैसला कार्यकर्ताओं की अनदेखी करता है।
इस्तीफे के पत्र में क्या है खास
भाजपा जिलाध्यक्ष रघुवीर सिंह कुशवाह द्वारा जारी पत्र में इस्तीफे की एक लंबी सूची शामिल है। इसमें जिला पंचायत अध्यक्ष, जनपद अध्यक्ष, नगर पालिका दतिया के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के साथ-साथ बड़ौनी पंचायत के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के नाम भी शामिल हैं। इसके अलावा दतिया विधानसभा के अंतर्गत आने वाले 6 मंडलों के अध्यक्ष, सभी मोर्चों के अध्यक्ष, दतिया और बड़ौनी के सभी पार्षदगण तथा 281 बूथों के अध्यक्ष एवं उनकी पूरी कार्यकारिणी ने एक साथ इस्तीफा देने की घोषणा की है। इस घटनाक्रम के बाद दतिया में भाजपा संगठन विहीन स्थिति में आ गई है। जिलाध्यक्ष ने बताया कि उन्होंने इस पूरी स्थिति से प्रदेश नेतृत्व और संभाग के प्रभारी को अवगत करा दिया है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि शीर्ष नेतृत्व इस विषय पर गंभीरता से विचार करेगा और कार्यकर्ताओं की मेहनत को देखते हुए उचित निर्णय लेगा।
क्यों हो रहा है दतिया में उपचुनाव
दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव की स्थिति साल 2023 के विधानसभा चुनाव के बाद पैदा हुई। उस चुनाव में नरोत्तम मिश्रा को कांग्रेस के राजेंद्र भारती के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। बाद में, बैंक एफडी से जुड़े धोखाधड़ी के एक मामले में उन्हें तीन साल की सजा सुनाई गई, जिसके बाद तकनीकी कारणों से उनकी विधायकी समाप्त हो गई। इसी रिक्त हुई सीट को भरने के लिए अब उपचुनाव कराए जा रहे हैं, जिसमें बीजेपी ने स्थानीय नेता आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है, जो अब पार्टी के भीतर ही भारी आंतरिक कलह का कारण बन गया है।
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