कार्यकाल खत्म होने से ठीक पहले बड़ा निर्णय
उत्तर प्रदेश की सरकार ने जिला पंचायत अध्यक्षों के कार्यकाल की समाप्ति के ऐन वक्त पर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। राज्य के सभी जिला पंचायत अध्यक्षों को प्रशासक के रूप में नामित करने का आधिकारिक आदेश शुक्रवार को जारी किया गया। यह फैसला तब आया है जब सभी जिला पंचायत अध्यक्षों का वर्तमान कार्यकाल 11 जुलाई को समाप्त हो रहा था। सरकार के इस कदम से पंचायत व्यवस्था में निरंतरता बनाए रखने की कोशिश की गई है।
नीतिगत निर्णयों पर रहेगी रोक
सामान्य तौर पर ऐसी परिस्थितियों में जिला मजिस्ट्रेट यानी डीएम को प्रशासक नियुक्त करने की परंपरा रही है, लेकिन इस बार राज्य सरकार ने मौजूदा अध्यक्षों को ही इस जिम्मेदारी के साथ बने रहने का विकल्प चुना है। पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने इस घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए बताया कि सरकार ने उन्हें प्रशासक के तौर पर नियुक्त करने की औपचारिकता पूरी कर ली है। हालांकि, उन्हें प्रशासनिक रूप से तैनात तो रखा गया है, लेकिन वे अपनी मर्जी से कोई भी बड़ा नीतिगत फैसला नहीं ले सकेंगे। कानूनी पेचीदगियों और प्रक्रियात्मक विवादों से बचने के लिए उनकी शक्तियों पर स्पष्ट तौर पर अंकुश लगाया गया है, ताकि वे केवल सामान्य प्रशासनिक गतिविधियों का संचालन कर सकें।
क्या काम कर पाएंगे जिला पंचायत अध्यक्ष
प्रशासक के रूप में अपनी नई भूमिका के तहत जिला पंचायत अध्यक्ष निम्नलिखित जिम्मेदारियों और कार्यों का निर्वहन कर सकेंगे:
- दैनिक आधार पर होने वाले सामान्य प्रशासनिक कामकाज को संभालना।
- जिले में पहले से चल रही विकास परियोजनाओं को जारी रखना।
- विभिन्न सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी करना।
- जिला पंचायत के नियमित और आवश्यक कार्य करना।
- जब तक नई चुनी हुई संस्थाएं अपना कार्यभार ग्रहण नहीं कर लेतीं, तब तक आधिकारिक दस्तावेजों पर उनके हस्ताक्षर मान्य रहेंगे।
https://www.indiatv.in/uttar-pradesh/yogi-govt-appoints-zila-panchayat-presidents-as-administrators-in-up-2026-07-10-1230484