पर्यटन सीजन में यातायात का बड़ा दबाव
हिमाचल प्रदेश की राजधानी और पहाड़ों की रानी के नाम से मशहूर शिमला में हाल ही में संपन्न हुए ग्रीष्मकालीन पर्यटन सीजन के दौरान सैलानियों की भारी भीड़ देखी गई। मानसून की दस्तक से पहले, मई से लेकर जुलाई के शुरुआती दिनों तक शिमला में लाखों की संख्या में पर्यटकों ने रुख किया। शिमला पुलिस द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस दौरान शहर में यातायात का जबरदस्त दबाव रहा, बावजूद इसके पुलिस ने सुचारु रूप से व्यवस्था को संभाले रखने का दावा किया है।
महीनेवार वाहनों का विवरण
पुलिस के रिकॉर्ड के मुताबिक, मई से लेकर अब तक शहर के विभिन्न प्रवेश मार्गों से कुल 22 लाख वाहनों की आवाजाही दर्ज की गई है। यदि महीने के हिसाब से बात करें, तो मई के महीने में करीब 8.5 लाख वाहन शिमला पहुंचे। इसके बाद जून में यह संख्या बढ़कर 10.5 लाख तक पहुंच गई, जबकि जुलाई महीने के शुरुआती दिनों में भी करीब 3 लाख वाहनों ने शिमला में प्रवेश किया। इतनी बड़ी संख्या में वाहनों के आने के बावजूद शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह से चरमराने से बच गई।
बढ़ी हुई सुरक्षा और निगरानी
यातायात के बढ़ते इस भारी दबाव को देखते हुए शिमला पुलिस ने अपनी कार्ययोजना में महत्वपूर्ण बदलाव किए थे। पुलिस ने अपने सुरक्षा बलों की संख्या में इजाफा किया। पहले जहां पुलिस और होमगार्ड के 136 जवान तैनात थे, वहीं जरूरत को समझते हुए इसे बढ़ाकर 265 कर दिया गया। इसके साथ ही, यातायात को और अधिक सुचारू बनाने के लिए 50 स्वयंसेवकों और 32 ट्रैफिक बाइक राइडर्स की मदद ली गई ताकि जाम लगने की स्थिति में तुरंत मौके पर पहुंचकर उसे खुलवाया जा सके।
सेक्टर के अनुसार प्रबंधन की रणनीति
शिमला पुलिस ने शहर को कुल पांच अलग-अलग सेक्टरों में बांटकर विकेंद्रीकृत प्रबंधन प्रणाली अपनाई। हर सेक्टर की जवाबदेही डीएसपी ट्रैफिक की निगरानी में एक एनजीओ ग्रेड-वन अधिकारी को दी गई थी। वरिष्ठ अधिकारियों ने भी खुद फील्ड में उतरकर पीक ऑवर्स के दौरान यातायात का जायजा लिया और स्थिति पर बारीकी से नजर बनाए रखी।
बाईपास और स्टिकर का प्रयोग
शहर के मुख्य मार्गों पर भीड़ को कम करने के लिए प्रशासन ने एक अनोखी रणनीति अपनाई। कुफरी, मशोबरा, नालदेहरा, अपर शिमला और किन्नौर जाने वाले वाहनों को शहर के मुख्य मार्ग के बजाय शोघी-मेहली बाईपास से भेजा गया। इन वाहनों की पहचान के लिए उन पर विशेष स्टिकर लगाए गए थे। इस व्यवस्था से प्रतिदिन औसतन 600 से 800 वाहन वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करते रहे, जिससे मुख्य शहर में ट्रैफिक का बोझ काफी कम हो गया। इसके अलावा, ट्रैवलर, अर्बेनिया और स्कैनिया जैसे बड़े वाहनों को भी पर्यटन स्थलों तक जाने की अनुमति दी गई ताकि पर्यटकों को परेशानी का सामना न करना पड़े।
पुलिस का आभार और अपील
शिमला पुलिस ने इस चुनौतीपूर्ण कार्य को सफल बनाने के लिए नागरिकों, पर्यटकों, होमगार्ड, एनसीसी, एनएसएस और स्कूली स्वयंसेवकों का सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया है। सोशल मीडिया के जरिए रीयल-टाइम ट्रैफिक अपडेट देने और इंटरसेप्टर वाहनों के माध्यम से नियमों के पालन पर भी पुलिस ने जोर दिया। अंत में, पुलिस ने भविष्य में भी सभी से यातायात नियमों का पूर्ण पालन करने की अपील की है ताकि शिमला आने वाले हर सैलानी का सफर सुरक्षित और सुखद बना रहे।
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