हिमाचल में बारिश का तांडव और तबाही
हिमाचल प्रदेश इस समय भारी बारिश की मार झेल रहा है, जिससे पूरे राज्य का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कुल्लू जिले के आनी क्षेत्र के चवाई में पहाड़ से पत्थर गिरने की चपेट में आने से एक व्यक्ति की दुखद मौत हो गई है। इस घटना की पुष्टि स्थानीय प्रधान हंसा वर्मा ने की है। बारिश के कारण न केवल कुल्लू, बल्कि पूरे प्रदेश में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। 10 जुलाई की सुबह 10 बजे तक के आंकड़ों के अनुसार, पूरे राज्य में कुल 124 सड़कें यातायात के लिए बंद कर दी गई हैं। इसके अतिरिक्त, 442 बिजली ट्रांसफार्मर ठप पड़े हैं और 19 पेयजल योजनाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं, जिससे आम जनता को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
सड़क दुर्घटनाएं और भूस्खलन की भयावह स्थिति
सोलन जिले में भी कुदरत का कहर देखने को मिला। शुक्रवार की सुबह नरवाड़ गांव के नजदीक एक इनोवा कार पर पहाड़ी से अचानक भारी मलबा और पत्थर गिर गए। इस दर्दनाक हादसे में कार में सवार पांच लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनमें तीन महिलाएं भी शामिल हैं। घायलों में से दो की हालत बेहद गंभीर बताई जा रही है। वहीं, राजधानी शिमला की बात करें तो मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास 'ओक ओवर' के पास एक विशाल पेड़ गिरने से अफरा-तफरी मच गई। पेड़ गिरने के कारण बिजली का खंभा टूट गया और सड़क किनारे की रेलिंग क्षतिग्रस्त हो गई। गनीमत यह रही कि उस समय वहां से कोई राहगीर या वाहन नहीं गुजर रहा था, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था। इसी तरह विकासनगर उपनगर में भी पहाड़ी से पत्थर गिरने से कई खड़ी गाड़ियां क्षतिग्रस्त हो गईं।
जनजातीय जिलों में गंभीर संकट
जनजातीय जिला किन्नौर में पिछले कुछ समय से हो रही लगातार बारिश ने स्थिति को विकट बना दिया है। सांगला के पास बने मुख्य वैली ब्रिज पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। यदि यह पुल भूस्खलन के कारण क्षतिग्रस्त हो जाता है, तो सांगला घाटी का संपर्क पूरी दुनिया से कट जाएगा, जिससे वहां आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति ठप होने का डर बना हुआ है। किन्नौर जिले के लिप्पा गांव में एक 100 फुट लंबा लोहे का पुल पानी में डूब गया है, जिससे पूरे गांव का संपर्क जिले के बाकी हिस्सों से पूरी तरह कट गया है। टेटी खड्ड का जलस्तर अचानक बढ़ने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। इसके अलावा, कुप्पा क्षेत्र में भी भूस्खलन से तीन मकान, एक गौशाला और कई बागों को भारी नुकसान पहुंचा है। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर 13 प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित कर दिया है।
प्रशासन की चेतावनी और बचाव कार्य
राज्य सरकार और जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने नागरिकों और पर्यटकों से अपील की है कि वे बेहद सतर्क रहें। प्रशासन ने साफ कहा है कि लोग नदी, नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों के करीब बिल्कुल न जाएं। अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है। मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार ने बताया कि 9 जुलाई की शाम तक स्थिति अपेक्षाकृत कम गंभीर थी, जहां 75 सड़कें और 67 बिजली ट्रांसफार्मर प्रभावित थे, लेकिन 10 जुलाई की सुबह तक आंकड़ों में आई तेजी से पता चलता है कि बारिश का कहर लगातार बढ़ रहा है। प्रशासन की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्यों में जुटी हुई हैं।
मौसम विभाग का अगले छह दिनों का पूर्वानुमान
भारत मौसम विज्ञान विभाग ने हिमाचल प्रदेश के लिए अगले छह दिनों तक भारी बारिश का दौर जारी रहने की चेतावनी दी है। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में सिरमौर, शिमला, सोलन, मंडी, कुल्लू और किन्नौर में भारी से बहुत भारी वर्षा होने की संभावना है। बीते 24 घंटों में सिरमौर जिले के पच्छाद में सबसे अधिक 21 सेंटीमीटर वर्षा दर्ज की गई है। इसके अलावा नाहन में 16 सेमी, कसौली में 15 सेमी, धर्मपुर में 14 सेमी और सोलन व पालमपुर में 11-11 सेंटीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई है। विभाग ने चेतावनी जारी की है कि गरज-चमक, बिजली गिरने और तेज हवाओं के साथ-साथ फ्लैश फ्लड यानी अचानक बाढ़ आने का खतरा भी बना हुआ है।
सुरक्षा के लिए उठाए गए कदम
बैनमोर वार्ड की पार्षद शीनम कटारिया ने वन विभाग से मांग की है कि शिमला शहर में उन सभी पुराने और कमजोर पेड़ों का सर्वे कराया जाए, जिनसे भविष्य में जनहानि का खतरा हो सकता है। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा का 11 और 12 जुलाई को प्रस्तावित लाहौल-स्पीति का दौरा भी खराब मौसम और भारी बारिश के चलते रद्द कर दिया गया है। फिलहाल, पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को यह सलाह दी गई है कि वे मौसम विभाग के बुलेटिन पर लगातार नजर रखें और प्रशासन द्वारा जारी सुरक्षा एडवाइजरी का कड़ाई से पालन करें। राज्य में अभी भी कई इलाकों में धान की रोपाई का सीजन चल रहा है, जो बारिश के असंतुलित पैटर्न के कारण प्रभावित हो रहा है। प्रशासन का मुख्य फोकस सड़कों को जल्द से जल्द खोलने और प्रभावित क्षेत्रों में बिजली-पानी की आपूर्ति बहाल करने पर है।
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